MOVIE REVIEW – कश्मीर के वादियों में मोहब्बत का “फितूर”

कश्मीर की वादियों में फिल्माई गयी एक्टर आदित्य राय कपूर, कैटरीना कैफ और तब्बू की अभिनित फिल्म ‘फितूर’ आज रिलीज हो गई है. फिल्म डायरेक्टर अभिषेक कपूर ने मशहूर लेखक चार्ल्स डेकन की नावेल ‘द ग्रेट एक्सपेक्टेशन्स’ से प्रेरित होकर फितूर फिल्म बनायी है. हालांकि इस नॉवेल के प्लाट को कई बार अंग्रेजी फिल्मों में प्रयोग किया गया है, लेकिन पहली बार इस पर आधारित हिंदी फिल्म बनायी गयी है. फिल्म को कश्मीर की पृष्ठभूमि में रचा गया है.

फितूर श्रीनगर में रहने वाले गरीब नूर (आदित्य रॉय कपूर) की कहानी है, जो बचपन से अमीर फिरदौस (कैटरीना कैफ) से प्यार करता है. फिरदौस की मां हजरत (तब्बू) कभी इसे हवा देती है और कभी बुझाने की कोशिश करती है. कश्मीर का सीधा-सादा लड़का कैटरीना के फितूर में डूब जाता है. फिर दोनों अलग हो जाते हैं और लड़का अपने लाइफ में बिजी हो जाता है लेकिन वह अपने फितूर को भूल नहीं पाता है. दोनों जवान होते हैं फिर मुलाकात होती है और फिर जिस तरह अक्सर हिन्दी फिल्मो में लव स्टोरी आगे बढ़ती है, कुछ वैसा हे इस में भी नूर और फिरदौस की लव स्टोरी आगे बढ़ती है.FITOOR-2

फिल्म की कहानी

आठ साल का नूर निजामी (आदित्य राय कपूर) अपनी बड़ी बहन रुखसार और बहनोई जुनेद के साथ कश्मीर में रहता है. जुनेद एक कारपेंटर का काम करते हैं और नूर उनका हाथ बटाता है.

एक दिन नूर अपने बहनोई के साथ बेगम हजरत (तब्बू) की हवेली में काम करने के लिए जाता है. वहां बेगम की बेटी फिरदौस  ( कैटरीना कैफ ) पर नूर की नज़र पड़ती है और छोटे से उम्र में ही नूर को फिरदौस प्यार हो जाता है. फिरदौस अपनी अम्मी से कह कर नूर को अपने अस्तबल की देखभाल का काम की ज़िम्मेदारी सोंप देती है. धीरे धीरे नूर और फिरदौस में दोस्ती हो जाती है.

कहानी की टर्निंग पॉइंट तब आती है जब एक ब्लास्ट में नूर की बड़ी बहन रुखसार की मौत हो जाती है. उधर इसी ब्लास्ट की वजह से बेगम हजरत अपनी बेटी फिरदौस को दिल्ली भेज देती है और नूर को कहती है कि फिरदौस को पाना है, तो कुछ बन के दिखाओ. नूर बचपन से ही एम्ब्रॉयडरी के डिजाइन और पेंटिंग्स बनाने में माहिर होता है और अब जब उसे अपनी  मोहब्बत पाने के लिए कुछ कर गुजरने की चुनौती मिलती है तो वह पीछे उस में और जोश आ जाता है. देखते ही देखते वह बेहतरीन आर्टिस्ट बन जाता है.FITOOR-3

23 साल की उम्र में नूर को दिल्ली जाकर अपना हुनर दिखाने का मौका मिलता है. बेगम उसे दिल्ली जाने में में मदद करती है. दिल्ली में नूर की मुलाकात बचपन के प्यार फिरदौस से होती है और प्यार में दोनों सारी हदें पार कर देते हैं. जिसकी वजह से नूर फिरदौस को और भी ज्यादा चाहने लगता है लेकिन फिरदौस नूर को कहती है कि उसकी सगाई बिलाल (राहुल भट्ट) के साथ होनेवाली है, जो पाकिस्तान का मिनिस्टर है.

इस बात से नूर का दिल टूट जाता है और वो बेगम के पास जाता है, बेगम भी उसे फिरदौस को भूलने की सलाह देती है.

लेकिन फिर कहानी में एक नया मोड़ आता है,  और फिर फिल्म असली यानी धोखा और साजिश की शुरूआत होती है. दरअसल बेगम भी इश्क की मारी होती हैं. मुफ्ती नाम का शख्स बेगम को और उनकी होनेवाली बच्ची को धोखा देता है. बेगम को नूर में मुफ्ती नजर आता है और वो उसे प्यार में तड़पाने की साजिश रचती है. लेकिन बावजूद इसके आखिर में प्यार की जीत होती है, …..

संगीत

फिल्म की सबसे अच्छी बात इसका संगीत है. अमित त्रिवेदी ने बेहतरीन गाने बनाए हैं, पश्मीना, फितूर, बतियाँ सभी कहानी के साथ रचते हैं. साथ ही हितेश सोनिक ने बैकग्राउंड स्कोर भी मौके की नजाकत से सही बनाया है.

कमियाँ

फिल्म की कमी इसकी उल्टी-पुल्टी स्क्रिप्ट है, किरदारों को पूरी तरह से कैश कर पाने में यह कहानी पूरी तरह सफल नहीं दिखाई पड़ती है, जब की  इसे और भी बेहतर बनाया जा सकता था, कश्मीर की वादियाँ बेइंतहाँ खूबसूरत ज़रूर हैं,  अच्छे लोकेशंस हैं , आब आप के पास तीन ऑप्शन हैं, आदित्य रॉय कपूर, कटरीना कैफ, तब्बू के अभिनय देखें, या खूबसूरत वादियाओं की सैर करें और खूबसूरत गाने सुने.

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