चित्रसिला हिल पर स्थित नवगृह मंदिर का इतिहास

गुवाहाटी

असम की राजधानी गुवाहाटी शहर के बीचोबीच ब्रहमपुत्र के किनारे चित्रसिला हिल की चोटी पर स्थित नवग्रह मन्दिर का इतिहास बहुत पुराना है। मंदिर की बनावट विपरीत शिवलिंग जैसी कामाख्या मन्दिर की तरह ही है। केवल वायु निर्मित शिवलिंग, जिसके अन्दर प्रवेश करने करते ही किसी अनजान शक्ती का आभास होने लगता है।

navagraha_temple-2मंदिर के प्रवेश द्वार पर सबसे पहले दाहिने तरफ़ राहु की प्रतिमा को स्थापित किया गया है। इस मंदिर के बाई तरफ़ केतु की प्रतिमा को स्थापित किया गया है।यहाँ राहु केतु की प्रतिमा को स्थापित करने का उद्देश्य केवल इतना है कि जो भी ग्रह इस मन्दिर के अन्दर स्थापित है उनकी राहु सकारात्मक और केतु नकारात्मक वृत्ति को ही मनुष्य और जीव जन्तु ग्रहण करते है।

मन्दिर की पहली दहलीज पार करने के बाद बायें हाथ पर गजानन गणेशजी की प्रतिमा के साथ भगवान भोले नाथ और माता पार्वती की प्रतिमा है। इसके साथ में भगवान श्रीकृष्ण की प्रतिमा है। सबसे पहले इन्ही प्रतिमाओं की पूजा करनी पडती है और सभी ग्रहों से मंगल कामना प्राप्त करने के लिये इन्हीं शक्तिओं से आज्ञा लेनी अनिवार्य मानी जाती है।

तीनो शक्तियों से प्रार्थना करने के बाद यहां पर तीन दीपक जलाए जाते है और मन्दिर की दूसरी दहलीज को पार किया जाता है, जैसे ही मन्दिर की दूसरी दहलीज को पार करते है, केवल एक अंधेरी गुफ़ा दिखाई देती है।

गोलाकार मन्दिर के धरातल पर नौ शिव लिंग बने हुए है और प्रत्येक शिवलिंग की जल लहरी का मुख विभिन्न दिशाओं की तरफ़ रखा गया है। एक मुख्य शिवलिंग बीच में बना है और बाकी के आठ शिवलिंग आठों दिशाओं में बने हुए है।

Navagraha-Temple--3पूजा की कामना से जाने वाले व्यक्ति को सबसे पहले बायें चन्द्रमा और दाहिने शुक्र को लेकर जाना पडता है, लेकिन पूजा करने के बाद या दर्शन करने के बाद दाहिने चन्द्रमा होता है और बायें शुक्र की स्थिति होती है।

इसलिये ही मन्दिर में पूजा करने के बाद पुजारी का कहना होता है कि बाहर जाते समय पीछे घूम कर नही देखना होता है, अन्यथा पूजा का फल समाप्त हो जाता है। यहां आने वालों भक्तों को प्रसाद के रूप में सभी ग्रहों से सम्बन्धित अनाज को पानी में भिगोकर दिया जाता है।

कैसे पहुंचे नवगृह मंदिर-

अगर आप गुवाहाटी में हैं तो शहर के किसी भी कोने से टैक्सी, या ऑटो रिक्शा से सीधे मंदिर तक जा सकते हैं. मंदिर शहर के बीचो बीच तो है लेकिन पहाड़ की ऊंचाई तक बस नहीं जाती. इस लिए अधि पैसे खर्च नहीं करना चाहते हैं तो बीएस से उजान बाज़ार या गुवाहाटी क्लब बस स्टॉप पर उतर जाएं और वहां से ऑटो रिक्शा ले कर मंदिर जा सकते हैं. मंदिर के सामने ही कई दुकाने हैं जहां पूजा के सभी समाग्री मिल जाते हैं.

कहाँ ठहरें-

अगर आप किसी दूर स्थान से आये हैं तो स्टेशन के बाहर ही पान बाज़ार में ही कई होटल हैं जहां आप अपने बजट और सुविधा अनुसार ठहर सकते हैं. यहाँ से ऑटो रिक्शा से आप 15 मिनट में मंदिर पहुँच सकते हैं.

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