उतरखंड में राष्ट्रपति शासन लागू: राजनीतिक गतिरोध पर लगा विराम

देहरादून ​

राष्ट्रपति ने उत्तरखंड में राष्ट्रपति शासन लागू किए जाने को लेकर अपनी स्वीकृति देकर इस पर अंतिम मुहर लगा दी है। इसके बाद उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन लागू कर दिया गया, और राज्य में जारी राजनीतिक गतिरोध पर विराम लग गया है। केंद्र सरकार ने यह फैसला राज्यपाल केके पॉल की रिपोर्ट के बाद लिया है । इससे पहले सोमवार को मुख्यमंत्री हरीश रावत को विश्वास मत परीक्षण करना था।  इससे पहले ही प्रदेश में राष्ट्रपति शासन लगा दिया गया। राष्ट्रपति शासन लग जाने के बाद मुख्यमंत्री हरीश रावत अपना इस्तीफा राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी को सौंप सकते हैं। इसके बाद उत्तराखंड में समय से पूर्व चुनाव का रास्ता साफ हो गया है।

uttrakhand-1बतादें कि 9 बागी कांग्रेसी विधायकों को विधानसभा अध्यक्ष ने कारण बताओ नोटिस जारी किया था इसके बाद उन्हें निलंबित कर दिया गया। स्पीकर गोविंद सिंह कुंजवाल के कांग्रेस के उन नौ विधायकों को अयोग्य ठहराने के फैसले से 70 सदस्यीय विधानसभा में सदस्यों की प्रभावी संख्या 61 रह गई थी। इन नौ विधायकों ने रावत के खिलाफ बगावत की और बीजेपी से हाथ मिला लिया था। जिसके बाद यह माना जा रहा था कि राज्य में राजनीतिक हंगामा बढ़ सकता है। अब माना यह जा रहा है कि राज्यपाल सरकार बनाने के लिए विभिन्न दलों को निमंत्रित कर सकते हैं। फिलहाल विधानसभा को निलंबित किया गया है। उसे भंग नहीं किया गया है। जिसके बाद राष्ट्रपति शासन लगा दिया गया है।

इस राजनैतिक घटनाक्रम के बाद कांग्रेस नेता सलमान खुर्शीद ने उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन लागू किए जाने को कानूनी चुनौती दिए जाने की बात कही है। उन्होंने कहा कि बीजेपी को लोकतंत्र में यकीन नहीं है। यह बात फिर से खुलकर सामने आ गई है।

मुख्यमंत्री हरीश रावत के स्टिंग ऑपरेशन सामने आने के बाद बीजेपी के एक प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी से मिलकर उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन लगाने की मांग की थी। स्टिंग में हरीश रावत को सदन में विश्वासमत परीक्षण से पहले बागी विधायकों का समर्थन जुटाने के लिए उनसे सौदेबाजी करते हुए देखा गया।

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