मोदी सरकार की सख्ती ने दिखाया रंग, स्विस बैंक में भारतीयों का धन हुआ कम

वेब डेस्क

आखिर कार मोदी सरकार की सख्ती ने रंग दिखाना शुरू कर दिया है जिस के चलते स्विट्जरलैंड के स्विस बैंक में के जमा भारतीयों के धन में कमी आने लगी है.  यानी अपना धन जमा रखने वाले भारतीयों ने इस बैंक में पैसे जमा करने में रुचि कम कर दी है. सूत्रों के अनुसार स्विस बैंकों में भारतीयों की जमा राशि करीब एक-तिहाई यानी 33 फीसदी घटकर 1.2 अरब फ्रैंक यानी (करीब 8,392 करोड़ रुपये) रह गई है.

स्विट्जरलैंड की सेंट्रल बैंकिंग अथॉरिटी- स्विस नेशनल बैंक (एसएनबी) के आज जारी आंकड़ों में कहा गया है कि 1997 के बाद से भारतीयों की रकम सबसे कम हो गई है. माना जा रहा है कि ऐसा कालेधन को लेकर स्विट्जरलैंड पर बढ़ते ग्लोबल दबाव की वजह से हो रहा है.

स्विट्जरलैंड के केंद्रीय बैंकिंग प्राधिकरण स्विस नेशनल बैंक (एनएनबी) के ताजा आंकड़ों के अनुसार 2015 के अंत तक स्विस बैंकों में भारतीयों का जमा धन 59.64 करोड़ स्विस फ्रैंक (सीएचएफ) घटकर 121.76 करोड़ फ्रैंक रह गया. स्विट्जरलैंड के बैंकों ने विदेशियों के जमा धन के बारे में आंकड़े 1997 में सार्वजनिक करना शुरू किए थे. उसके बाद से यह भारतीयों के जमा धन का सबसे निचला स्तर है. भारतीयों द्वारा स्‍वि‍स बैंकों में जमा फंड में 1997 के बाद की सबसे बड़ी गि‍रावट दर्ज की गई है.

यह लगातार दूसरा साल है जबकि स्विस बैंकों में भारतीयों की जमा राशि घटी है. वर्ष 2006 के अंत तक भारतीयों का स्विस बैंकों में जमा धन रिकार्ड उच्चस्तर 6.5 अरब स्विस फ्रैंक यानी 23,000 करोड़ रुपये पर था. हालांकि, उसके बाद से लगातार भारतीयों के जमा धन में कमी आ रही है. हालांकि, 2011 और 2013 में इसमें क्रमश: 12 फीसदी और 42 फीसदी का इजाफा हुआ था.

वर्ष 2015 के अंत तक स्विस बैंकों में भारतीयों का सीधे जमा किया गया धन 120.67 करोड़ फ्रैंक (सीएचएफ) रह गया. यह एक साल पहले 177.6 करोड़ फ्रैंक था. वहीं ट्रस्टियों या संपदा प्रबंधकों के जरिये जमा धन 2014 के अंत के 3.79 करोड़ फै्रंक से घटकर 1.08 करोड़ फ्रैंक रह गया. 2014 के अंत तक कुल जमा धन 181.4 करोड़ फै्रंक था. यह न्यासियों के जरिये जमा धन का सबसे निचला स्तर है. 2007 तक यह रकम अरबांे फ्रैंक में हुआ करती थी.

ज्यूरिख के एसएनबी के ताजा आंकड़े ऐसे समय आए हैं जबकि स्विट्जरलैंड ने भारत और अन्य देशों द्वारा उपलब्ध कराए गए सबूतों के आधार पर विदेशी ग्राहकों के ब्योरा साझा करना शुरू किया है. स्विट्जरलैंड ने भारत की कालेधन के खिलाफ लड़ाई में सहयोग को और विस्तार देने की सहमति दी है. 2018 से सूचनाओं के स्वत: आदान प्रदान के लिए वह भारत के साथ नए करार पर दस्तखत कर सकता है. यानी स्‍वि‍ट्जरलैंड के बैंकिंग सि‍स्‍टम की गोपनियता में कमी आना इस बैंक में भारतीयों की जमा रकम कम होने का बड़ा कारण माना जा रहा है.

इसके अलावा भारतीय अधिकारियों का एक दल जल्द स्विट्जरलैंड जा सकता है. यह दल वहां स्विस बैंकों में भारतीयों के कालेधन के बारे में लंबित आग्रहों को जल्द से जल्द पूरा करने को कहेगा. एसएनबी ने इस कोष को स्विस बैंकों की देनदारियां या ग्राहकों की बकाया राशि बताया है. स्विस अधिकारियों द्वारा जारी ये आधिकारिक आंकड़े हैं और इसमें भारतीयों के सुरक्षित पनाहगाह समझे जाने वाले देश में जमा कालेधन के बारे में कोई संकेत नहीं मिलता हैं.

एसएनबी के आंकड़ों के अनुसार स्विस बैंकों में दुनिया भर के विदेशी ग्राहकों का जमा धन करीब 4 फीसदी या 58 अरब फ्रैंक घटकर 1,410 अरब फ्रैंक रह गया है. स्विस बैंक में भारतीयों का धन एक तिहाई घटकर 1.2 अरब फ्रैंक या 8,392 करोड़ रुपये के रिकार्ड न्यूनतम स्तर पर पहुंच गया.

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