NSCN-K पर नागालैंड के अख़बार और असम राइफल आमने सामने

गुवाहाटी- असम राइफल के खिलाफ विरोध जताने के लिए नागालैंड के तीन अंग्रेजी अख़बारों ने सोमवार को राष्ट्रीय प्रेस दिवस के मौके पर अपने अपने अखबार में संपादकीय की जगह रिक्त छोड़ दिए. जिस से यह साफ़ ज़ाहिर होता है की नागालैंड में मीडिया और असम राईफल के बीच दूरियां बढ़ती जा रही हैं.

इन अखबारों का कहना है कि असम राइफल ने हाल ही में एक अधिसूचना जारी कर मीडिया पर जानबूझकर या अनजाने में प्रतिबंधित आतंकी संगठन नैशनल सोशलिस्ट काउंसिल ऑफ नागालैंड (खापलांग) (NSCN-K) का समर्थन करने का आरोप लगाया था।

नागालैंड में असम राइफल की ओर से 5 मीडिया संस्थानों को यह नोटिफिकेशन भेजा गया। उन में से 3 अखबारों- इस्टर्न मिरर, नागालैंड पेज और मोरुंग एक्सप्रेस, ने सोमवार को इसका विरोध करते हुए अपने संपादकीय की जगह रिक्त छोड़ दी, बाकी दो अखबार  नागालैंड पोस्ट और कापी हैं जिन्हें यह नोटिफिकेशन भेजा गया था।

 नागालैंड में यह अपनी तरह का पहला मामला है। नागालैंड पेज की संपादक मोनालिसा चांगकिजा ने कहा है कि, ‘हमने असम राइफल की ओर से हमें भेजे गए नोटिफिकेशन का विरोध करने के लिए इस तरह का फैसला लिया। असम राइफल हमारी आवाज और अभिव्यक्ति के अधिकार को दबाना चाहता है। आगे क्या होता है यह देखने के लिए हम इंतजार कर रहे हैं।

असम राइफल ने यह विवादित नोटिफिकेशन 25 अक्टूबर को भेजा था। नोटिफिकेशन में कहा गया था कि NSCN-K द्वारा जारी की गई प्रेस विज्ञप्तियों को अखबार समर्थन दे रहे हैं। नोटिफिकेशन में कहा गया कि NSCN-K एक प्रतिबंधित संगठन है और उसके द्वारा जारी किए गए बयानों को छापकर मीडिया संस्थान उसकी गैरकानूनी गतिविधियों में साझेदार बन रहे हैं।

असम राइफल के कर्नल राजेश गुप्ता ने यह नोटिफिकेशन जारी किया और कहा कि NSCN-K को 1967 ऐक्ट के अंतर्गत गृहमंत्रालय द्वारा 28 सितंबर 2015 को भेजे गए एक नोटिफिकेशन में गैरकानूनी संगठन घोषित किया गया है। कर्नल गुप्ता ने अखबार के संपादकों को इस नोटिफिकेशन के माध्यम से कहा, ‘हाल में छपे कुछ संस्करणों में, खासतौर पर 17, 18 और 21 अक्टूबर को छपी प्रतियों में NSCN-K द्वारा जारी विज्ञप्ति को छापा गया। इसमें राज्य सरकार के वरिष्ठ नीति निर्माताओं को धमकाया गया और NSCN-K के लोगों और प्रतिनिधियों द्वारा चंदा जमा किए जाने का समर्थन किया गया। इस तरह के लेखों को एक गैरकानूनी संगठन के लिए अखबार द्वारा समर्थन देने के तौर पर देखा जा सकता है।

असम राइफल के इस नोटिफिकेशन पर तीव्र प्रतिक्रिया करते हुए नागालैंड के अंग्रेजी व स्थानीय भाषा में छपने वाले अखबारों के संपादकों ने रविवार को एक साझा बयान निकालकर कहा कि वे निष्पक्ष पत्रकारिता बरकरार रखने, अलग-अलग तरह के विचारों व विभिन्न पक्षों को अपनी बात सामने रखने का सही मौका देने और विचार व अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को बरकरार रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

%d bloggers like this: