NORTH EAST FLOOD : उत्तर-पूर्वी राज्यों में बारिश का कहर जारी , अब तक 22 की मौत

 

गुवाहाटी/ अगरतला/ इम्फाल / ऐजाल

देश के उत्तर-पूर्वी राज्यों में बारिश का कहर जारी  है. बाढ़ में  मरनेवालों की संख्या बढ़कर 22 हो गयी है. असम में बाढ़ से प्रभावित जिलों की स्थिति बहुत खराब है.

 

असम में बाढ़ की स्थित  में सुधार नहीं

असम राज्य आपदा प्रबंध प्राधिकरण के मुताबिक होजई, कर्बी आंगलांग पश्चिम, गोलाघाट, करीमगंज, हैलाकांडी  और कछार जिलों में 4.5 लाख से भी ज्यादा लोग बाढ़ प्रभावित हुए हैं. एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें राहत और बचाव कार्य में जुटी हैं. लोगों को बाढ़ प्रभावित इलाकों से निकाला जा रहा है.

गौरतलब है कि दो दिन पहले असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एएसडीएमए) ने कहा था कि राज्य में फिलहाल 668 गांव बाढ़ की चपेट में है. बाढ़ की वजह से अभी तक कुल 1912 हेक्टेयर में लगी फसल पूरी तरह से बर्बाद हो चुकी है. स्थानीय प्रशासन के अनुसार अकेले गुवाहाटी शहर में चार जगहों पर भूस्खलन हुआ है.

मणिपुर में बाढ़ की स्थिती में सुधार   

हालांकि मणिपुर में स्थिति थोड़ी संभली है. राजधानी इंफाल में भी हालात कुछ काबू हुए हैं, लेकिन थॉबल, इंफ़ाल वेस्ट में हालात जस के तस बने हुए हैं. मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह ने रविवार को कहा कि उन्होंने फोन पर केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह से बात की और राज्य में बाढ़ की स्थिति के बारे में उन्हें जानकारी दी है. साथ ही बाढ़ पीड़ितों की सहायता के लिए तत्काल मदद की भी मांगी है.

त्रिपुरा में 173 राहत शिविर

त्रिपुरा में भी बाढ़ के हालात में रविवार को काफी सुधार हुआ. राज्य की सभी बड़ी नदियों में जलस्तर कम हुआ है. हालांकि, कैलाशनगर सब-डिवीजन के कई इलाकों में पानी भरा हुआ है. यहां 3000 से ज्यादा किसान फसलों के नुकसान को लेकर चिंतित हैं. राज्य आपदा अभियान केंद्र के मुताबिक प्रदेश के बाढ़ प्रभावित 32 हजार लोग 173 राहत शिविरों में पनाह लिए हुए हैं. इनमें ज्यादातर सबसे ज्यादा प्रभावित ऊनाकोटी जिले के हैं.

मिज़ोरम का हाल बेहाल  

मिजोरम में बाढ़ का कहर बढ़ता ही जा रहा है, खासकर उत्तरी मिजोरम के 25 गांवों की स्थिति खराब है. ये गांव राज्य के अन्य हिस्सों से कट गए हैं.  गौरतलब है कि दो दिन पहले असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एएसडीएमए) ने कहा था कि राज्य में फिलहाल 668 गांव बाढ़ की चपेट में है। बाढ़ की वजह से अभी तक कुल 1912 हेक्टेयर में लगी फसल पूरी तरह से बर्बाद हो चुकी है.  स्थानीय प्रशासन के अकेले गुवाहाटी शहर में चार जगहों पर भूस्खलन हुआ.

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