The Head Hunter- नीलांजन दत्त की नई फ़िल्म

गुवाहाटी- 26 जातीय जनजाति और 100 से ज्यादा उप जनजातियों, काल्पनिक तथा रहस्य की घटनाओं से भरपूर, परंपरा और धार्मिक अनुष्ठानों से घिरा पूर्वोत्तर का एक राज्य है अरुणाचल प्रदेश। यहाँ की मनोरम प्राकृतिक सौंदर्य, हरे-भरे पेड़, पहाड़ और पहाड़ों से बहते झरने किसी का भी मन मोह सकती है। लेकिन देश की मुख्य धारा से कटे होने की वजह से यह जगह आज अपना अस्तित्व और संस्कृति खो रही है। अरुणाचल की इसी मनोरम प्राकृतिक सौंदर्य के बीच उसके अस्तित्व पर हो रहे अतिक्रमण की कहानी बनी फिल्म The Head Hunter को फिल्म निर्माता नीलांजन दत्त दर्शकों के लिए लेकर आए है।

IMG-20151204-WA0010फ़िल्म की कहानी एक बुजुर्ग व्यक्ति के इर्द-गिर्द घूमती है जो पूर्वोत्तर की वांचो जनजाति से है। यह जनजाति काफी खूंखार है और जंगली जानवरों का शिकार करती है। जंगली जानवरों से घिरे देश के इस सबसे भयानक जंगल का वह अकेले देखभाल करता है। सरकार उस जंगल के बीच से रास्ता बनाने की योजना बनाती है तो यह बुजुर्ग व्यक्ति इसका विरोध करता है। लेकिन सरकार का एक युवा अधिकारी जो उसी जनजाति से है, उसे समझाता है और बहाने से कुछ दिन उसे शहर में रहने के लिए राज़ी कर लेता है। कुछ दिन बाद जंगल वापस लौटने पर बुजुर्ग व्यक्ति को जंगल पूरी तरह बदला हुआ नज़र आता है। यह कहानी जंगल के खोए हुए अस्तित्व की झलक पेश करता है।

पुणे से फ़िल्म एंड टीवी इंस्टिट्यूट से स्नातक कर चुके फ़िल्म निर्माता नीलांजन दत्त पूर्वोत्तर राज्य को लेकर फ़िल्म बनाने में रूचि रखते है। इससे पहले वे लघु फ़िल्म और वित्तचित्र भी बना चुके है। 2009 में उन्हें अपने लघु वित्तचित्र के लिए राष्ट्रीय फ़िल्म पुरस्कार से भी नवाजा जा चुका है।

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