एनजीटी ने असम सरकार से पूछा- काजीरंगा में बड़े बड़े होटलों के निर्माण की इजाज़त किस ने दी

गुवाहाटी- राष्ट्रीय हरित अधिकरण ने असम सरकार को पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील क्षेत्रों पर अपना रुख स्पष्ट करने को कहा है। साथ ही, यह भी कहा है कि इसने काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान के अंदर और इसके चारों ओर कैसे बड़े पैमाने पर होटल परियोजनाओं की इजाजत दी। यह उद्यान एक सींग वाले गैंडा का प्रसिद्ध आवास है।

एनजीटी अध्यक्ष स्वतंत्र कुमार की अध्यक्षता वाली एक पीठ ने असम सरकार के पर्यावरण एवं वन विभाग के सचिव और काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान के निदेशक को सुनवाई की अगली तारीख पर उसके समक्ष उपस्थित होने तथा उद्यान के चारों ओर पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील क्षेत्र के बारे में उठाए गए कदमों की जानकारी देने का निर्देश दिया।

एनजीटी ने किसी भी तरह के संदेह को खत्म करने के लिए असम सरकार से पारिस्थितिक संवदेनशील क्षेत्र की घोषणा, मुख्य रूप से कृषि कार्यों के लिए दिए गए पट्टे और आवासीय परिसरों के निर्माण तथा इसके परिणामस्वरूप उद्यान के अंदर और चारों ओर बड़े पैमाने पर होटल परियोजना के फलने-फूलने के बारे में अपने स्पष्ट रुख का ब्योरा सौंपने का निर्देश दिया है।

पीठ ने असम सरकार की पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील क्षेत्र पर रिपोर्ट पर नाराजगी जाहिर की है। इसने कहा कि यह उसके पहले के निर्देशों और आदेशों के अनुपालन में नहीं है। सुनवाई के दौरान असम सरकार के वकील ने दलील दी कि राज्य सरकार ने पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील क्षेत्र अधिसूचना जारी करने के लिए एक प्रस्ताव पहले ही दिया है जो पर्यावरण एवं वन मंत्रालय के समक्ष लंबित है। बहरहाल पीठ ने मामले की अगली सुनवाई 26 नवंबर तक के लिए मुल्तवी कर दी।

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