असम: मुस्लिम और हिन्दू बच्चों का हो गया अदला बदली, DNA रिपोर्ट से खुल गया पोल

असम  में अस्पताल के कर्मचारियों की लापरवाही से एक मुस्लिम बच्चा हिन्दू के घर और हिन्दू बच्चा मुस्लिम परिवार के घर पहुँच गया. लेकिन जहां DNA रिपोर्ट ने इस की पोल खोल दी वहीं दोनों परिवारों ने इन्सानियात और हिन्दू-मुस्लिम एकता की मिसाल क़ायम कर दी….. पढ़िए Shrawan Kumar Jha की special रिपोर्ट 

गुवाहाटी

असम के दरंग जिले के सरकारी अस्पताल में स्वास्थकर्मियों की लापरवाही के कारण जन्म के समय दो बच्चों का अदला बदली हो गया. सरकारी चिकित्साकर्मी के इस लापरवाही के कारण प्रकृतमात् सनेह से वंचित रह गए इन दोनों बच्चों का मामला लगभग तीन वर्ष के बाद सामने आया है. DNA जाँच रिपोर्ट से चिकित्सालय की लापरवाही का पोल खुल गया. अब मामला अदालत में है और 24 जनवरी को इस मामले की अंतिम पेशी है.

इस सम्बन्ध में NESamachar से बात चीत करते हुए एक बच्चे का पिता शहाबुद्दीन अहमद ने बच्चे बदले जानी की पूरी कहानी यूं ब्यान की. शहाबुद्दीन बदली चर का निवासी है और पेशे से एक शिक्षक है. शहाबुद्दीन ने अनुसा वर्ष 2015 के 11 मार्च की सुबह मंगलदई के सरकारी अस्पताल में उस की पत्नी ने एक पुत्र को जन्म दिया.  पुत्र के जन्म से दोनों पती-पत्नी बहुत खुश थे. पांच दिन अस्पताल में रहने के बाद वह अपनी पत्नी सलमा अहमद और पुत्र के साथ आपने गाँव बदलीचर आ गए.

उसने अपने पुत्र का नाम जुनेद अहमद रखा कुछ दिनों तक सब कुछ ठीक रहने के बाद ज्यो ज्यो बच्चा बड़ा होता गया तो जुनेद का चेहरा मंगोल ट्राइबल जैसा उभरने लगा इसके बाद सलमा को शक हुवा लेकिन ऊपर वाले का आशीर्वाद समझ सलमा चुप हो गई.  लेकिन जब जब वह जुनेद को देखती तो रोने लगती.

शहाबुद्दीन  हर रोज़ अपनी पत्नी को रोते नहीं देख सका और इस सम्बन्ध में मंगलदई जाकर स्वस्थ विभाग के अधिकारियों  से  फ़रयाद किया. लेकिन किसी भी प्रकार की सुनवाई नहीं हुई.  मजबूर हो कर शहाबुद्दीन ने   स्वस्थ विभाग में एक RTI आवेदन कर 2015 के 11 मार्च को अस्पताल में जन्मे बच्चों का पूरा विवरण  माँगा विभाग ने RTI का जवाब देते हुए बताया क़ि उस दिन केवल दो बच्चों का जन्म हुवा था.

अब शहाबुद्दीन ने स्वस्थ विभाग दुवारा दिए तथ्य के आधार पर उस दिन जन्मे दुसरे बच्चे के पिता अनिल बोड़ो के घर पहुँच बैजपारा गॉव गया. शहाबुद्दीन ने अनिल बोड़ो को  पूरी कहानी सुनायी और अनिल से सहयोग माँगा.

शहाबुद्दीन ने अनिल को बताया के उसी दिन उस की पत्नी सेवाली ने भी एक पुत्र को जन्म दिया था. कहीं ऐसा न हो की सेवाली और सलमा का पुत्र बदल गए हों.

अब शहाबुद्दीन ने अनिल के सहयोग से स्वस्थ विभाग के गुहाटी  स्थित मुख्य कार्यालय में इस सम्बन्ध में शिकायत किया और उच्च स्तर की जाँच की मांग की.  इस मांग के आधार पर विभाग ने एक जाँच कमेटी बिठाई. लेकिन जांच कमेटी ने जांच प्रक्रिया के बाद शहाबुद्दीन को ही झूठा  साबित  कर दिया.

लेकिन सरकारी बाबुओं की इस कारस्तानी से शहाबुद्दीन ने हिम्मत नहीं हारी. उसने अपने शक को मिटाने  के लिए अपने स्तर पर हैदराबाद  के एक लेबोरटरी  में बच्चे का DNA टेस्ट कराया और DNA टेस्ट ने यह साबित कर दिया क़ि बच्चा उसका नहीं है.

अब शहाबुद्दीन के पास पुख्ता सबूत हाथ लग चुका था की अस्पताल में बच्चों का अदला बदली हुआ है. उस सबूत के बिना पर शहाबुद्दीन ने मंगलदई थाना में केस संख्या 990/2015  धारा 120(B)/420  के तहत एक मामला दर्ज कराया इसके पश्चात पुलिस जाँच शुरू हो गई पुलिस अपने स्तर पर जाँच शुरु की रक्त जाँच कराया गया और मामला अदालत में चलता गया इसके बाद 4 जनवरी 2017 को अदालत ने मामला साफ कर दिया क़ि बच्चो का अदला बदली हुवा है साथ ही DNA के आधार पर यह भी प्रमाणित हो गया क़ि  शहाबुद्दीन अहमद और सलमा अहमद का पुत्र राकेश  बोड़ो बन कर अनिल बोड़ो और सेवाली बोड़ो के घर में पल  बढ़ रहा है.  जबकि इसके विपरीत अनिल बोड़ो का पुत्र  जुनेद अहमद बनकर  सहाबुद्दीन के घर में है. और यह  सब जन्म के तुरंत  बाद जब बच्चा को उसके कक्ष में ले जाया गया तो स्वस्थ कर्मीयों की लापरवाही से हुवा.

अब दो वर्ष सात महीने अपने अपने घर में अपने धर्म – संस्कृति के अनुसार पालन पोषण कर रहे दोनों बच्चों को अब कोई अपने से दूर करना नहीं चाहता इसलिए दोनों के माता पिता ने अदालत से गुजारिश करते हुए दोनों बच्चों को अपने अपने घरों में जहां वह पल बढ़ रहे हैं पहले की तरह रहने की अनुमति मांगी है.

इंसानियत को देखते हुए अदालत ने इस सम्बन्ध में अगले  24 जनवरी को एक शपथ पत्र दाखिल करने का निर्देश दिया है.

इधर इस घटना ने मंगलदई स्वस्थ विभाग की लापरवाह कर्मियों को एक बार फिर कठघरे  में खड़ा कर दिया है साथ ही जाँच के नाम नीपा पोती करने वाले अधिकारीयों के चेहरा भी बेनकाब कर दिया है.

इधर दोनों पीड़ित परिवारों ने इस घटना को भगवान  का  आशीर्वाद बताते हुए कहा है क़ि ऊपर वाले की मर्जी  के आगे किसी का नहीं चलता है और बिना किसी भेदभाव से आगे भी बच्चो की परवरिश की बातें कही है. दोनों परिवार का ऐसा मानना है कि शायद भगवान ने किसी महान कार्य के लिए हिन्दू को मुस्लिम  के घर में और मुस्लमान  को हिन्दू के घर में भेजा है.  अंत दोनों परिवार ने स्वस्थ मंत्री डा. हिमंत बिश्व शर्मा से इस मामले को अपने स्तर पर जाँच कर दोषी स्वस्थ कर्मी -अधिकारी को उचित सजा देने की मांग की है.

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