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अस्पताल में जिंदगी की जंग लड़ रही राष्ट्रीय तीरंदाज गोहेला बोड़ो

गुवाहाटी

असम को राष्ट्रीय स्तर पर गौरवांवित करने वाली राष्ट्रीय तीरंदाज गोहेला बोड़ो आज सरकारी उपेक्षा की शिकार होकर अस्पताल में अपनी जिंदगी से जंग लड़ रही है| एक अज्ञात रोग से पीड़ित होने के बाद नवंबर 2016 से ही गोहेला का इलाज चल रहा है| वह SLE (systemic lupus erythomatosus) और ANCA (anti neutrophoil cytoplasmic antibodies) नामक अज्ञात रोग से ग्रस्त है|

मौजूदा गोहेला का इलाज गुवाहाटी मेडिकल कॉलेज अस्पताल में चल रहा है| लेकिन डॉक्टरों का कहना है कि जीएमसीएच में इस रोग का इलाज संभव नहीं है| इसलिए डॉक्टर ने बेहतर इलाज के लिए गोहेला को दिल्ली के एम्स या चेन्नई के अपोलो अस्पताल ले जाने की सलाह दी है| हालांकि आर्थिक तंगी की वजह से और बिना सरकारी सहायता के गोहेला का परिवार उसका इलाज कराने में असमर्थ है|

कोकराझाड़ के न्यू आमगुड़ी गाँव की निवासी गोहेला बोड़ो जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर तीरंदाजी में कई मैडल जीत चुकी है| गोहेला ने कोकराझाड़ के भारतीय खेल प्राधिकरण में 2008 में अपने करियर की शुरुआत की थी| अपने 9 साल के करियर में उसने विभिन्न राष्ट्रीय, राज्य तथा जिला स्तर की तीरंदाजी प्रतियोगिता में 72 मैडल जीते| हाल ही में सन 2015 में उसने केरला में राष्ट्रीय खेलों में हिस्सा लिया था| गोहेला ने राष्ट्रीय स्तर पर 13 स्वर्ण, 8 रजत और 8 कांस्य पदक, राज्य स्तर पर 11 स्वर्ण और 9 कांस्य पदक तथा जिला स्तर पर 10 स्वर्ण और 2 कांस्य पदक जीते थे| 2015 में गुवाहाटी में आयोजित 60 वें नेशनल स्कूल गेम्स में भी उसने चार स्वर्ण पदक अपने नाम किए| गोहेला को हालांकि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी भारत का प्रतिनिधित्व करने का मौक़ा मिला था|

यह बेहद ही दुर्भाग्यजनक बात है कि राष्ट्रीय स्तर पर असम को गौरवांवित करने वाली खिलाड़ी की आज यह दशा है| अभी तक सरकार की ओर से इस प्रतिभावान खिलाड़ी को कोई मदद नहीं मिली है| राज्य के खिलाड़ियों के प्रति सरकार अगर इसी तरह उदासीन बनी रही तो आने वाली पीढ़ी खेल को पेशे के रूप में अपनाने से पहले सौ बार सोचने पर मजबूर होगी|

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