अटल बिहारी वाजपेयी पंचतत्व में विलीन, बेटी नमिता ने दी मुखाग्नि

अटल बिहारी वाजपेयी का स्मृति स्थल में अंतिम संस्कार किया गया. अटल बिहारी वाजपेयी को उनकी बेटी नमिता भट्टाचार्य ने मुखाग्नि दी.

आपको बता दें कि अटल बिहारी वाजपेयी ने अपने कॉलेज की जमाने की दोस्‍त राजकुमारी कॉल की बेटी नमिता को गोद लिया था। अटल बिहारी वाजपेयी राजकुमारी कॉल के परिवार के साथ ही दिल्‍ली में रहते भी थे।

भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी का गुरुवार को दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में निधन हो गया था. वे 93 वर्ष के थे.

अटल बिहारी वाजपेयी पंचतत्व में विलीन, बेटी नमिता ने दी मुखाग्नि

वाजपेयी की अंतिम यात्रा में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, भाजपा अध्यक्ष अमित शाह, भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी, कई राज्यों के मुख्यमंत्री, कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी भी शामिल थे.

पाकिस्तान के कानून मंत्री अली ज़फ़र, अफ़ग़ानिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति हामिद करज़ई, श्रीलंका के कार्यवाहक विदेश मंत्री लक्ष्मण किरिएला ने भी भारत रत्न वाजपेयी को अंतिम श्रद्धासुमन अर्पित किए.

अटल बिहारी वाजपेयी पंचतत्व में विलीन, बेटी नमिता ने दी मुखाग्नि

सुबह भाजपा हेडक्वार्टर में उनका शव अंतिम दर्शनों के लिए रखा गया था जहां भाजपा के सभी दिग्गज नेता और कार्यकर्ता मौजूद रहे.

अटल बिहारी वाजपेयी की अंतिम झलक पाने को बेताब हजारों लोग. रास्ते में जगह-जगह खड़ी भीड़ ” अटल अमर रहे, वंदे मातरम्, भारत माता की जय का नारा लगा रही थी “.

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के अंतिम दर्शन के लिए अफगानिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति हामिद करजई भारत पहुंचे.

अटल बिहारी वाजपेयी पंचतत्व में विलीन, बेटी नमिता ने दी मुखाग्नि

अटल जी तीन बार बने थे प्रधानमंत्री

बीजेपी के संस्थापकों में शामिल वाजपेयी 1996 से 1999 के बीच तीन बार पीएम चुने गए। वह पहली बार 1996 में प्रधानमंत्री बने और उनकी सरकार सिर्फ 13 दिनों तक ही रह पाई. 1998 में वह दूसरी बार प्रधानमंत्री बने, तब उनकी सरकार 13 महीने तक चली। 1999 में वाजपेयी तीसरी बार प्रधानमंत्री बने और 5 वर्षों का कार्यकाल पूरा किया. 5 साल का कार्यकाल पूरा करने वाले वह पहले गैरकांग्रेसी प्रधानमंत्री थे.

2005 में लिया राजनीति से संन्यास

कभी अपनी कविताओं और भाषणों से लोगों को मंत्रमुग्ध करने वाले वाजपेयी स्वास्थ्य खराब होने के कारण सार्वजनिक जीवन से दूर हो गए थे. 2005 में उन्होंने सक्रिय राजनीति से संन्यास ले लिया था और तब से वह अपने घर पर ही थे. अटल बिहारी वाजपेयी को कई वर्षों से बोलने और लिखने में भी तकलीफ होती थी। वह किसी को पहचान भी नहीं पा रहे थे.

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