देखें- असम में कहाँ गूँज रहे हैं ” नो रोड नो वोट ” के नारे

गुवाहाटी

By Hasna Begam 

जिस समय असम की सड़को पर चुनाव का रंग देखने को मिल रहा है उसी समय असम के दिसपुर विधानसभा के 14 गांव के सड़को पर “नो रोड नो वोट” “नो बिजली नो वोट”  ” नो शिक्षा नो वोट” जैसे नारे सुनने को मिल रहे हैं।

मुख्य मंत्री कार्यालय से केवल 40 किमी दूर दिसपुर विधानसभा के अंतर्गत नरतप गांव पंचायत के 14 गांव के लोग आज भी मूलभूत सुविधाओं से कोसों दूर हैं।  कच्ची सड़कें, बांस का टूटा पुल इस इलाके की बदहाली की कहानी बयाँ करता है।  इलाके में स्कूल है, विद्यार्थी भी हैं, लेकिन एक ही शिक्षक पांच कक्षाओं में पढ़ाता है, पीने के साफ़ पानी की कोई सुविधा नहीं है। राजधानी के करीब स्थित मरकंग, मगुर्सिला, बंगदरगुग, जुरी, नरपत अदि 14 गांव के लोग आज भी सरकारी स्वस्थ व्यवस्था, बिजली, रोज़गार, आदि हज़ारों समस्याओं से जूझ रहे हैं ।

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नो रोड – नो वोट का नारा लगाते ग्रामीण                                                                        photos- Hasna Begam

पिछले 15 सालों से असम में जहां कांग्रेस राज कर रही है वही गुवाहाटी लोक सभा के अंतर्गत पड़ने वाले इन गांव के लोगो ने 10 साल से बीजेपी से सांसद को चुन कर ला रहे है लेकिन विकास के नाम पर इन गांव के लोगो को राज्य सरकार या केंद्र से किया मिला ये बयां इन गांव की तस्वीर कर रही है।

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गाँव को जाती हुई बदहाल कच्ची सड़क

दिसपुर के ये 14 गांव असम-मेघालय सीमा से सटे हुए हैं।  एक छोटी सी नदी इन दो राज्य की सीमा निर्धारित करती है। नदी के ऊपर टूटा हुवा पुल है जो असम-मेघालय को जोड़ता है। नदी के इस तरफ असम के बेहाल 14 गाँव और उस तरफ सभी सरकारी सुविधाओं से भरपूर मेघालय के गांव जहां 24 घटें बिजली और पानी मिलती है, जहां पक्की सड़के है, पक्के मकान हैं, सरकारी स्कूल, अस्पताल सभी सुविधाएं हैं। असम की  तरफ के इन गांव में हज़ारों बेहाल घर हैं जिन में करीबन 5500 वोटर हैं।

अपने महत्वपूर्ण वोट देने के बाद भी जब किसी भी पार्टी, सरकार और नेता से इन गांव के लोगो को कुछ नहीं मिला तो इन गांव के लोग ने इस बार असम में होने वाली विधानसभा चुनाव का बहिष्कार करने की धमकी दे रहे है, या फिर नोटा बटन का इस्तेमाल करने की सोच रहे हैं।

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नाले का गंदा पानी पीने को मजबूर गाँव वाले

इन गाँव के बदहाली के बारे में जब वहाँ के विधायक आकन बोरा से पूछा गया तो उन्हों ने अपने खिलाफ साज़िश बताते हुए यह कहा की इन गाँव की हालत इतनी खराब नहीं है जितना गाँव वाले कह रहे हैं। यह तो विरोधी दलों की साज़िश है जो उन्हें मेरे खिलाफ बोलने को कह रहे हैं।

इस बार चुनाव प्रचार के दौरान जहां कांग्रेस इन गांव के विकास के लिए यहाँ के लोगों से और 5 साल मांगने जाएगी तो वही 10 साल से सांसद रहने के बाबजूद बीजेपी एक बार विधानसभा के लिए एक मौका मांग रही है । अब देखने वाली बात यह होगी की सरकार और सरकारी व्यवस्था से नाराज ये लोग मतदान का बहिष्कार करते है, या नोटा बटन का इस्तेमाल करते हैं और अगर मतदान करते है तो किसे अपना प्रतिनिधि चुनते हैं|

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