उकियम का त्रिवेणी संगम में पर्यटन का कुम्भ

गुवाहाटी

By Hasna Begum

इलाहाबाद की गंगा, यमुना और सरस्वती के त्रिवेणी स्थल पर होने वाले कुम्भ मेले के बारे आप सभी जानते हैं। ये मेला हिन्दू धर्म के लोगो के लिए खास मान्यता रखता है। लेकिन आज हम धर्म की नहीं पर्यटन का कुम्भ के बारे में बताने जा रहे है। जी हा हम बात कर रहे है उकियम के ड्रोन, श्री और डिल्मा नदी के संगम स्थल की।

असम के ब्रह्मपुत्र नदी के दक्षिण में असम मेघालय सीमा पर स्थित है यह प्राकृतिक सुंदरता से भरपूर उकियम। गारो जनजाति वाले इस इलाके की सुन्दरता  का अनुमान वहाँ गए या उसे देखे बिना नहीं लगाया जा सकता है। आसमान से बातें करती ऊँची ऊँची पहाड़ीयां, हरे भरे लहराते पेड़, पहाड़ी के किनारे बहती नदियाँ और किनारों से टकरा टकरा कर अठखेलियाँ करते जल धाराएं, बस यह सुन्दरता देखते ही बनती हैI इतना सुन्दर होने के बाबजूद भी गुवाहाटी से महज 65 किलोमीटर की दूरी पर स्तिथ उकियम सरकार की पर्यटन विभाग के नज़रों से ओझल है। सरकार भले ही इसकी सुंदरता को नहीं देख पायी हो लेकिन यहाँ के गारो जनजाति के लोगो ने इसकी सुंदरता दुनिया को दिखाने के लिए उठाया एक खास कदम।

       ukiam-1    ukiam-2

मेघालय से बहकर आनेवाली ड्रोन और डिल्मा असम के श्री नदी से आकार इसी स्थान पर मिलता है इसी लिए इस स्थान को उकियम त्रिवेणी संगम के नाम से जाना जाता है। उकियम के गारो जनजाति के करीब 80 गांव के लोगों ने इस त्रिवेणी संगम को पर्यटन स्थल बनाने के लिए यहा आयोजन किया है पहला नदी महोत्सव। बिना किसी सरकारी और पर्यटन विभाग की मदद के यहाँ के गारो लोगो ने अपनी जमा पूंजी को खर्च करके इस नदी उत्सव का आयोजन किया टा की उकियम एक पर्यटन के कुम्भ के रूप में अपनी पहचान बना सके।

       ukiam-3    ukiam-4

इन तीनो नदी के संगम स्थली पर ये पहला नदी मोहोत्सव है। यहाँ नदी पे बोटिंग, फिशिंग और विभिन्न तरह के नदी के किनारे होने वाले कार्यक्रम के साथ साथ जनजाति लीगो के भोजन का भी आयोजन किया गया है। लोगो के रहने के लिए ऊँचे ऊँचे पेड़ो पे चंगी घर भी बनाया गया है ताकि लोग ऊंचाई से इन तीनो नदियों के सौन्द्रिय का आनंद उठा सके। असम और मेघालय को जोड़ता हुवा हैंगिंग ब्रिज भी लोगो के लिये खास आकर्षण का केन्द बना हुवा है। 10 तारीख को शुरू होने वाला यह महोत्सव तीन दिन तक चलेगा।

 जिस समय नोट बंदी के कारण पुरे देश में पैसे की तंगी दिख रहा है उस समय अपने जगह को पर्यटन स्थली बनाने के लिए इन गारो समुदाय के लोगो ने अपने जमा पूंजी को खर्च करके जो उदहारण दिया है वह वाकई तारीफ के काबिल है। अब जरुरत है सरकार और पर्यटन विभाग की जो अपने ज़िम्मेदारी को समझते हुवे उकियम को पर्यटन के कुम्भ स्थल के रूप में तब्दील करे।

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

%d bloggers like this: