असम में देश का पहला “विच हंटिंग बिल” लागू

Ajit Jaiswal/nesamachar.in

किसी महिला को डायन बताकर मारने और प्रताड़ित करने पर रोक लगाने के लिए एक अधिनियम लागू करने वाला असम पहला राज्य बन गया है। असम विधानसभा ने 13 अगस्त को असम विच हंटिंग बिल, 2015, (प्रोहिबिशन, प्रिवेंशन और प्रोटेक्शन) निर्विरोध पारित किया।

राज्य के सोनितपुर जिले के एक गांव में जादू-टोने के आरोप में एक वृद्ध महिला को मार दिए जाने के 3 सप्ताह बाद यह विधेयक पारित किया गया है। डायन प्रथा के खिलाफ वर्षों से अभियान चलाने वाले सामाजिक कार्यकर्ता एवं असम पुलिस के अतिरिक्त महानिदेशक कुलाधर सैकिया ने कहा, ‘केवल कानून बनाना ही काफी नहीं है। इसके लिए सामाजिक भागीदारी भी जरूरी है।’

वर्ष 2001 में कोकराझार में डायन की आरोप में एक ही रात 5 लोगों की हत्या कर दी गयी, इस घटना ने कुलधर सैकिया को झिझकोर दिया था और उन्हों ने परियोजना प्रहरी आरंभ की। सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ चलाई जाने वाली इस योजना ने मीडिया और समाज का ध्यान आकर्षित किया और फिर राज्य के पुलिस महानिरीक्षक द्वारा इसे राज्य स्तर की पुलिस योजना घोषित कर दिया गया! आज यह योजना असम के करीब 50 गांव में चलाया जा रहा है. और इसी योजना के कारण ही असम विच हंटिंग बिल, 2015, लागू हो गया!

दरअसल संपत्ति हड़पने, आधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं में कमी आदि कई समस्याओं के कारण गरीब, लाचार महिलाओं को डायन बता कर मार दिया जाता है। कई बार यह पूरे समाज के सामने किया जाता है। यह केवल in ग्रामीण इलाकों में शिक्षा की कमी के कारण ही होता है. परियोजना परिहारी के तेहत दूरदराज़ के गाँव में शिक्षा के अलावः लोगों को जादू टोने जैसे प्रथा से दूर रहने का भी शिक्षा दिया जाता है ताकि डायन प्रथा पर अंकुश लग सके. गांवों के नागरिकों को अप्रशिक्षित नीम-हकीमों की जगह आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ उठाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है, क्योंकि कई बार जादू-टोने की समस्या आधुनिक चिकित्सा का लाभ न लेने के कारण होती है।

सैकिया एक जाने-माने साहित्यकार भी हैं। उन्होंने कहा, ‘डायन बताकर मारने की कुरीति को दूर करने के लिए पुलिस के (न्यू असम) अधिनियम को दृढ़ता से लागू करने के साथ ही समाज के सभी वर्गों का मिला-जुला प्रयास भी बेहद जरूरी है।’

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