NORTHEASTSPECIAL

पूर्वोत्तर के विकास में वर्तक प्रोजेक्ट का उल्लेखनीय योगदान- ब्रिगेडियर जे एस ईशर

तेजपुर 

सन् 1960 में तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने देश के उत्तरी और उत्तर-पूर्व  के सीमावर्ती क्षेत्रों में सड़कों को विकसित करने के उद्देश्य से सीमा सड़क संगठन की स्थापना की । कथित क्षेत्रों के राज्यों के साथ-साथ देश की सीमाओं तक सड़क मार्गों को विकसित करना अभिप्राय था, ताकि किसी भी युद्धकाल जैसी स्थिति में हमारी सेनाएं सीमाओं तक सहज रूप से पहुँच सकें।  आजादी के बाद उत्तर-पूर्व के राज्यों में सड़क मार्ग न की बराबरी थी । इस क्षेत्र के सर्वांगीण विकास हेतु सरकार ने सर्वप्रथम आवागमन के लिए सड़क मार्गों को विकसित करने का लक्ष्य बनाया क्योकि सड़के विकास का माध्यम होती हैं नार्थ-ईस्ट क्षेत्र के सात राज्यों ( वर्तमान सेवन सिस्टर्स स्टेट- असम, अरुणाचल प्रदेश, मेघालय, त्रिपुरा, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम ) में एक प्रोजेक्ट ’वर्तक’ (पूर्व नाम ’टस्कर’) और उत्तर क्षेत्र के लिए एक प्रोजेक्ट ’बीकन’ खड़ा किया। शुरू में सीमा सड़क संगठन के दो ही प्रोजेक्ट थे । बाद में कार्य की अधिकता और त्वरित गति से कार्य करने के मकसद से सरकार द्वारा समय-समय पर अन्य परियोजनाओं को खड़ा किया गया। वर्तमान में सीमा सड़क संगठन के 18 प्रोजेक्ट देश के नार्थ और नार्थ-ईस्ट सेक्टर में कार्यरत हैं ।

07 मई 1960 को प्रोजेक्ट वर्तक ’टस्कर’ नाम से तेजपुर में स्थापित किया गया। प्रोजेक्ट टस्कर को नेफा (नार्थ ईस्ट फ्रंटियर  एजेन्सी), के इलाकों में त्वरित गति से सड़के बनाने का दायित्व दिया गया। उस समय चीन के साथ अरुणाचल प्रदेश में  अन्तर्राष्ट्रीय सीमा पर तनाव के मद्देनजर, सड़कों को विकसित करने को प्राथमिकता दी गयी। सन् 1963 में इस प्रोजेक्ट के नाम को बदलकर ’वर्तक’ किया गया। इस परियोजना का गठन से लेकर आज तक प्रोजेक्ट वर्तक निरंतर निर्माण कार्य में लिप्त हैं तथा विकास का भागीदार है । वर्तमान में मुख्य अभियंता ब्रिगेडियर जे एस ईशर सितम्बर 2014 से इस महत्वपूर्ण परियोजना का कार्यभार संभाल रहें है।

यद्यपि वर्तक परियेाजना का कार्यक्षेत्र के परिसीमा वर्तमान में घटकर असम का कुछ इलाका  एवं अरुणाचल प्रदेश के पूर्वी भाग के दूर-दराज के सीमावर्ती दुर्गम इलाकों में सीमीत है। इस परियोजना के अन्तर्गत 03 टास्क फोसर्, 01 सेतु निर्माण कंपनी एवं 01 स्टोर डिवीजन कार्यरत है।

वर्तक परियोजना के कार्यक्षेत्र देश के सुरक्षा के दृष्टि से अत्यन्त महत्वपूर्ण है, इसके  मद्देनजर यहां अनुभवी अधिकारी को मुख्य अभियंता के तौर पर नियुक्त किया जाता है। मुख्य अभियंता ब्रिगेडियर ईशर परियोजना के सम्पूर्ण सेक्टर में सड़कों को विकसित और स्तरीय करने के लिए सराहनीय कार्य कर रहे हैं। मुख्य अभियंता की दूरदर्शिता एवं सटीक योजना प्रबंधन की वजह से परियोजना के कार्यक्षेत्र में महत्वपूर्ण कार्यों को निर्धारित समयावधि में पूर्ण किया जा रहा और आगामी समय के लिए  कार्य क्षेत्र हेतु महत्वपूर्ण योजनाएं बनायी जा रही हैं। उल्लेखनीय है कि प्रोजेक्ट वर्तक के वर्तमान मुख्य अभियंता ब्रिगेडियर  जे एस ईशर आर्मी की विभिन्न यूनिटों की कमांड संभाल चुके है एवं बी.आर.ओ. में इससे पहले दो बार (401 आर.एम.पी.एल. तथा 35 बी.आर.टी.एफ.) में अपनी सेवाएं दी है । कार्य के अधीक त्वरान्वित करने के उद्येश्य से अरूणाचल स्थित विभिन्न इकाईयों की सीमावर्ती में तैनात की जा रही है ।

वर्तक परियोजना के मुख्य अभियंता ब्रिगेडियर जे एस ईशर से NESamachar की खास बात चीत

NESamachar- नार्थ-ईस्ट के विकास में वर्तक का कब से और कैसा योगदान रहा है?

Brig JS Ishar-   सन् 1960 सें  सीमा सड़क संगठन पूरे नार्थ-ईस्ट क्षेत्र को सड़क मार्गो से जोड़ने एवं आवागमन की बेहतर सुविधाएं मुहैया कराने के मकसद से ’वर्तक’ (उस समय टस्कर) को स्थापित किया गया। इस प्रोजेक्ट ने सड़कों के निर्माण के साथ पुलों का निर्माण कर लोगों की बुनियादी आवश्यकताओं की पूर्ति की और विकास के द्वार उन्मुक्त किया । वर्तमान में वर्तक परियोजना अरुणाचल प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में फैली हुई हैं और  इन क्षेत्रों की सड़कों  को विकसित करके स्थानीय लोगों के जीवन स्तर को उठाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। आप को याद होगा असम राज्य की सड़क ’बैहाटा चाराली-तेजपुर-बंदरदेवा-नाॅर्थ लखीमपुर-पासीघाट-तेजू-सिलापत्थर’ तथा ’बंदरदेवा- ईटानगर-गोहपुर’ जो आजकल राष्ट्रीय राजमार्ग हैं, इन महत्वपूर्ण  सड़क मार्गों को भी वर्तक ने बनाया है।

NESamachar-वर्तमान में वर्तक प्रोजेक्ट का काम कहां-कहां चल रहा है ?

Brig JS Ishar-   प्रोजेक्ट वर्तक का अधिकांशः कार्यक्षेत्र अरुणाचल प्रदेश में स्थित है। हमारे तीन कृतिक बल  14, 42 एवं 763 अरुणाचल प्रदेश में तैनात हैं, इण्डो-चाइना बार्डर रोड्स,  विभिन्न स्थानीय रोड्स और एन.एच को एन.एच.डी.एल. के मानक के हिसाब से विकसित करने के लिए हमारे पदाधिकारी /जवान पूर्ण मनोयोग से लगे हुएं हैं। हाल ही में वर्तक एक बहुत ही महत्वपूर्ण  सड़क ओरांग-कलकातांग-शेरगांव-रूपा–टेंगा निर्माण किया   जो असम राज्य के ओरांग से प्रारम्भ होकर  अरुणाचल प्रदेश के टेंगा तक जाती है। यह रोड टेंगा से आगे तवांग तक विकसित होना है, जिस पर काम चल रहा है। दूसरे ओर से बालीपारा-चारदुआर-टेंगा मार्ग पर भी सड़क निर्माण कार्य चल रहा है।

NESamachar- परियोजना के सेक्टर में कई जगह रास्ता खराब है, इसके लिए आप क्या कर रहे हैं  ?

Brig JS Ishar-   यह बात हमारे संज्ञान में है कि हमारे प्रोजेक्ट के सेक्टर में कुछ कुछ रास्ता ठीक नहीं है। इसका कारण  वहां की भौगोलिक स्थिति एवं प्राकृतिक कठिनाइयां भी हैं। सड़क मार्गो के सुधार के लिए हमारी परियोजना द्वारा विभिन्न नए कार्य किए जा रहे हैं जिनमें  री-सर्फेशिंग का कार्य, मार्गों का चैड़ीकरण एवं उन्नयन किया जा रहा है। प्राथमिकता के आधार पर उपलब्ध फण्ड के हिसाब से सड़कों में आवश्यक सुधार एवं नव-निर्माण का कार्य प्रगति पर है।  यह मेरा सुदृढ़ विश्वास है कि हम कुछ साल के अन्दर अपेक्षाओं के अनुरूप सड़के बना सकेंगें ।

NESamachar- वर्तक परियोजना में नया कार्य क्या-क्या हो रहा है ?

Brig JS Ishar-   वर्तक परियोजना का सेक्टर काफी बड़ा है। प्रतिरक्षा एवं क्षेत्र विशेष की आवश्यकता तथा उपलब्ध संसाधन केा ध्यान में रखते हुए हम कार्य कर रहे हैं। वर्तमान में त्वांग को जाने वाली सड़के, शहरो के वाईपास जैसे के जंग बाईपास, बोमडीला बाईपास और त्वांग से सीमा की ओर जाने वाली आदि सड़कों पर काम चल रहा हैं। टेंगा से तवांग के मार्ग का चैड़ीकरण का काम प्रगति पर है। तवांग एक पर्यटन स्थल  है इसलिए इस मार्ग को दुरस्त रखना एवं वर्षभर आवागमन हेतु चालू रखना आवश्यक है। कुछ आवासीय भवन का निर्माण भी किया जा रहा है और यह कार्य निकट भविष्य में पूर्ण हो जाएगा ।

NESamachar- वर्तक द्वारा स्थानीय क्षेत्र की उन्नति एवं प्रगति के लिए क्या-क्या काम किया गया है  ?

Brig JS Ishar-   वर्तक परियोजना सन् 1960 से नाॅर्थ-ईस्ट क्षेत्र में सड़क निर्माण का काम कर रही है। जैसा कि सभी जानते हैं सड़कों का बुनियादी विकास का बाहक होता है । सड़कों के माध्यम से इन्फ्रास्ट्रक्चर का विकास हुआ है। स्थानीय लोग, समाज एवं देश की मुख्य धारा से जुडे़ हैं और अर्थनैतिक विकास के साथ साथ सामाजिक विकास भी संभव हुआ है । आवागमन सुलभ होने से बाजारों का विकास हुआ है, स्थानीय किसान अपनी फसल को बाजार तक लाने में सक्षम हुए हैं। शिक्षा के विकास में भी वर्तक का योगदान है। सड़कों के निर्माण से स्कूल तक आसानी से पहुंचना संभव हुआ है । तेजपुर में वर्तक माॅडल स्कूल एवं अरूणाचल प्रदेश के दोहुंग में वर्तक ब्रोवा द्वारा स्थानीय बच्चों के लिये स्कूल चलाया जा रहा है । लगभग तीन हजार स्थानीय मजदुरों का भी जीविकार्जन में सहायक होता है ।

NESamachar- अन्य देशों की तुलना में, बी.आर.ओ. तेजी से काम क्यों  नहीं कर पा रहा हैै ?

Brig JS Ishar-   प्रत्येक देश में निर्माण प्रक्रिया के लिए अलग-अलग नियम होते हैं। भारत एक लोकतांत्रिक देश है। किसी भी योजना को कार्यान्वित करते समय हमें नीतियों एवं नियमों के अनुसार चलना पड़ता है। सड़क निर्माण के लिए भूमि अधिग्रहण, फाॅरेस्ट क्लीयरेंस, स्थानीय मुद्दे आदि की औपचारिकताओं को पूर्ण करने में समय लगता है। इस वजह से कई बार कार्य नर्धारित समयावधि से ज्यादा समय लग जाता है। वर्तमान में शासन भी कार्यों को तेजी से करने के प्रति सजग है और कार्यो का त्वरान्वित करने में विभिन्न पदक्षेप ले रहे है । नये तकनिक सुविधाओं और मेसिन उपलब्ध करा रहें हैं ताकि हम योजााओं को त्वरित गति से पूर्ण करना संभव हो सकें ।

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