उत्तर कछार स्वायत्त परिषद- निरंजन होजाई के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव की तैयारी

गुवाहाटी

समय फिर करवट ले रहा है। एक बार फिर उत्तर कछार स्वायत्त परिषद में राजनीती गरमाने लगी है और निरंजन होजाई के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव की तैयारी हो रही है। इस बार निरंजन के खिलाफ बिगुल फूंकने वाला कोई और नहीं बल्कि एक समय में निरंजन होजाई के करीबी रहे ज्वेल गार्लोसा है।

Jewel Garlosa
Jewel Garlosa

डिमा हसाव की पहाड़ियां जहाँ विभिन्न जाति-जनजातियों का बसेरा है, वहाँ एक दशक पहले डिमा हालम डाउगा यानी डीएचडी जैसे उग्रवादी संगठन का आतंक था। ज्वेल गार्लोसा और निरंजन होजाई के नेतृत्व में ब्लैक विडो गुट ने दहशत फैला रखी थी। यह गुट इतना खतरनाक था कि भारतीय रेलवे को यहाँ से गुजरते वक्त पूरी ट्रेन में भारी हथियारों के साथ सुरक्षा बल तैनात करने पड़ते थे। लेकिन अब ये संगठन प्रतिबंधित है और कुछ साल पहले गार्लोसा और होजाई दोनों राजनीति में कदम रख चुके हैं।

अब आलम यह है कि 2016 के असम विधानसभा चुनाव में यह दोनों ही कांग्रेस और बीजेपी के लिए किंगमेकर साबित होंगे। पिछले साल अक्टूबर महीने में बीजेपी में शामिल हुए होजाई ने उत्तर कछार स्वायत्त शासी परिषद में ऐसा तख्तापलट किया कि बीजेपी परिषद की सत्ता में आ गई।

आपको बता दें कि 1000 करोड़ के मनी लॉन्डरिंग घोटाले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने निरंजन होजाई के खिलाफ चार्ज शीट दाखिल की थी जिसके बाद होजाई भूमिगत हो गए थे। उनपर परिषद को आवंटित सरकारी राशि को उग्रवादी संगठन को मुहैया कराने का आरोप था। होजाई के भूमिगत होने पर डीएचडी के ब्लैक विडो गुट का नेतृत्व गार्लोसा ने संभाल लिया। आज होजाई 30 सदस्यीय डिमा हसाव स्वायत्त परिषद के मुख्य प्रशासक है।

Niranjan Hojai
Niranjan Hojai

मंगलवार को राज्य की सत्ताधारी कांग्रेस ने बीजेपी को उसी के बुने हुए जाल में उस वक्त फंसा दिया जब परिषद के पूर्व मुख्य प्रशासक देबोजित थाओसेन के नेतृत्व में 17 सदस्यीय प्रतिनिधि दल ने असम के राज्यपाल पी बी आचार्य से मुलाकात की और निरंजन होजाई के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव रखने के उद्देश्य से परिषद का विशेष अधिवेशन बुलाने की मांग उठाई।

सूत्र के मुताबिक इस बार गार्लोसा परिषद में तख्तापल्टी के प्रयास में है जो मंगलवार को परिषद के कई सदस्यों के साथ बीजेपी से कांग्रेस में शामिल हो गए। गार्लोसा ने होजाई के खिलाफ राजनितिक जंग का ऐलान कर दिया है। यह दोनों पिछले साल अक्टूबर महीने में बीजेपी में शामिल हुए थे।

हालाँकि 2008 के एक हत्याकांड के सिलसिले में गार्लोसा को बीजेपी में शामिल होने के दो दिन बाद ही गिरफ्तार कर लिया गया था। बाद में वे जमानत पर रिहा हो गए। कांग्रेस और बीजेपी, दोनों पार्टियां उग्रवाद के खिलाफ असहिष्णुता की बात भले ही करती है पर वास्तविक छवि यह है कि 2016 के असम विधानसभा चुनाव की मुख्य कड़ी कुछ ऐसे नेताओं के हाथ में है जिनका ताल्लुक उग्रवादी संगठन से रह चुका है।

असम में बीजेपी एक समय कांग्रेस की गठबंधन पार्टी रह चुकी बीपीएफ के साथ गठबंधन बनाने को तैयार है। बीपीएफ प्रमुख हग्रामा मोहिलारी भी एक समय प्रतिबंधित उग्रवादी संगठन बोड़ो लिबरेशन टाइगर के नेता रह चुके है और बोडोलैंड में आतंक से उनका नाम जुड़ा था।

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