NIA की विशेष अदालत ने यूएनएलएफ के 18 सदस्यों पर किया आरोप तय

गुवाहाटी

गुवाहाटी स्थित एनआईए की विशेष अदालत ने आज गैरकानूनी गतिविधि (निवारण) कानून और भारतीय दंड विधि के तहत यूएनएलएफ के 18 सदस्यों पर आरोप तय करते हुए उन्हें कड़ी सजा सुनाई है। इन अपराधियों पर विभिन्न आरोप तय किए गए है जिनमें उग्रवादी गतिविधियों की साजिश रचने समेत भारत सरकार के खिलाफ जंग छेड़ने का आरोप शामिल है।

30 अप्रैल 2010 में गुप्त सूचना के आधार पर गुवाहाटी के एक किराए के मकान में तलाशी अभियान चलाकर प्रतिबंधित संगठन यूएनएलएफ के उपाध्यक्ष खुंडोंग तोम्बा उर्फ बिक्रमजीत और वाई. नबीचंद उर्फ अबो उर्फ दिलीप नामक सदस्य को गिरफ्तार किया गया था। उनके पास से एक लैपटॉप, 3 पेन ड्राइव , एक मोबाइल फोन, एक वायरलेस इंटरनेट कनेक्शन और 50 हजार रूपए जब्त किए गए थे। बाद में जांच के दौरान एनआईए और असम पुलिस ने प्रतिबंधित उग्रवादी संगठन के 20 और सदस्यों को गिरफ्तार किया था जो मणिपुर और असम में उग्रवादी गतिविधियों में शामिल थे। एजेंसी ने सबूत इकट्ठे किए कि यह संगठन सरकारी सेवकों से बड़े पैमाने पर धन वसूलता था, कैडरों को नियुक्त करता था और सरकार के खिलाफ जंग लड़ने के लिए हथियार खरीदता था।

एनआईए ने यूएनएलएफ के अध्यक्ष राजकुमार मेघेन उर्फ सनायमा को भी गिरफ्तार किया और उसके पास से लैपटॉप, मोबाइल फोन आदि जब्त किए। जांच के दौरान ही संगठन की राशि भी जब्त की गई। इस मामले में एजेंसी ने दो चार्जशीट दाखिल की जिसमें 25 लोगों पर उग्रवादी गतिविधियों की साजिश रचने और सरकार के खिलाफ जंग छेड़ने के आरोप दर्ज किए गए। इनमें से 18 लोगों के खिलाफ आपराधिक मामले चले जबकि 7 फरार है। अब एनआईए की विशेष अदालत ने इन 18 लोगों के खिलाफ आरोप तय करते हुए उन्हें 7 से 10 साल की कड़ी सजा सुनाई है।

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आरोपियों की सुची

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