दो बहने नंदनी और पूजा, मंदिर में पढ़ाती हैं गीता और कुरान

आगरा

ख़बरों की दुनिया में कभी कभी ऐसी ख़बरें भी आती हैं जिन्हें पढ़ कर मन को शांती और दिल को सुकून मिलता है. एक ऐसी ही खबर हम आप बतानी जा रहे हैं जिसे पढ़ कर यकीनन आप भे कुछ ऐसा ही महसूस करेंगे.

खबर आगरा से है जो दुनिया भर में मोहब्बत की नगरी के रूप से जाना जाता है. लेकिन शाहजहाँ और मुमताज़ महल की मोहब्ब्बत से कहीं ऊपर दो बहनों ने इंसानियत का ऐसा मिसाल पेश कर रही हैं जिसे हर व्यक्ती को सीख लेनी चाहिय. Nandini-and-puja--3

आगरा के मलिन बस्ती में रहने वाली दो बहनें नन्दनी और पूजा हैं जो मन्दिर में बुलाकर मुस्लिम और हिन्दू बच्चों को गीता और कुरान पढ़ाती हैं. एक बहन को उर्दू का ज्ञान है तो दूसरी को हिंदी का ज्ञान और दोनों बहने मिलकर हिन्दू मुस्लिम बच्चों को कुरआन और गीता के श्लोक सिखाती हैँ. बहनो का कहना है कि यह काम वो दोनों सम्प्रदायो में आपसी भाईचारा कायम रखने की नियत से करती हैं क्योंकि जब हम एक दुसरे के धर्मो को जानेंगे तो ही उसका सम्मान कर पाएंगे. हमारे पास आ रहे हिन्दू बच्चों को कलमे और मुस्लिमो को हनुमान चालीसा तक याद है.

मलिन बस्ती में हिन्दू मुस्लिम की मिश्रित आबादी है. नन्दनी और पूजा को अलग अलग हुनर सीखने का शौक था. नन्दनी ने हिंदी से पीजी किया है और पूजा ने अभी इंटर किया है. पूजा और नन्दनी ने पढ़ाई के साथ साथ सिलाई कढ़ाई ब्यूटीशियन आदि हुनर भी सीखे हैं. इन बहनों की माँ रानी कई काम कर लेती हैं और यही शिक्षा उन्होंने बच्चों को भी दी है.

दो वर्ष पहले मोहल्ले की संगीता बेगम ने दोस्ती में पूजा को उर्दू सीखने को कहा और पूजा ने उर्दू सीखना शुरू कर दिया. कुछ ही महीने में पूजा को उर्दू भी आ गयी और कुरान भी पढ़ने लगी. संगीता बेगम की माँ मुस्लिम और पिता हिन्दू थे और संगीता की शादी मुस्लिम परिवार में ही हुई थी.Nandini-and-puja--2

मोहल्ले में सभी गरीब हैं इस कारण मोहल्ले के लोग बच्चों को उच्च तालीम नही दे पाते थे. उर्दू और कुरआन समझने के बाद जब पूजा ने मोहल्ले के मुस्लिमो की हालत देखि तो उसे लगा की पढ़ाई को व्यर्थ नहीं जाना चाहिए उसने गरीब मुस्लिम बच्चो को पढ़ाने का निर्णय लिया और उस ने अपनी बहन नन्दनी और माँ रानी से बच्चों को पढ़ाने की इच्छा जताई. माँ और नन्दनी तुरन्त राजी हो गयी तो दो वर्ष पहले घर पर ही बच्चों को मुफ़्त पढ़ाने की मुहीम शुरू की गयी. कभी घर तो कभी गली में बच्चों की पढ़ाई होना शुरू हो गयी.

जब बच्चों की संख्या बढ़ने लगी तो जगह की दिक्कत होने लगी. मोहल्ले के बजरंग बली मन्दिर में काफी खाली जगह थी. मन्दिर पर दबंगो की नजर रहती थी और दिन भर लोग जुआ और शराब पीते रहते थे. ऐसे में मोहल्ले के लोगों ने एकमत होकर मोहल्ले के बजरँगबली मन्दिर में बच्चों को पढ़ाने की शुरुआत कराई.

पूजा का कहना है कि तालीम कोई भी गलत नही होती. जब हम उर्दू में कुरान और हिंदी में गीता पढ़ाते हैं तो माँ बहुत खुश होती है. आज लोग दुसरे के धर्मो पर गलत बाते कहते हैं और एक दुसरे से लड़ते हैं. अगर लोग दुसरे धर्मो को जानेंगे तो ही सम्मान कर पाएंगे.

छोटी बहन पूजा को देखकर बहन नंदनी के मन में भी शिक्षा का ज्ञान बाटने की भावना जाग्रत हुई. नंदिनी भी पढने आने वाले बच्चो को हिंदी के साथ साथ गीता के श्लोक और कबीर के दोहे पढ़ाती है. नंदनी का कहना है कि छात्र चाहे हिन्द हो या मुस्लिम उसे शिक्षा का ज्ञान मिलना जरुँरी है और पढ़ाई में जाती धरम नहीं होना चाहिये शिक्षक ही समाज का सुधारक होता है.

मोहल्ले वालो का कहना है की आज तक यहाँ कभी हिन्दू या मुस्लिम में कोई झगड़ा नही हुआ. मुस्लिम बच्चों को उर्दू पढ़ाने को टीचर हजार रुपये महीना मांगते हैं जो किसी के बस में नही है. आज तक यहां सिर्फ नेता वोट मांगने आये हैं विकास के नाम पर कभी यहाँ एक ईंट भी नही आई.

 

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