भूख से बेहाल चाय बागान के मजदूर, अब तक नहीं पहुंचा सरकारी ऐटीएम

गुवाहाटी

By  Hasna Begum 

नोट बंदी के कारण असम और बंगाल के चाय बगान के मजदूर भूक से बेहाल हो रहे हैं I  और उन की सहूलत के लिए सरकारी ऐटीएम भी अभी तक चाय बगानों में नहीं पहुंचा है I पैसों की तंगी ने लोगो की रोजाना की जिंदगी बड़ा हे जटिल कर दिया है। हालांकी  अभी नए नोटों के आने से शहरों में बैंक और एटीएम के बाहर लोगो की भीड़ में कमी आई हे लेकिन ग्रामीण इलाकों का हाल बेहाल है I

खासकर असम और बंगाल के चाय बागान के मजदूर का हाल बुरा है और वह भूकमरी के कागार पर पहुँच गए हैं I मजदूरों को उन की मजदूरी नहीं मिल रही, क्योंकी इस के लिए बागान के मालिक और मैनेजेर जिला अधिकारी के ऊपर निर्भर है।  मजदूरों को मजदूरी देने के लिए अपने ही पैसे बैंक से निकालने के लिए मैनेजर बागान के काम छोड़ जिला अधिकारी के कार्यालय के चक्कर काट रहा है, लेकिन कई बगान को अब तक पैसे नहीं मिल पाए हैं।

tea-garden-1दूर दराज के चाय बागान की हालात किया होगी इस बात का अंदाजा गुवाहाटी से महज 30 किलोमीटर दूर अमचांग चाय बागान के मजदूर की हालात से पता चलता है। इस बागान के मैनेजर मिश्रा जी बैंक से पैसे निकाल कर मजदूरों को मज्दोरी देने के लिए कई दिनों से जिला अधिकारी के कार्यालय के चक्कर लगा रहा है, लेकिन अब तक पैसे नहीं निकाल आए हैं।

उधर मजदुरी न मिलने से मजदूर की हालत हर आने वाले दिनों के साथ बदतर होते जा रही है जिसके चलते मजदूरो का गुस्सा सातवे आसमान पर है। चाय बगानों में कब किया हो जाएगा, कोइ नहीं कह सकताI इस बगान में करीब 500 मजदूर है, मजदूर पास के पहाड़ से लकड़ी लेकर और घर के साग-सब्जी बाजार में बेच कर अपना पेट पल रहा है। भूक से बोखलाए मजदूर मजदूरी न मिलने से  कल रात बागान में हंगामा भी किया। अब अमचांग चाय बागान के मजदूर जिला अधिकारी के कार्यालय में धरना देने की तैयारी कर रहे हैं।

मोदी के नोट बंदी के बाद साप्ताहिक मजदूरी से गुजारा करने वाले असम के चाय बगानों के 10 लाख से भी अधिक मजदूर को तकलीफ न हो इसके लिए केंद्र और राज्य सरकार ने ख़ास कदम उठाए है।

चाय मजदूरों के इस तकलीफ को ध्यान में रखते हुए मुख्य मंत्री सर्वानंद सोनोवाल द्वारा ने सभी जिला अधिकारियों को चाय बागान में एटीएम लगाने और चाय बागान के मजदूर को मजदूरी मुहैया करवाने के लिए ख़ास निर्देश दिया गया था लेकिन अमचांग चाय बागान की हालात देख कर लगता है कि निर्देश केवल निर्देश ही बन कर ही रह गए हैं।

पिछले विधान सभा चुनाव में चाय बागान के वोट भाजपा और मोदी के समर्थन में थे और अभीतक बागान के मजदूर मोदी की मुद्रानीति के साथ है लेकिन खाली पेट ये लोग कब तक मोदी जी के साथ खड़े रहते है ये आने वाला वक़्त ही बताएगा।

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