श्रीराम कथा ज्ञान यज्ञ, दिन-2;  श्रीराम कथा भारत के चरित्र का पोषण करती  है : साध्वी ऋतम्भरा

 

गुवाहाटी

श्री गोहाटी गोशाला के वृन्दावन गार्डन में श्रीराम कथा सत्संग सम्मिति, गुवाहाटी के तत्वावधान में चल रही श्रीराम  कथा ज्ञान यज्ञ ‘ के दुसरे दिन मंगलवार  को शिव-पार्वती विवाह प्रसंग के साथ श्रीराम कथा को रवानगी देते हुए वात्सल्य मूर्ति दीदी मा ऋतंभरा ने कहा कि श्रीराम  कथा भारत के चरित्र का पोषण करती है। उन्होंने श्री राम  को देश का सयंम और भगवान कृष्न  को बुद्धि बताया । दीदी मा ने कहा कि जिनको अपराजित पौरुष और  पूर्ण परमात्मा की चाहत होती है, वही भगवान श्रीराम की शरण  में आते है। देश की युवा पीछे को तुलसी  के पौधे की संज्ञा  देते हुए उन्हों ने कहा कि इन पौधों का सिंचन  वासना की  शराब से नहीं चरित्र के गंगाजल से किया जाना चाहिए।

क्या प्रसंग को आगे बढाते हुए वात्सल्य मूर्ति ने कहा कि गिरीराज की पुत्री  पार्वती ने पूरी निष्ठा के साथ  तप कर शिव के वाम अंग को प्राप्त किया । उन्होंने कहा कि पत्नी को सहधर्मिनी कहा गया है, क्योंकि बिना पत्नी के कोई भी धर्म कार्य अपूर्ण है । दीदी मा ने कहा कि अगर वह राम है और वैदेही निर्वासित है तो यह यज्ञ करने की योग्यता नहीं रखताI इस योग्यता  हासिल करने के लिए भले सोने की  बनी ही क्यों न हो. वैदेही का साथ में होना जरूरी है।

कथा प्रसंग को आगे बढाते हुए दीदी मा ने भगवान  श्रीराम के जन्म के कारणों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि मनु और शतरूपा के कठोर  तप से प्रसन्न होकर भगवान ने उनको उनके ही जैसे पुत्र की प्राप्ति  का वरदान दिया। बाद में शतरूपा ने कौशल्या बनकर जन्य लिया , जिनकी कोख से भगवान श्री राम पैदा हुएI  दीदी मा ने कहा कि देवर्षि नारद  ने भगवान को शाप दिया था कि आप पत्नी के वियोग में तड़पेंगे और वानर आपकी मदद कोंगा । नारद जी के इस शाप को फलित करने के लिए श्रीराम ने जन्म लिया I प्रसंग को आगे बढाते हुए उन्हों ने कहा कि रावण को भी शाप था कि अयोध्या  नरेश के पुत्र श्रीराम के हाथों उनका वध होगा। इस से बचने के  लिए रावण ने लाख उपाए किये मगर आखिर कार वह होकर रहा,  जिसके लिए भगवान श्रीराम ने जन्म  लिया था।

श्रीराम कथा ज्ञान यज्ञ, दिन-2;  श्रीराम कथा भारत के चरित्र का पोषण करती  है : साध्वी ऋतम्भरा

इसके  बाद श्रीराम  कथा के मुख्य यजमान विजय कुमार जसरासरिया के परिवार के सदस्यों द्वारा श्री रामजन्म की सजीव झांकियां प्रस्तुत की गई। भगवान जन्म के इस पावन मौके पर महिलाओं  ने नृत्य किया और भजन-बधाईयाँ गाई  गई।

कथा के दौरान दीर्दा मा ने नारी स्वाभिमान और सशक्तिकरण का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि सशक्तिकरण  के प्रयास में यदी  बच्चों की लोरी ओय बुजुर्गों की लाठियां छीन  जाए तो घर स्वर्ग  । जिम महिला में स्वाभिमान न हो वह भला स्वाभिमानी बच्चे की मा कैसे बन सकती है। उन्होंने इस बात पर पीड़ा प्रकट करते कहा कि बेटे के जन्म पर थाल बजाई जाती है जब कि बेटी के जन्म पर ठीकरे  फोड़े जाते हैं ।

उन्होंने कहा कि महिला भ्रूण को यदी  जीने का अधिकार दिया जाता तो आज उनमें से  ही कोई कल्पना बनकर  पूरे आसमान  को नाप रही होती तो कोई लता बनकर अपनी सुर साधना के दम पर दुनिया  में देश का नाम रोशन का रही होती । उन्होंने कहा कि हमरि देश का भला तभी होगा, जब हर एक वृद्धाश्रम, अनाथाश्रम – नारी सुधार्गृह  खाली रहै और संयुक्त  परिवार पुष्प- पल्लवित होते रहे।

कथा प्रारंभ होने से पृवं मुख्य यजमान परिवार द्वारा व्यामपीठ का पूजन और दीदी मा का अभिवादन किया गया । इम मौके पर श्रीराम कथा सत्संग सम्मिति गुवाहाटी के सह मंत्री रमेश चांडक द्वारा संचालित संछिप्त अभिनन्दन कार्यक्रम में श्रीराम कथा सत्संग सम्मिती गुवाहाटी के मंत्रीअशोक धानुका, रामगोपाल हरलालका,  जयप्रकाश गोयनका. ‘दैनिक पूर्वोदय ‘ के संपादक रवी शंकर रवी, उनकी पत्नी श्रीमती कंचन, कार्यकारी सम्पादक राजकुमार शर्मा, समाजसेवी ललित घानुका, एलएन चौधरी और सुंदरलाल जैन का दीदी मा ने राम माला पहनाकर स्वागत किया I इस अवसर पर हनुमंत आराधिका सम्मिति की सदस्याओं ने मिल कर दीदी मा को उनकी वात्सल्य परियोजना के लिए एक लाख रुपए की धनराशि भेंट की।

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