अरुणाचल से चली राजनीतिक आंधी, उत्तराखंड के बाद पहुँची मणिपुर

गुवाहाटी

MANZAR ALAM-GUWAHATI-2BY – Manzar Alam

अरुणाचल से चली राजनीतिक आंधी ने पहले अरुणाचल फिर उत्तराखंड में कांग्रेस का किला ध्वस्त करने के बाद अब मणिपुर पहुँच गई है . इस राजनीतिक आंधी में अब मणिपुर में भी कांग्रेस की सत्ता की नाव हिचकोले खाने लगी है. राज्य में मुख्यमंत्री ओकराम ने कुछ मंत्रियों को पद से हटा दिया था. इस फैसले को कुछ बागी विधायकों ने चुनौती दे दी है. ऐसा माना जा रहा है बागी विधायक उस राजनीतिक आंधी के चपेट में आ चुके हैं जिस से मणिपुर का भी अरुणाचल और उत्तराखंड जैसा हश्र होने की संभावना बढ़ गई है.

इस राजनीतिक आंधी की रफ्तार को भांपते हुए अब कांग्रेस आलाकमान को मणिपुर में सत्ता जाने का डर सता रहा है. यही वजह है कि ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी के वरिष्ठ नेता मणिपुर के मुख्यमंत्री ओकराम इबोबी सिंह के साथ लगातार सम्पर्क में बनाये हुए है. कांग्रेस इसलिए भी सतर्क है क्योंकि दोनों राज्यों में बागी विधायकों को दल-बदल विरोधी कानून के तहत फंसाया नहीं जा सकता. अरुणाचल प्रदेश में बीजेपी ने विधानसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाकर बागियों की रक्षा की.

हरीश रावत- मुख्य मंत्री, उत्तराखंड
हरीश रावत- मुख्य मंत्री, उत्तराखंड

सूत्रों के मुताबिक, पिछले हफ्ते मणिपुर के 25 कांग्रेस विधायकों ने दिल्ली जाकर सोनिया से मुलाकात की थी. इसके बाद ही कांग्रेस आलाकमान ने इबोबी सिंह को दिल्ली तलब कर लिया था. जानकारों के अनुसार, असंतुष्ट विधायकों ने सोनिया गांधी के सामने स्पष्ट कर दिया था कि अगर उनकी मांगों पर विचार नहीं किया गया तो वे पार्टी छोड़कर या तो भाजपा में शामिल हो सकते हैं या नई पार्टी बना सकते हैं.

असंतुष्ट खेमे के विधायकों ने सोनिया के सामने दो मांगे रखी हैं. पहला भ्रष्टाचार में लिप्त मंत्रियों को हटाया जाए और एक व्यक्ति एक पद सिद्धांत के तहत गाइखांगम गांगमेई,  उप मुख्यमंत्री या फिर पीसीसी अध्यक्ष में से किसी एक पद पर ही रहें.

अरुणाचल प्रदेश में असंतुष्टों के कारण सरकार गंवाने वाली कांग्रेस इतना बड़ा जोखिम उठाने के लिए अब तैयार नहीं है.  लिहाजा पार्टी आलाकमान ने असंतुष्टों की मांग पर विचार करने और उन्हें पूरा करने के रास्ते ढून्ढ रही है.

MANIPUR-CM
ओकराम इबोबी सिंह- मुख्य मंत्री, मणिपुर

गांगमेई लंबे समय से दो पदों पर काबिज हैं. माना यह जा रहा है कि आलाकमान के आदेश अनुसार बहुत जल्द राज्य कैबिनेट में बड़ा फेरबदल भी हो सकता है, जिसमें कुछ असंतुष्ट नेताओं को मंत्री बनाया जा सकता है. राज्य में अगले साल फरवरी में विधान सभा चुनाव होना प्रस्तावित है.

यह राजनीतिक आंधी मणिपुर पहुँच कर थम जाएगी ऐसा भी नहीं है. आंधी अब धीरे धीरे चक्रवाती तूफ़ान का रूप लेने लगी है, जो कभी भी हिमाचल और कर्नाटक को भी अपनी चक्र में ला सकता  है. हिमाचल प्रदेश के सीएम वीरभद्र सिंह पर कानूनी और राजनीतिक तौर पर दबाव बनाकर उन्हें सत्ता से बेदखल किया जा सकता है तो दूसरी तरफ कर्नाटक में उपचुनावों में मिली हार के बाद सीएम सिद्धारमैया के खिलाफ विरोध की आवाजें उठने लगी हैं.

दो साल पहले यानी साल 2014 में केंद्र में एनडीए सरकार बनने के वक्त देश के 11 राज्यों में कांग्रेस की सत्ता थी. इनमें से हरियाणा और महाराष्ट्र में हुए चुनावों में कांग्रेस को हार का मुंह देखना पड़ा. वहीं उत्तराखंड और अरुणाचल प्रदेश में पार्टी के अंदर बढ़ते असंतोष की वजह से कांग्रेस को सत्ता गंवानी पड़ी. अब कांग्रेस 8 राज्यों में काबिज है. इनमें केरल, कर्नाटक, असम, हिमाचल प्रदेश, मणिपुर, मिजोरम, अरुणाचल और मेघालय शामिल हैं. वहीं बीजेपी देश के 8 राज्यों गुजरात, महाराष्ट्र (शिवसेना के साथ), गोवा, मध्यप्रदेश, राजस्थान, हरियाणा, छत्तीसगढ़ और झारखंड में सत्ता संभाले हुए है.

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