NORTHEAST

Sikkim की Woman को IT exemption से बाहर रखा जाना ‘‘भेदभावपूर्ण’’: न्यायालय

न्यायमूर्ति एम. आर. शाह और न्यायमूर्ति बी. वी. नागरत्ना की पीठ ने कहा कि महिला किसी की जागीर नहीं है और उसकी खुद की एक पहचान है, सिक्किम की महिला को इस तरह की छूट से बाहर करने का कोई औचित्य नहीं है।

गंगटोक- उच्चतम न्यायालय ने सिक्किम Sikkim की एक महिला Sikkimese woman को महज इसलिए आयकर अधिनियम के तहत छूट से बाहर रखे IT exemption जाने को शुक्रवार को ‘‘भेदभावपूर्ण और असंवैधानिक’’ बताया क्योंकि उसने एक अप्रैल, 2008 के बाद एक गैर-सिक्किम व्यक्ति से शादी की थी।

न्यायमूर्ति एम. आर. शाह और न्यायमूर्ति बी. वी. नागरत्ना की पीठ ने कहा कि महिला किसी की जागीर नहीं है और उसकी खुद की एक पहचान है, सिक्किम की महिला को इस तरह की छूट से बाहर करने का कोई औचित्य नहीं है।

Also Read-  राज्य सरकार के अधीन अस्थायी कर्मचारियों को 365 दिनों का मातृत्व अवकाश मिलेगा- CM

पीठ ने कहा, ‘‘इसके अलावा, यह कदम स्पष्ट रूप से भारत के संविधान के अनुच्छेद 14, 15 और 21 से प्रभावित है। भेदभाव लैंगिक आधार पर है, जो भारत के संविधान के अनुच्छेद 14, 15 और 21 का पूर्ण उल्लंघन है।’’

पीठ ने कहा, ‘‘इस बात पर गौर किया जाना चाहिए कि सिक्किम के किसी व्यक्ति के लिए यह अपात्र होने का आधार नहीं हो सकता कि यदि वह एक अप्रैल, 2008 के बाद एक गैर-सिक्किम व्यक्ति से शादी करता है।’’

Also Read- पहली बार Sikkim मे सफल हुई Saffron की खेती

शीर्ष अदालत ने कहा कि 2008 के बाद एक गैर-सिक्किम व्यक्ति से शादी करने वाली सिक्किम की महिला को आयकर अधिनियम की धारा 10 (26एएए) के तहत छूट के लाभ से वंचित करना, ‘‘मनमाना, भेदभावपूर्ण और भारत के संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन है।’’

अनुच्छेद 14 कानून के समक्ष समानता से संबंधित है, जबकि अनुच्छेद 15 धर्म, जाति, जाति, लिंग या जन्म स्थान के आधार पर भेदभाव को रोकने के लिए है, और अनुच्छेद 21 के तहत जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार का प्रावधान है।

शीर्ष अदालत ने यह फैसला ‘एसोसिएशन ऑफ ओल्ड सेटलर्स ऑफ सिक्किम’ और अन्य द्वारा आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 10 (26एएए) को रद्द करने के अनुरोध संबंधी याचिका पर दिया।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button