स्कूलों में संस्कृत को अनिवार्य बनाए जाने का विरोध

गुवाहाटी

8वीं कक्षा तक संस्कृत विषय को अनिवार्य किए जाने के विरोध में असम के आठ जनजाति साहित्य सभाओं के संयुक्त सभा ने जनांदोलन की चेतावनी दी है| ITSSA का कहना है कि संस्कृत को अनिवार्य विषय बनाने के बजाए सरकार को प्राथमिक स्तर पर राज्य के हर जनजाति भाषा को पढ़ाने का माध्यम बनाना चाहिए|

जनजाति साहित्य सभा सरकार पर एक स्वस्थ जनजाति भाषा नीति बनाने पर जोर दे रही है ताकि जनजातियों के बच्चों को स्कूल में उनकी मातृ भाषा में पढ़ाया जाए|

ITSSA का कहना है कि कि केंद्र तथा राज्य सरकार से उनकी कई बार बातचीत हो चुकी है| संस्कृत विषय को स्कूलों में अनिवार्य बनाए जाने से विद्यार्थी अपनी मातृ भाषा के ज्ञान से वंचित रह जाएंगे जो हमें स्वीकार नहीं है|

ITSSA में बोड़ो, राभा, कार्बी, मिसिंग, देउरी, तिवा, गारो और डिमासा साहित्य सभा भी शामिल है|

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