एनआरसी के मसौदा सूची से 80 लाख लोगों का नाम हटना तय

गुवाहाटी

पंचायत सचिव द्वारा दिए गए प्रमाण पत्र और राशन कार्ड के प्रमाण के खारिज होने के बाद एनआरसी के मसौदा सूची से 80 लाख लोगों का नाम हटना तय हो गया है| गैर सरकारी संगठन एपीडब्ल्यू ने इसके लिए न्यायालय, केंद्र सरकार, राज्य सरकार और खासकर मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनोवाल को धन्यवाद दिया है|

बुधवार को एक प्रेस कांफ्रेंस का आयोजन कर एपीडब्ल्यू के प्रमुख अभिजीत शर्मा ने बताया कि उनके संगठन ने 23 फरवरी, 2012 को सुप्रीम कोर्ट में एक आवेदन दाखिल कर सिर्फ 10 दस्तावेज एनआरसी के लिए मान्य कराने की मांग की थी| उसमें स्पष्ट रूप से कहा गया था कि कौन-कौन से दस्तावेज स्वीकार्य होने पर अवैध नागरिक भी वैध बन सकते हैं|

शर्मा ने कहा कि हालांकि तत्कालीन सरकार के मंत्री पृथ्वी माझी ने आम्सू, आसू आदि संगठनों के साथ विमर्श के बाद 4 जुलाई, 2013 को सचिवालय में तत्कालीन सरकार के सात मंत्री, दो आईएएस अधिकारी और असम के एक जातीय संगठन के साथ मिलकर एक मसौदा बनाया था, जिसे गृह विभाग के तत्कालीन संयुक्त सचिव के जरिए 5 जुलाई, 2013 को केंद्र सरकार के पास भेजा गया था| उसमें स्पष्ट रूप से लिखा हुआ था कि एनआरसी के लिए 16 दस्तावेज मान्य होंगे| इस बारे में तत्कालीन सरकार और संगठनों के नेतृत्व पूरी तरह वाकिफ थे कि 16 दस्तावेजों में से 13 नंबर में पंचायत सचिव का प्रमाण पत्र और 15 नंबर में राशन कार्ड का उल्लेख था|

अब हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट ने इन दोनों दस्तावेजों को खारिज कर दिया है| अगर यह दोनों दस्तावेज खारिज नहीं किए जाते तो एपीडब्ल्यू के हिसाब से 5 लाख लोग एनआरसी के मसौदे से हट जाते पर अब कम से कम 80 लाख लोगों का सूची से बाहर होना तय हो गया है|

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