डायबिटीज और संक्रमण

By Sudhir Kumar Jain

Diabetic Foot Surgeon

कार्बनकल : एक एटमी बम

‘डॉक्टर साहब मेरे पति चार दिन से बुखार और बैचेनी से परेशान हैं| हमने अपने घरेलू चिकित्सक से भी राय ली है| मियादी, मलेरिया, डेंगू, पेशाब के टेस्ट भी नार्मल है| समझ में नहीं आ रहा है कि आखिर माजरा क्या है? हाँ, एक लाल चकता इनकी पीठ के ऊपर वाले हिस्से में नजर आ रहा है| इसी में ये दर्द की शिकायत भी कर रहे हैं|

क्या आप अनुमान कर सकते हैं कि जनाब किस बीमारी से जूझ रहे हैं? अतिश्योक्ति नहीं होगी यदि कहें कि महाशय एक एटम बम को पीठ पर लादे हुए हैं जो बाहर न फटने की वजह से अंदर अपनी काली करतूत को अंजाम दे रहा है| जी हां, ये महाशय कार्बनकल (CAR-BUNCLE) नामक बीमारी से पीड़ित हैं|

कार्बनकल का शाब्दिक अर्थ होता है – रक्त मणि या लाल मणि| दिखने में यह लाल पाषाण सा चमड़े से उभरा हुआ दिखता है, इसलिए इसको कार्बनकल कहा जाता है| प्रायः इसको फोड़े, फुंसी या बोइल के समकक्ष माना जाता है| किंतु वास्तविक रूप में यह ऐसा नहीं है| इसको ज्यादातर हल्के से लिया जाता है, सही इलाज में देरी की जाती है और अंततः यह रक्तमणि ज्वालामुखी का रूप धारण कर एटम बम की तरह फटने को आतुर हो जाती है| मरीज को जान का खतरा भी हो सकता है|

कार्बनकल डायबिटीज के रोगी में मुख्यतया होता है, हालांकि अन्य व्यक्तियों जो डायबिटिक न भी हो, को भी हो सकता है| जिन व्यक्तियों के शरीर की मारक या प्रतिरक्षा क्षमता में कमी आ जाए, उन्हें कार्बनकल हो सकता है|

आइए जानें यह एटम बम आखिर मनुष्य के शरीर में कैसे पनपता है? जहां फोड़ा, फुंसी बोइल मनुष्य के चमड़े में एक सीमित परिधि जो कि बाल की जड़ के इर्द-गिर्द पनप कर मवाद का रूप धारण करता है| वहीँ कार्बनकल में कई बाल की जड़ों में संक्रमण की वजह से मवाद बन जाता है| अंततः जहां साधारण फोड़ा एक मुंह बनकर फटता है वहीँ कार्बनकल में रक्तमणि के उभार वाले हिस्से में कई मुंह बन जाते हैं और दवाब पर रिसना चालू हो जाता है| यदि और सहज तरीके से कहा जाए तो कार्बनकल कई फोड़ों का समागम है जो चमड़े व चमड़े के नीचे चर्बी की एक बड़ी परिधि को अपने आगोश में लेकर विकट समस्या पैदा कर सकता है| क्योंकि इस ज्वालामुखी रुपी कार्बनकल की सतह यानी चमड़ी और तह या चर्बी दोनों ही निर्जीव हो मर कर मवाद का रूप धारण कर सकती है, इसे हम चमड़े व चर्बी का गेंग्रीन होना भी कह सकते हैं| रिसता हुआ कार्बनकल एक जाली या छाननी सदृश्य दिखता है|

कार्बनकल डायबिटीज रोगी में प्रायः पीठ के उपरी हिस्से, गर्दन के पीछे, पेट (इंसुलिन लेने वाली जगहों पर) में होता है| किंतु यह अन्य जगहों जैसे हाथ, पैर, अंडकोष, गुदाद्वार के अगल-बगल या नितंब आदि कहीं पर भी हो सकता है| स्टेफायलों कॉक्कस जीवाणु के सौजन्य से कार्बनकल पनपता है और मवाद में तब्दील होता है|

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