डायबिटीज और हमारे पांव

मिथ्या धारणाएं एवं अंधविश्वास

By Sudhir Kumar Jain

Diabetic Foot Surgeon

गतांक से आगे

(11) सिर्फ कागजी कार्यवाही-कितनी सार्थक : कटु सत्य होते हुए भी यह मानना पड़ेगा कि डायबिटीज रोगी के पांव का संक्रमण या घाव की दुर्दशा में कुछ हद तक चिकित्सक भी भागीदार हो सकता है| चूँकि संवेदनशील पांव में दर्द नहीं होता, मरीज पहले से उपश्रित पांव को नजरअंदाज करते रहता है| एक चिकित्सक संक्रमण या घाव को हलके से लेकर सिर्फ एंटीबायटिक और मलहम का पर्चा लिखना ही जरुरी समझता है| कई बार संक्रमण की वजह से बुखार, उल्टी आदि होने लगती है| ऐसे में अनावश्यक खून आदि की जांच पड़ताल करवाने की भी संभावना बढ़ जाती है| ज्यादातर मरीज जब तक सही जगह पर पहुँचते हैं, उनके हाथ में एक जांच पड़ताल व पर्चों का बड़ा सा पुलिंदा रहता है, जिसका समस्या समाधान में कोई विशेष महत्व नहीं रहता है| जरुरी यह है कि सही समय पर सही निदान हो और इसके लिए वास्तव में कोई लंबी चौड़ी जांच पड़ताल की आवश्यकता नहीं होती है| मरीज व चिकित्सक का साझा दायित्व है कि दोनों ही संक्रमण का संदेह होने पर देरी किए बगैर सही निदान व चिकित्सा के लिए सहयोग करें| ऐसे में अपनी अहं को अहमियत न देकर मरीज को सही रास्ता दिखाना एक चिकित्सक का कर्तव्य है|

(12) संक्रमण से सेप्टिक का सफर : मरीज के एक जगह में केंद्रित संक्रमण का पूरे शरीर में संक्रमण के रूप में फैलना आनन-फानन में हो सकता है| यह कुछ घंटों में भी हो सकता है| इसीलिए संक्रमण की नाजुकता को कभी भी इसकी अवधि से आंकना नहीं चाहिए|

(13) खाना बंद – डायबिटीज नियंत्रण पद्धति : प्रायः देखने में आता है कि डायबिटीज का मरीज जब संक्रमण से पीड़ित हो किसी भी तरह से अपनी डायबिटीज को नियंत्रण नहीं कर पाता है| तब हारकर अपना खाना कम या बंद करके इसके नियंत्रण की कोशिश करता है| यह एक बड़ी भूल है| संक्रमण या घाव को ठीक करने लिए विशेषज्ञ की राय के अनुसार सही आहार लेना बहुत जरुरी है, अन्यथा शरीर में हुई क्षति की पूर्ति नहीं की जा सकती है | नियमित और संतुलित आहार लेने पर ही संक्रमण या घाव में सुधार लाया जा सकता है|

(14) संक्रमित घाव तथा दर-दर की ठोकरें : डायबिटीज में मरीज के कई संस्थान जैसे – ह्रदय, गुर्दा, स्नायु, रक्त प्रवाह, मस्तिष्क आदि प्रभावित हो सकते हैं| पांव के संक्रमण से इन सभी संस्थानों की कार्य क्षमता और अधिक कम जाती है| प्रायः देखने में यह आता है कि एक संवेदनहीन संक्रमित पांव को लेकर मरीज अलग-अलग विशेषज्ञों और विभिन्न लेबोरेटरी के चक्कर लगाते रहते हैं| इससे संक्रमण और फैलकर जटिल परिस्थिति पैदा कर सकता है | वस्तुतः संक्रमण से पीड़ित मरीज को विशेषज्ञों की सेवा मिलनी चाहिए|

(15) गारंटी का सौदा : डायबिटीज मरीज के पांव के संक्रमण में कुछ भी भविष्यवाणी करना संभव नहीं होता है| मरीजों के कई शारीरिक संस्थानों की कार्यक्षमता पर असर पड़ने की वजह से संक्रमण या घाव का अंतिम अंजाम क्या होगा, इसकी भविष्यवाणी पर कोई भी सौदा नहीं होना चाहिए| अतः मरीज, उसके संबंधियों या चिकित्सक को संक्रमण या घाव के अंजाम पर गारंटी का आदान-प्रदान नहीं करना चाहिए| हाँ, संक्रमण या घाव का इलाज एक साझेदारी का कार्य है, जिसमें रोगी, संबंधी चिकित्सक दल आदि सभी शामिल हैं| भगवन की मर्जी सर्वोपरि है|

(16) कार्यशील पांव या कृत्रिम पांव : याद रहे पांव का प्रधान कार्य मनुष्य को चलंत रखना है| यदि एक पांव जो दिखने में थोड़ा कुरूप हो या जिसकी अंगुलियां निकाल दी गई हों, मरीज का भार ढो सकता है तो यह एक कृत्रिम पांव से बहुत बेहतर है| जो बच जाए और कार्य सक्षम हो, उसी पर संतोष करें|

(17) वार का फेर : मरीज यदि संक्रमण से पीड़ित हो और पांव या जान पर खतरा मंडरा रहा हो तो उसको डाक्टरी सलाह पर तुरंत अस्पताल में भर्ती करें, चाहे आपका ज्योतिष शास्त्र उस दिन विशेष के बारे में कुछ भी कह रहा हो| यानि शनिवार हो या अन्य कोई वार हो, यदि अस्पताल में दाखिला जरुरी है तो देर न करें|

(18) घरेलू इलाज – कितने सार्थक : ताबीज, बाल, मिर्च, गोभी, हल्दी, धार्मिक काला धागा आदि का प्रयोग कर हमें मरीज के पांव या जान के साथ खिलवाड़ नहीं करना चाहिए| यह सब अंधविश्वास को बढ़ावा देते हैं और सही चिकित्सा के आरंभ में रोड़ा अटकाते हैं|

(19) काट दिया या बचा दिया : याद रहे, मरीज की जान सर्वोपरि है, इसके बाद उसका पांव और पांव की अंगुलियां हैं| यदि अंगुली काटकर पांव बचा और पांव काटकर जान बची तो इसे आप क्या कहेंगे?  ज्यादातर ‘क्या कटा’ पर ज्यादा गुरुत्व दिया जाता है न कि ‘क्या बचा’ पर| यह सरासर चिकित्सक का गलत आकलन है| हमें हमेशा – ‘क्या बचाया गया’ पर ज्यादा ध्यान केंद्रित कर चिकित्सक का आकलन करना चाहिए|

(20) संक्रमण / घाव से मुक्ति यानी जिंदगी भर की छुट्टी : डायबिटीज रोगी को संक्रमण व घाव बार-बार भी हो सकता है यदि आवश्यक सावधानियां न बरती जाए तो| अतः एक बार संक्रमण या घाव से मुक्त होने पर मरीज को और अधिक सजग हो जाना चाहिए|

       आइए, हम सभी, चाहे हम मरीज, संबंधी, चिकित्सक जो भी हों, डायबिटीज संक्रमण पर अपनी सोच बदलें और एकजुट होकर इस रावण रुपी महामारी का सामना कर प्रगति के पथ पर अग्रसर हों| (समाप्त)

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