पाकिस्तान को आठ F-16 लड़ाकू विमान बेचेगा अमेरिका, भारत ने जताई आपत्ति

नई दिल्ली

पाकिस्तान को लड़ाकू विमानों की प्रस्तावित बिक्री रोकने की अमेरिकी सांसदों की मांग के बावजूद ओबामा प्रशासन ने पाकिस्तान को आठ एफ-16 लड़ाकू विमान बेचने के अपने फैसले के बारे में अमेरिकी कांग्रेस को अधिसूचित किया है। पाकिस्तान को आठ F-16 लड़ाकू विमान बेचने के अमेरिका के इस निर्णय पर भारत ने आपत्ती जताई है और इस तर्क से सहमत नहीं है कि इस प्रकार के हथियारों के हस्तांतरण से आतंकवाद से निपटने में मदद मिलेगी। पाकिस्तान को एफ-16 विमानों की बिक्री पर अपनी नाराजगी और आपत्ति जाहिर करने के लिए भारतीय विदेश मंत्रालय ने अमेरिकी राजदूत को तलब करने का निर्णय लिया है।

पेंटागन का ब्यान

पेंटागन की रक्षा एजेंसी ने अपने ब्यान में कहा है कि पाकिस्तान को यह लडाकू विमान इस उम्मीद के साथ दिया जा रहा है कि वह वर्तमान तथा भविष्य में आतंकवाद के साथ-साथ अपनी रक्षा चुनौतियों से भी मुकाबला कर सके। बयान में कहा गया है कि आठ F-16 लड़ाकू विमानों की अनुमानित कीमत 68.94 करोड डॉलर है। यह प्रस्तावित बिक्री दक्षिण एशिया में एक रणनीतिक सहयोगी की सुरक्षा में सुधार में मदद करके अमेरिकी विदेश नीति और राष्ट्रीय सुरक्षा के लक्ष्यों में अपना योगदान देती है। पेंटागन ने कहा है कि इससे क्षेत्र में सामान्य सैन्य संतुलन प्रभावित नहीं होगा। प्रस्तावित बिक्री मौजूदा और भविष्य के सुरक्षा से जुडे खतरों से निपटने में पाकिस्तान की क्षमता में सुधार लाना है।

F-16 fighter aircraft-2

करीब 70 करोड डॉलर की इस डील के तहत पाकिस्तान को लॉकहीड मार्टिन ग्रुप के बनाए इन प्लेन के अलावा राडार और बाकी उपकरण भी मिलेंगे। ये अतिरिक्त एफ-16 विमान हर मौसम में दिन-रात अभियान चलाने में मदद करेंगे, आत्मरक्षा क्षमता प्रदान करेंगे और उग्रवाद रोधी एवं आतंकवाद रोधी अभियान चलाने की क्षमता को बढाएंगे। पेंटागन की एजेंसी ने कहा, इससे पाकिस्तान वायुसेना के पास अभियान चलाने के लिए उपलब्ध विमानों की संख्या में वृदि्ध होगी, मासिक प्रशिक्षण की जरूरतें पूरी होंगी और चालकों को ब्लॉक-52 के चालन के प्रशिक्षण में मदद मिलेगी। पाकिस्तान को इन अतिरिक्त विमानों को अपनी वायुसेना में शामिल करने में कोई मुश्किल नहीं आएगी।

अमेरिकी राजदूत तलब किए गए

भारत ओबामा प्रशासन के इस फैसले चिंतित और नाराज है। उसने ओबामा प्रशासन के इस फैसले के बाद दिल्ली में मौजूद अमेरिकी राजदूत को तलब किया है। रक्षा सहयोग एजेंसी ने कहा, इस प्रस्तावित बिक्री का यह नोटिस कानून के तहत जरूरी है और इसका यह मतलब नहीं है कि बिक्री पूरी हो चुकी है। पहचान उजागर न करने की शर्त पर विदेश मंत्रालय के एक अधिकारी ने अमेरिकी सरकार के फैसले का बचाव किया है। इन एफ-16 लडाकू विमानों का इस्तेमाल भारत के खिलाफ किए जाने से जुडी भारत की आशंकाओं के बारे में पूछे जने पर अधिकारी ने कहा, मुझे स्पष्ट तौर पर बता देना चाहिए, किसी भी हथियार के हस्तांतरण स पहले हम क्षेत्रीय सुरक्षा और कुछ अन्य कारणों को ध्यान में रखते हैं। हमारा मानना है कि हमारी सुरक्षा मदद एक ज्यादा स्थायी और सुरक्षित क्षेत्र के लिए योगदान करती है। विदेश मंत्रालय के अधिकारी ने कहा, अमेरिका क्षेत्र में अपने सुरक्षा सहयोग को किसी के लाभ और किसी के नुकसान के आधार पर नहीं देखता। पाकिस्तान, भारत और अफगानिस्तान के साथ हमारे सुरक्षा संबंध अलग-अलग हैं, लेकिन हर संबंध अमेरिकी हित और क्षेत्रीय स्थिरता को आगे बढाता है।

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