आर्थिक नाके बंदी के कारण बेहाल मणिपुर

इम्फाल 

मणिपुर में विधान सभा चुनाव की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं. 4 और 8 मार्च को दो चरणों में 60 सीटों पर चुनाव होने हैं. लेकिन नए जिलों के गठन के विरोध में यूनाइटेड नागा काउंसिल(यूएनसी) द्वारा 1 नवंबर से शुरू आर्थिक नाकेबंदी अब भी जारी है. आर्थिक नाके बंदी के कारण मणिपुर बेहाल होता जा रहा है.

हालांकी राज्य के मुख्यमंत्री ओकराम इबोबी सिंह ने यूएनसी के साथ बातचीत करने के लिये तैयार है और यूएनसी नाकेबंदी समाप्त करने का भी आग्रह किया है. लेकिन यूएनसी ने चुनाव आयोग की ओर से मणिपुर में विधानसभा चुनावों की घोषणा के बावजूद नाकेबंदी जारी रखने की घोषणा की है.

आर्थिक नाकेबंदी से राज्य में आवश्यक वस्तुओं और खाद्य सामग्री की भारी किल्लत पैदा हो गई है. राज्य को देश के बाकी हिस्सों से जोड़ने वाली सड़कों-नेशनल हाइवे 2 और 37 पर वाहनों की आवाजाही ठप है. यह पर्वतीय राज्य सब्जियों और खाने-पीने की दूसरी चीजों के लिए दूसरे राज्यों पर निर्भर है. लेकिन वाहनों की आवाजाही ठप होने की वजह से आवश्यक वस्तुएं बाजार से गायब हैं. पेट्रोलियम पदार्थों, रसोई गैस एवं दवाइयों की आपूर्ति नहीं हो पा रही है. इससे आम जनजीवन ठहर गया है.

राज्य सरकार और सिविल सोसायटी ने नाकेबंदी के लिये केंद्र और नेशनलिस्ट सोशलिस्ट काउंसिल ऑफ नागालैंड (इसाक-मुइवा) को जिम्मेदार ठहराया है. इस बीच एनएससीएन (आईएम) के साथ शांति वार्ता के वार्ताकार आर एन रवि मणिपुर के विभिन्न नागरिक संगठनों से 20 जनवरी को आर्थिक नाकेबंदी के मुद्दे पर बातचीत के लिए दिल्ली आने का आह्वान किया है.

बता दें कि मणिपुर में आर्थिक नाके बंदी कोई नया नहीं है. वर्ष 2010 में भी यहां आर्थिक नाकेबंदी की गयी थी जो 68 दिनों तक रही थी और वर्ष 2011 में यह 121 दिनों तक जारी रहा था .

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