Adenomyosis के इलाज में नई उम्मीद, IHR गुवाहाटी में बिना चीरे सफल माइक्रोवेव एब्लेशन
आईएचआर गुवाहाटी में 41 वर्षीय महिला के व्यापक एडिनोमायोसिस का रियल-टाइम अल्ट्रासाउंड मार्गदर्शन में माइक्रोवेव एब्लेशन से उपचार किया गया। प्रक्रिया में न लैप्रोस्कोपी की जरूरत पड़ी और न पेट में चीरा लगाया गया।

गुवाहाटी- एडिनोमायोसिस Adenomyosis से जूझ रही महिलाओं के लिए गुवाहाटी guwahati से एक नई उपचार संभावना सामने आई है। इंस्टीट्यूट ऑफ ह्यूमन रिप्रोडक्शन (IHR), गुवाहाटी में 41 वर्षीय महिला के व्यापक एडिनोमायोसिस का उपचार बिना लैप्रोस्कोपी और बिना पेट में कोई सर्जिकल चीरा लगाए माइक्रोवेव एब्लेशन (MWA) के जरिए किया गया। प्रक्रिया रियल-टाइम अल्ट्रासाउंड मार्गदर्शन में डॉ. दीपक गोयनका ने की।
यह मामला इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि मरीज पिछले पांच वर्षों से बांझपन और अत्यधिक दर्दनाक माहवारी की समस्या से परेशान थीं। इससे पहले उनके लिए लैप्रोस्कोपिक सर्जरी का प्रयास किया गया था, लेकिन प्रक्रिया को बाद में ओपन सर्जरी में बदलना पड़ा था।
आईएचआर में की गई जांच में गर्भाशय की पिछली दीवार में लगभग 8×7 सेंटीमीटर का व्यापक एडिनोमायोसिस पाया गया। मरीज का गर्भाशय भी काफी बड़ा हो चुका था और उसका आयतन लगभग 504 घन सेंटीमीटर दर्ज किया गया। तुलना के लिए, सामान्य गर्भाशय का औसत आयतन लगभग 50 घन सेंटीमीटर माना जाता है।
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क्या है एडिनोमायोसिस?
एडिनोमायोसिस एक ऐसी स्थिति है जिसमें गर्भाशय की अंदरूनी परत के समान ऊतक गर्भाशय की मांसपेशियों की परत में प्रवेश कर बढ़ने लगता है। इसके कारण कई महिलाओं को अत्यधिक दर्दनाक माहवारी, ज्यादा रक्तस्राव और गर्भाशय के आकार में वृद्धि जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। कुछ मामलों में यह गर्भधारण में कठिनाई से भी जुड़ा हो सकता है।
ऐसे मरीजों के लिए उपचार चुनौतीपूर्ण हो सकता है, खासकर तब जब महिला भविष्य में गर्भधारण करना चाहती हो और गर्भाशय को सुरक्षित रखना प्राथमिकता हो।
बिना चीरे कैसे किया गया उपचार?
इस मामले में चिकित्सकों ने प्रभावित ऊतक को पारंपरिक बड़ी सर्जरी से हटाने के बजाय गर्भाशय को संरक्षित रखने वाली माइक्रोवेव एब्लेशन तकनीक का इस्तेमाल किया।
सामान्य एनेस्थीसिया के तहत पूरी प्रक्रिया लगभग 30 मिनट में पूरी हुई। रियल-टाइम अल्ट्रासाउंड की लगातार निगरानी के बीच एक पतले माइक्रोवेव उपकरण को गर्भाशय के प्रभावित हिस्से तक पहुंचाया गया। इसके बाद नियंत्रित माइक्रोवेव ऊर्जा के जरिए एडिनोमायोसिस से प्रभावित असामान्य ऊतक को नष्ट किया गया।
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इस प्रक्रिया में न तो लैप्रोस्कोपिक सर्जरी की आवश्यकता पड़ी और न ही पेट में कोई सर्जिकल चीरा लगाया गया।
बांझपन से भी जुड़ा हो सकता है एडिनोमायोसिस
एडिनोमायोसिस केवल दर्द और अधिक रक्तस्राव तक सीमित नहीं है। चिकित्सकीय रूप से यह कुछ महिलाओं में बांझपन से भी जुड़ा हो सकता है और प्रजनन उपचार, जिसमें IVF भी शामिल है, के परिणामों को प्रभावित कर सकता है।
ऐसे में उन महिलाओं के लिए उपचार का तरीका चुनना अधिक जटिल हो जाता है जो भविष्य में गर्भधारण करना चाहती हैं। गर्भाशय को सुरक्षित रखते हुए बीमारी के प्रभावित हिस्से का उपचार इस संदर्भ में महत्वपूर्ण हो सकता है।
चिकित्सकों के अनुसार, उचित रूप से चयनित मरीजों में माइक्रोवेव एब्लेशन जैसी गर्भाशय-संरक्षण वाली तकनीक को व्यक्तिगत प्रजनन उपचार योजना का हिस्सा बनाया जा सकता है। चिकित्सकीय रूप से उपयुक्त मामलों में IVF की तैयारी से पहले भी इस विकल्प पर विचार किया जा सकता है।
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हालांकि, एडिनोमायोसिस के हर मरीज के लिए यह तकनीक उपयुक्त हो, ऐसा नहीं माना जा सकता। उपचार का चुनाव बीमारी की स्थिति, लक्षणों, गर्भाशय की संरचना और मरीज की भविष्य की प्रजनन योजना जैसे कारकों पर निर्भर करता है।
आईएचआर गुवाहाटी में किया गया यह उपचार गंभीर एडिनोमायोसिस के कुछ मामलों में कम आक्रामक और गर्भाशय-संरक्षण वाली उपचार पद्धति की संभावनाओं को सामने लाता है। खासकर उन महिलाओं के लिए, जो भविष्य में गर्भधारण की योजना रखती हैं और जिनके लिए पारंपरिक सर्जरी चुनौतीपूर्ण हो सकती है, यह एक संभावित उपचार विकल्प के रूप में देखा जा सकता है।
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आईएचआर गुवाहाटी में 41 वर्षीय महिला के गंभीर एडिनोमायोसिस का बिना पेट में चीरा लगाए माइक्रोवेव एब्लेशन से सफल उपचार किया गया।








