सउदी अरब-महिलाओं ने लिखा नया इतिहास

रियाद।

सउदी अरब के  निकाय चुनावों में पहली बार महिलाओं के मतदान देने,  और चुनाव में खड़े होने के बाद, अब  20 महिला उम्मीदवारों जीत हासिल कर एक नया इतिहास बनया है । चुनाव में विजयी रहने वाली महिलाएं सउदी अरब के सबसे बड़े शहर से लेकर इस्लाम के सबसे पवित्र स्थल के निकट स्थित एक छोटे से गांव तक, देश के विभिन्न हिस्सों की निवासी हैं। सऊदी अरब में स्थानीय निकाय चुनाव में कम से कम 17 महिला उम्मीदवारों ने जीत हासिल कर राजनीति में कदम रखा है। बेहद रुढ़िवादी देश में पहली बार महिलाओं को मतदान का अधिकार मिला है।

women voters in saudi arabiaसऊदी अरब के चुनाव आयोग के अध्यक्ष ओसामा अल-बार ने रविवार को सबसे पहले सलमा बिंत हिजब अल-ओतीबी की जीत का एलान किया। सलमा ने मक्का शहर की मदरका नगरपालिका परिषद की सीट से जीत दर्ज कराई। उन्होंने दो महिला और सात पुरुष प्रतिद्वंद्वियों को हराकर यह जीत हासिल की। इसके बाद उत्तरी इलाके अल जॉफ में हनूर्फ बिंत मुफरेह बिन अयाद अल-हाजिमी ने जीत का परचम लहराया। आयोग के मुताबिक, ताबुक में भी दो महिलाओं ने जीत दर्ज कराई। जबकि देश के पूर्वी इलाके में स्थित इह्शा प्रांत में सना अब्देल लतीफ हमाम और मासूमा अब्देल मोहसेन अल-रिदा ने चुनाव जीता। सऊदी समाचार चैनल अल-अखबरिया के मुताबिक, रियाद में तीन महिलाओं ने जीत दर्ज कराई।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, कम से कम दो क्षेत्रों में महिला मतों का लगभग 80 फीसदी मतपेटी तक पहुंचा। बाहा क्षेत्र में 82 फीसदी महिला मतदाताओं ने वोट डाले, जबकि पड़ोसी असिर क्षेत्र में यह आंकड़ा 79 फीसदी रहा। जबकि दोनों क्षेत्रों में पुरुष मतदाताओं के वोट डालने का आंकड़ा 50 फीसदी के आसपास रहा। सऊदी अरब में इस चुनाव में पहली बार महिलाओं को मताधिकार इस्तेमाल करने और जन प्रतिनिधि बनने का अधिकार मिला। नगरपालिका परिषद की 2106 सीटों पर लड़ रहे कुल 6,440 उम्मीदवारों में 900 से ज्यादा महिलाएं थीं। देश में पहले स्थानीय निकाय चुनाव 2005 में हुआ था। तब सिर्फ पुरुष ही इसके लिए खड़े हो सकते थे और वोट डाल सकते थे।

सऊदी अरब में सार्वजनिक सुविधाओं में लैंगिक विलगाव लागू है। इस कारण अपने चुनाव प्रचार के दौरान कोई महिला उम्मीदवार पुरुष मतदाताओं से संपर्क नहीं कर सकती। शनिवार को हुए मतदान में पुरुष और महिला मतदाताओं ने अलग अलग मतदान केंद्रों पर मतदान किया। अत्याधुनिक साधनों-सुविधाओं से लैस सऊदी अरब में महिलाओं पर अनेक पाबंदियां अब भी लागू हैं। यहां राजशाही है, जो महिलाओं को वाहन चलाने की इजाजत नहीं देती। उन्हें सार्वजनिक स्थलों पर खुद को सिर से पैर तक ढक कर रखना होता है। वे परिवार के पुरुषों की अनुमति के बिना यात्रा, काम या शादी नहीं कर सकतीं। यहां महिलाओं के पक्ष में बदलाव की रफ्तार बेहद धीमी है।

चार साल पहले जब देश में दूसरी बार कांउसिल चुनाव हुआ था, तभी सऊदी शासन ने एलान किया था कि 2015 के नगरपालिका चुनाव में महिलाएं भाग ले सकेंगी।

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