डायबिटीज और हमारे पांव

आत्मघाती जूते चप्पल

by Dr. Sudhir Kumar Jain, MS, Phd Diabetic Foot Surgeon

चप्पल-जूते : रक्षक या भक्षक?

चप्पल-जूतों का डायबिटीज मरीज के पांव पर प्रभाव के बारे में जानने के पहले आइए एक सत्य घटना पर नजर डालें| मैक्सिको के एक दंपति छुट्टियाँ मना कर घर लौटे| अगले दिन पति अपने काम पर निकल गया| शाम को घर लौटने पर पत्नी ने पति से पूछा कि उसके कान के हीरे जड़ित लौंग कहाँ है? पति ने कहा कि उसको मालूम नहीं है| तब पत्नी ने कहा कि उसने तो लौंग को पतिदेव के जूते में छिपा कर रख दिया था| पति बेचारा अपने दिनभर के पहने जूते को खोलकर जैसे ही झाड़ना आरंभ किया लौंग टपककर बाहर आ पड़ा| लौंग की वजह से पांव में जख्म बन चुका था तथा उसमें काफी ललाई व सूजन आ चुकी थी| अगले ही दिन पति के पांव में संक्रमण चालू हो गया और बाद में लाख कोशिशों के बावजूद जान बचाने के लिए उसके पांव को काटना पड़ा| इस घटना की मूल वजह थी – पति डायबिटीज का मरीज था, उसके पांव में संवेदनशीलता थी, जिसकी वजह से लौंग के जूते के अंदर पड़े रहने की अनुभूति नहीं हुई|

इससे मिलती-जुलती कई सच्ची घटनाएं घटित होती रहती है, जिसमें पांव का रक्षक जूता ही पांव का भक्षक बन जाता है| तो क्या डायबिटीज के रोगी को जूते-चप्पल का प्रयोग नहीं करना चाहिए? नहीं, यदि जूते-चप्पल का प्रयोग करते वक्त मधुमेह का रोगी कुछ सावधानियां बरते तो जूते-चप्पल पांव के रक्षा कवच साबित हो सकते हैं| आईए, डायबिटीज रोगी और चप्पल-जूतों से जड़ित कुछ आवश्यक बातों पर चर्चा करें|

  1. जब भी नया जूता-चप्पल खरीदना हो, तो संध्याकालीन समय में ही खरीदें| क्योंकि इस वक्त डायबिटीज रोगी के पांव में थोड़ी-बहुत सूजन रहती ही है| यदि सवेरे जब पांव में सूजन न हो, हम जूते खरीदें तो स्वाभाविक है शाम तक यह जूते हमारे सूजे हुए पांव पर कसाव पैदा करेंगे और हमारे पांव को जख्मी कर सकते हैं|
  2. जिन चप्पल-जूतों के पहनने के दौरान पांव में जख्म लगा हो, उन जूतों-चप्पलों का तुरंत त्याग करें|
  3. हवाई (रबड़) या इसकी शक्ल की प्लास्टिक की चप्पलों का भारतवर्ष में धड़ल्ले से प्रयोग होता है| यह एक खतरनाक प्रथा है, खासकर मधुमेह के रोगी के लिए| इसके प्रयोग से प्रथम व द्वितीय अँगुलियों के बीच की जगह में घर्षण होता है, जो जख्म कर सकता है| चप्पल के फीते पांव में सूजन आने की वजह से पांव के उपरी हिस्से को काट कर जख्म व संक्रमण पैदा कर सकते हैं| ज्यादातर मधुमेह के रोगी के पांव की पकड़ इतनी कमजोर हो जाती है (स्नायु दुर्बलता की वजह से) कि चप्पलें उसके पांव से ही निकल जाती है, जिसका आभास स्वयं मरीज को भी नहीं होता है| फलतः मरीज इस घटना की पुनरावृत्ति को रोकने के लिए अपनी अंगुलियों को अत्याधिक नीचे की तरफ मोड़कर चप्पल पर अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश करता है| इसकी वजह से पांव की अंगुलियों के अग्रिम हिस्से में अत्याधिक घर्षण और दबाव पैदा होता है जो अंततः आयटन और घाव में तब्दील हो जाता है|
  4. चमड़े या प्लास्टिक की चप्पलें जिसमें अंगूठे को एक गोलाकार छल्ले में डालना (घुसाना) पड़ता है, भी खतरनाक हो सकती है| इसमें पांव के ऊपरी हिस्से में जख्म बन सकता है|
  5. एक्यूप्रेशर की चप्पलें, जिसकी ऊपरी सतह काफी खुरदरी हो, भी संवेदनहीन पांव पर कुप्रभाव दाल सकती है|
  6. नए चप्पल-जूते के प्रयोग की अवधि को धीरे-धीरे बढ़ाएं अन्यथा आपके संवेदनहीन पांव चोट ग्रस्त हो सकते हैं|
  7. कपड़े के जूते का प्रयोग भी संभल कर करें| लम्बी अवधि के लिए ऐसे तंग जूतों का प्रयोग करने से अंगुलियों पर घाव या फफोले बन सकते हैं| अंगुलियाँ भींची रहने की वजह से इनके बीच नमी पैदा हो सकती है, जो फंगस को न्योता देती है|
  8. ज्यादातर डायबिटीज के मरीज अपने पांव के लिए ज्यादा ही तंग जूते या चप्पल का चयन करते हैं| इसकी वजह यह है कि सही नाप के जूते-चप्पल का प्रयोग करने से इनको यह नहीं लगता कि वे जूते-चप्पल पहने हुए हैं| एक संवेदनहीन पांव सही नाप के जूते-चप्पल का अनुभव नहीं कर पाता| फलतः डायबिटीज रोगी सही नाप से कुछ छोटा व तंग जूतों-चप्पलों का चयन करते हैं| यह तंग जूते पांव में जख्म कर सकते हैं|
  9. आगे से तंग या चोंच निकले हुए जूते जिनका प्रयोग फैशन परस्त लोगों में काफी है, एक मधुमेह रोगी के पांव को चोटिल कर सकते हैं|
  10. जूतों का अग्रिम हिस्सा चौड़ा होना चाहिए तथा पहनने के बाद पाँचों अंगुलियों को आराम से हरकत करने की सुविधा रहनी चाहिए|
  11. जिन डायबिटीज रोगी के पांव की अंगुलियाँ विकृत या मुड़ी हुई हो या अंगुलियाँ आपस में ज्यादा ही सटी हुई हो, इनको आगे से खुले हुए जूतों (Sandal Shoes) का प्रयोग करना चाहिए|
  12. जूते में एड़ी को सहारा (Support) देने का प्रावधान होना चाहिए, जिससे पांव फिसल कर बाहर न आए|
  13. जूते-चप्पल की सिलाई इस कदर हो कि यह पांव की चमड़ी पर घर्षण न करे|
  14. जूते पहनते वक्त अपनी एड़ी को सही जगह पर रखें तत्पश्चात जूते के फीते (Velcro) को आवश्यकतानुसार लगाएं|
  15. जूते पहनते वक्त हड़बड़ी न करें| अपने हाथ जूते के अंदर डालकर तय कर लें कि कोई भी हानिकारक वास्तु जैसे कंकड़, बटन, सेफ्टी पिन वगेरह जूते के अंदर न हो|
  16. ऊंची एड़ी वाले जूते-चप्पल के प्रयोग से बचें| इनको धारण करने से पांव के अग्रिम भाग पर अत्याधिक दबाव या घर्षण पैदा होता है, जो आगे चलकर आयटन या घाव बन सकता है|
  17. जूतों के साथ सूती व आरामदायक सही नाप की जुराब पहनें| इससे जूतों के घर्षण की वजह से उत्पन्न होने वाले घाव से बचा जा सकता है|
  18. अधिक विकृत, ऑपरेशन हुआ या जख्म ठीक होने के बाद पांव का नाप जोख लेकर जूते बनवाएं न कि किसी दुकान से एक ही नाप के जूते खरीद कर अपने दो विभिन्न शक्ल एवं नाप के पैरों में ठूंसने का प्रयास करें|
  19. याद रखें सिर्फ कीमती और दिखने में सुंदर जूते-चप्पल का प्रयोग ही आपके संवेदनशील पांव को बचा नहीं सकता| इसके लिए जरुरी है कि विशेषज्ञ की राय पर अपने कीमती पांव के लिए सुरक्षित व आरामदायक जूते-चप्पल का चयन करें|
  20. चप्पल-जूतों की भी एक मियाद होती है| यह भी घिसकर विक्षिन्न या टूट सकते हैं| यदि इन टूटे व विक्षिन्न जूतों का प्रयोग होता रहे तो संभव है रक्षक जूते हमारे ही पांव में जख्म करके भक्षक बन जाएं|

जूते-चप्पल निर्जीव है, इनको हमारे पांव का रक्षक या भक्षक बनाना काफी हद तक इनको इस्तेमाल करने वालों पर निर्भर करता है|

आशा है, यह लेख पढ़कर पाठकगण (जो डायबिटीज के मरीज हों) जूते-चप्पल का सही चयन और प्रयोग करेंगे और अपने अनमोल पैरों पर अत्याचार न करके इनकी रक्षा करने में सफल होंगे|

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