Assam Flood: बाढ़ की स्थिति में सुधार, मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने प्रभावित क्षेत्रों का किया दौरा
ताज़ा जानकारी के अनुसार, पांच जिलों में 1.36 लाख से अधिक लोग अभी भी बाढ़ की चपेट में हैं, जबकि मृतकों की संख्या 82 से 85 के बीच बताई जा रही है।

गुवाहाटी: असम में बाढ़ Assam Flood की स्थिति सोमवार को धीरे-धीरे सामान्य होती दिखाई दी, हालांकि ब्रह्मपुत्र और उसकी सहायक नदियों के जलभराव के कारण राज्य के पूर्वी और मध्य हिस्सों के कई जिले अब भी प्रभावित हैं। ताज़ा जानकारी के अनुसार, पांच जिलों में 1.36 लाख से अधिक लोग अभी भी बाढ़ की चपेट में हैं, जबकि मृतकों की संख्या 82 से 85 के बीच बताई जा रही है।
जुलाई के अंतिम सप्ताह की तुलना में अधिकांश इलाकों से बाढ़ का पानी काफी हद तक उतर चुका है, लेकिन कई निचले क्षेत्रों में जलभराव, स्थानीय बाढ़ और नदी कटाव की समस्या बनी हुई है। शिवसागर, चराइदेव, गोलाघाट, जोरहाट, डिब्रूगढ़ और सोनितपुर सबसे अधिक प्रभावित जिलों में शामिल हैं। विभिन्न सरकारी बुलेटिनों के अनुसार अभी भी 160 से 349 गांव जलमग्न हैं।
ब्रह्मपुत्र, दिखो, धनसिरी सहित प्रमुख नदियों का जलस्तर लगातार घट रहा है, लेकिन प्रशासन अब भी स्थिति पर नजर बनाए हुए है। निचले इलाकों में जमा पानी के कारण संक्रामक बीमारियों और बुनियादी ढांचे को नुकसान का खतरा बना हुआ है।
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जन-धन की क्षति
बाढ़ और उससे जुड़ी घटनाओं में अब तक 82 से 85 लोगों की मौत हो चुकी है। हाल के दिनों में अधिकांश मौतें डूबने और अन्य दुर्घटनाओं के कारण हुई हैं। हालांकि पिछले 24 घंटों में किसी बड़ी नई जनहानि की सूचना नहीं मिली है।
लगभग 1.36 लाख से 1.92 लाख लोग अब भी बाढ़ से प्रभावित हैं। चराइदेव और शिवसागर सबसे अधिक प्रभावित जिलों में शामिल हैं। इससे पहले करीब 15 हजार हेक्टेयर से अधिक कृषि भूमि जलमग्न हुई थी, जबकि 1,500 से अधिक पशु बाढ़ में बह गए। हजारों घरों, सड़कों और सार्वजनिक ढांचे को भी नुकसान पहुंचा है तथा बड़ी संख्या में परिवार विस्थापित हुए हैं।
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मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा का दौरा
मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत बिस्व सरमा 2 से 5 अगस्त तक पूर्वी असम के बाढ़ प्रभावित जिलों के चार दिवसीय दौरे पर हैं। सोमवार को उन्होंने शिवसागर जिले के नेपाली खुटी गांव (असम-नागालैंड सीमा), संतक, बिहुबार, नाजिरा, सुमोनीगांव तथा सोनारी नगर के प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया।
मुख्यमंत्री ने बाढ़ प्रभावित परिवारों से मुलाकात की, राहत शिविरों का निरीक्षण किया और राहत एवं बचाव कार्यों की समीक्षा की। उन्होंने प्रभावित लोगों को पूर्ण पुनर्वास का भरोसा दिया तथा नुकसान का शीघ्र आकलन करने के निर्देश अधिकारियों को दिए।
राज्य सरकार ने राहत सहायता के तहत लगभग 75 हजार प्रभावित परिवारों के खातों में 15-15 हजार रुपये की अंतरिम सहायता भेजनी शुरू कर दी है। अब तक करीब 160 करोड़ रुपये सीधे लाभार्थियों के खातों में हस्तांतरित किए जा चुके हैं। इसके अलावा बिजली बिल में राहत सहित अन्य सहायता योजनाएं भी लागू की जा रही हैं।
सरकार ने मृतकों के परिजनों के लिए पहले घोषित अनुग्रह राशि को भी बढ़ाते हुए कुछ मामलों में 9 लाख रुपये तक की सहायता देने की घोषणा की है।
राहत एवं बचाव अभियान
राज्य में फिलहाल 44 राहत शिविरों में लगभग 15 हजार लोग रह रहे हैं, जबकि राहत वितरण केंद्रों के माध्यम से हजारों अन्य लोगों तक सहायता पहुंचाई जा रही है।
भारतीय सेना, भारतीय वायुसेना, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और स्थानीय प्रशासन संयुक्त रूप से राहत एवं बचाव कार्यों में जुटे हैं। कई स्थानों पर स्थानीय लोगों ने नावों के जरिए सैकड़ों लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया।
केंद्र सरकार ने राज्य को एसडीआरएफ के तहत 370 करोड़ रुपये से अधिक की सहायता स्वीकृत की है। सरकार द्वारा जान-माल, बुनियादी ढांचे और संपत्तियों के नुकसान का विस्तृत आकलन भी किया जा रहा है।
राहत कार्यों में रिलायंस फाउंडेशन, गौतम अडानी समूह (11 करोड़ रुपये और राहत सामग्री) सहित कई निजी संस्थानों और सामाजिक संगठनों ने भी महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
मुख्यमंत्री ने लोगों के धैर्य और सामुदायिक सहयोग की सराहना करते हुए अधिकारियों को बिजली, स्कूलों और अन्य आवश्यक सेवाओं को जल्द से जल्द बहाल करने के निर्देश दिए हैं। प्रशासन लगातार नदी के जलस्तर और जलभराव वाले क्षेत्रों में बीमारियों की आशंका पर नजर बनाए हुए है। मौसम विभाग के अनुसार निकट भविष्य में भारी बारिश की संभावना कम है, जिससे बाढ़ की स्थिति में और सुधार की उम्मीद है, हालांकि असम में हर वर्ष आने वाली बाढ़ एक दीर्घकालिक चुनौती बनी हुई है।








