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मेघालय में भारत की सबसे  बड़ी सूअर पालन परियोजना का शुभारंभ

राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (एनसीडीसी) ने मेघालय सुअर पालन मिशन के अंतर्गत सहकारिताओं के माध्यम से सुअर पालन क्षेत्र को विकसित करने के लिए मेघालय सरकार की 220.50 करोड़ रुपये की  परियोजना को मंजूरी दी है।

नई दिल्ली :  मेघालय सरकार ने सहकारिताओं के लिए शीर्ष वित्तपोषण निकाय एनसीडीसी की सहायता से भारत की सबसे बड़ी सूअर पालन परियोजना  का सूत्रपात किया है ।

श्री कोनराड संगमा, मुख्यमंत्री मेघालय ने वित्तीय सहायता की पहली किश्त के रूप में लगभग 53 करोड़ रुपये के अंतरण पर राष्ट्रीय राजधानी में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा, यह परियोजना तत्काल लागू की जाएगी, क्योंकि यह गाँवों में किसानों की आर्थिक दिशा एवं दशा को प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित करती है।  उन्होंने माननीय प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी को किसानों की आय दोगुनी करने के आह्वान के लिए धन्यवाद दिया, जिसके लिए यह परियोजना निर्देशित है ।  इस परियोजना में आत्मनिर्भर भारत शामिल है क्योंकि यह न केवल मेघालय में सूअर-मांस के आयात का विकल्प बनेगा, बल्कि स्वच्छ सूअर-मांस उत्पादों का निर्यात भी करेगा । इस कार्यक्रम में श्री प्रिस्टोन तिनसॉन्ग, उप मुख्यमंत्री, मेघालय द्वारा भाग लिया गया ।

राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (एनसीडीसी) ने मेघालय सुअर पालन मिशन के अंतर्गत सहकारिताओं के माध्यम से सुअर पालन क्षेत्र को विकसित करने के लिए मेघालय सरकार की 220.50 करोड़ रुपये की  परियोजना को मंजूरी दी है।  परियोजना के तहत 300 दूरस्थ सुअर प्रजनन फार्म, छोटे पशुवधखानों, उत्पाद परिवहन हेतु छोटे वाहन और पोर्क वेंडिंग कियोस्क स्थापित करने की परिकल्पना की गई है। इसमें निर्यात के लिए सुअर चारा भंडारण इकाई, गुणवत्ता प्रमाणन सुविधा और प्रसंस्कृत उत्पादों के लिए पायलट सुविधा, ब्रांड संवर्धन और निर्यात हेतु बाजार समर्थन शामिल हैं। परियोजना शीत श्रंखला का समर्थन करने के लिए प्रशीतित परिवहन वाहन भी प्रदान करेगी। यह पूर्वोत्तर में एनसीडीसी द्वारा स्वीकृत की गई सबसे बड़ी परियोजना है और देश में सुअर पालन क्षेत्र के विकास की पहली परियोजना है।

मेघालय राज्य सरकार ने सूअर-पालन मिशन के कार्यान्वयन की रूपरेखा तैयार की है। इसमें मेघालय पशुधन उद्यम उन्नति समिति (एम-लीड्स) के अध्यक्ष एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी के रूप में क्रमशः प्रधान सचिव पशुपालन और पशु चिकित्सा एवं आयुक्त तथा सचिव, वित्त और सहकारिता विभाग, समिति का गठन किया गया है। एम-लीड्स के शासी निकाय में समुदाय एवं ग्रामीण विकास विभाग, मेघालय बेसिन विकास प्राधिकरण, मेघालय राज्य ग्रामीण आजीविका समिति तथा मेघालय राज्य सर्वोच्च बैंक जैसे अन्य महत्वपूर्ण हितधारकों का भी प्रतिनिधित्व है। 208 सहकारी समितियों को पहले से ही सूअर पालन मिशन और एम-लीड्स के कार्यान्वयन के लिए पहचाना जा चुका है और राज्य सरकार अब सूअर पालन मिशन के कार्यान्वयन के लिए तैयार है।

यह परियोजना पशुपालन और पशु चिकित्सा विभाग, मेघालय सरकार द्वारा मेघालय सुअर पालन एवं पशुधन विकास सोसाइटी (एम.पी.एल.डी.एस.) और मेघालय बेसिन प्रबंधन एजेंसी (एम.बी.एम.ए.) के सहयोग से कार्यान्वित की जाएगी, जिसमें एकीकृत ग्राम सहकारी समितियां (आई.वी.सी.एस.) और सूअर पालन विकास के क्षेत्र में कार्य कर रही सहकारी समितियां शामिल हैं ।

मेघालय सूअर पालन मिशन (एम.पी.एम.) का उद्देश्य सूअर मांस के उत्पादन में मात्रा में विशाल वृद्धि करना है, ताकि न केवल पूर्वोत्तर क्षेत्र की मांग को पूरा किया जा सके बल्कि एक्ट ईस्ट नीति के अनुरूप दक्षिण पूर्व एशिया को भी निर्यात किया जा सके।

मेघालय में भारत की सबसे  बड़ी सूअर पालन परियोजना का शुभारंभ

आगामी तीन वर्षों के कार्यान्वयन में, मेघालय सूअर पालन मिशन 35000 सूअर पालक किसानों को आय का नियमित स्रोत तथा राज्य के 5000 आदिवासी समुदाय से संबंधित बेरोजगार युवाओं को आजीविका का नियमित स्रोत प्रदान करेगा ।  निजी क्षेत्र के सहयोग से, न्यूक्लियस ब्रीडिंग केन्द्रों में प्रजनन के लिए उच्च गुणवत्ता वाले जर्मप्लाज्म को लाया जाएगा।  ये केंद्र सहकारी समितियों से संबद्ध परियोजना के लाभार्थियों को गुणवत्ता वाले पिगलेट (सूअर शिशु) की निरंतर आपूर्ति का स्रोत होगा ।  इस परियोजना के अंतर्गत उच्च गुणवत्ता वाले सूअर का मांस प्राप्त किया जा सकेगा, राज्य के बाहर से आने वाले पिगलेट (सूअर शिशु) पर निर्भरता कम रहेगी तथा गुणवत्ता एवं रोग प्रतिरोधी पिगलेट (सूअर शिशु) की आपूर्ति सुनिश्चित करेगी।  इस परियोजना के परिणामस्वरूप अधिशेष उत्पादन भी होगा जो अन्य राज्यों और सीमाओं से बाहर निर्यात किया जाएगा।

यह परियोजना मेघालय में कमजोर वर्गों की समितियों के लिए बहुउद्देशीय सहकारी अवसंरचना, अच्छी तरह से व्यवस्थित बैकवर्ड और फॉरवर्ड लिंकेज, साफ़ स्वच्छ सूअर/ सूअर उत्पादों के उत्पादन और विपणन के माध्यम से स्थायी आजीविका विकास जैसे उद्देश्यों को पूरा करने के लिए प्रस्तावित है।

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