तेल क्षेत्रों का निजीकरण, प्रतिक्रियाएं जारी

गुवाहाटी

केंद्र सरकार द्वारा असम के 12 लघु तेल क्षेत्रों के निजीकरण की घोषणा पर प्रतिक्रियाओं का दौर जारी है| पूर्व मुख्यमंत्री तरुण गोगोई के अलावा बीजेपी गठबंधन पार्टी एजीपी भी केंद्र के इस फैसले का विरोध कर रही है|

पूर्व मुख्यमंत्री तरुण गोगोई का कहना है कि “कांग्रेस हमेशा से तेल क्षेत्रों के निजीकरण का विरोध करती आई है और करती रहेगी|” उन्होंने सवाल उठाया है कि “अगर लघु तेल क्षेत्र आर्थिक रूप से कमजोर है तो निजी क्षेत्र की कंपनियां इन्हें क्यों अपनाना चाहती है? इसका तो यही मतलब हुआ कि तेल क्षेत्रों से लाभ हो रहा है और अगर ऐसा है तो इनके निजीकरण का फैसला क्यों लिया गया है?”

उन्होंने कहा कि असम की जनता ने हमें विपक्ष की सीट के लिए चुना है ताकि हम सरकार को उनकी गलतियों पर रोक सके और इसी वजह से हम तेल क्षेत्रों के निजीकरण का विरोध करते जाएंगे| उन्होंने एजीपी को भी आड़े हाथ लेते हुए कहा कि तेल की ही बात कर जनता का वोट जितने वाली एजीपी अब बीजेपी के साथ गठबंधन के बाद जनता की भावनाओं से खेल रही है| उन्हें भी सरकार के फैसले का कड़ा विरोध करना चाहिए|

इधर केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान द्वारा तेल क्षेत्रों के निजीकरण का फैसला सुनाने के बाद, इस फैसले का बीजेपी गठबंधन पार्टी एजीपी ने भी विरोध जताया है और केंद्र से इस फैसले पर पुनर्विचार करने का अनुरोध किया है| एजीपी का कहना है कि वह ओएनजीसी और ऑयल इंडिया लिमिटेड को मजबूत बनाने के पक्ष में है ताकि ये सरकारी कंपनियाँ इन 12 तेल क्षेत्रों में संभावनाओं को सामने लाने के लिए बेहतरीन तकनीक का प्रयोग कर सके|

केंद्र सरकार को तेल क्षेत्रों के निजीकरण मामले में इस तरह विभिन्न संगठनों के साथ ही राजनीतिक हलकों से भी विरोध का सामना करना पड़ रहा है|

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