तिताबोर में कांग्रेस-बीजेपी में कांटे की टक्कर

गुवाहाटी

By- Rashmi Rekha Bhuyan

15 साल तक जिस विधानसभा क्षेत्र ने असम को मुख्यमंत्री दिया है, इस बार भी क्या मुख्यमंत्री उसी क्षेत्र से चुनकर आएंगे? जी हाँ हम बात कर रहे है जोरहाट जिले के तिताबोर विधानसभा क्षेत्र की। लेकिन जो सवाल हमने उठाया है वह 2016 के विधानसभा चुनाव का एक बड़ा सवाल है क्योंकि इस बार तिताबोर कांग्रेस और बीजेपी के बीच कांटे की टक्कर है।

tarun-gogoi-2एक तरफ जहाँ बीजेपी ने माजुली से सर्वानंद सोनोवाल को मुख्यमंत्री पद का दावेदार बनाया है वहीँ पिछले 15 साल की तरह इस बार भी कांग्रेस के सीएम पद के उम्मीदवार के तौर पर तरुण गोगोई तिताबोर से चुनाव लड़ने जा रहे है। इधर गोगोई के 15 साल के कुशासन के खिलाफ बीजेपी ने लोकसभा सांसद कामाख्या प्रसाद तासा को उनके मुकाबले में तिताबोर से चुनावी मैदान में उतारा है।

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तिताबोर हमेशा से कांग्रेस का गढ़ रहा है। इस बार कांग्रेस के गढ़ में घुसकर बीजेपी ने यहाँ के चाय बागान के वोटरों को लुभाना जारी रखा है। यहाँ तक कि चाय बागान की जनता को लुभाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी अपनी हर चुनावी रैली में चाय बागान के मजदूरों की समस्याओं का मुद्दा उठाते रहे है। चाय बागान के वोट पर ही बीजेपी की यहाँ खास नजर रहेगी। इसके अलावा 15 साल इस क्षेत्र से सत्ता पर रहने के बावजूद मुख्यमंत्री का गृह क्षेत्र क्यों पिछड़ा रहा, यह भी बीजेपी का खास चुनावी मुद्दा है।

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कहीं न कहीं अब यह नजर आने लगा है कि मुख्यमंत्री तरुण गोगोई को हार का डर सताने लगा है। शायद इसी वजह से मुख्यमंत्री गोगोई यह भी कह चुके है कि “चुनावी जंग कामाख्या तासा और गोगोई के बीच नहीं बल्कि पिता-पुत्र के बीच है। तासा मेरे बेटे सामान है। अगर मैं हार भी जाता हूँ तो यह एक पिता की हार होगी।” वहीँ दूसरी तरफ गोगोई यह कहने से भी नहीं चूंकते कि तिताबोर की जनता जानती है कि कौन सही उम्मीदवार है और उन्हें किसे वोट देना है।

आपको बता दें कि 2014 के आम चुनाव में जोरहाट लोकसभा क्षेत्र से कामाख्या प्रसाद तासा ने कांग्रेस के उम्मीदवार पूर्व केंद्रीय मंत्री विजय कृष्णा हैंडिक को हराया था। इस जीत ने भी बीजेपी के भरोसे को और मजबूत बनाया है।

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