मारवाड़ी अस्पताल की सेवाएं सराहनीय- डॉ चाको कोरुला जैकब

गुवाहाटी

मैं घर पर बैठा था कि एक फोन आया. दूसरी ओर से एक महिला बोल रही थी ” 15 महीने के मेरे भाई के  किडनी में ब्लोकेज है, उस की स्थिति गंभीर है, डॉक्टर उसे बचा लो”. मैं ने अस्पताल मैनेजमेन्ट को फ़ोन किया और पूछा कि कितना खर्च आएगा. मैनेजमेंट ने बताया 45 हज़ार. मैं ने मैनेजमेंट से कहा लेकिन मरीज़ के परिवार जनो के पास केवल 8 हज़ार हैं. मैनेजमेंट का कहना था ” हर ऑपरेशन पैसे के लिए नहीं किए जाते हैं. हमारा पहला कर्तव्य है मरीज़ को बचाना”. ऑपरेशन हुआ और परिवार वालों ने 8 हज़ार रूपए ही दिए, क्योंकि उन के पास और पैसे थे ही नहीं. मैनेजमेंट ने भी उन से और पैसे नहीं मांगे. ……… इस बात का ज़िक्र कर रहे थे प्रसिद्ध डॉ  चाको कोरुला जैकब, एमडी, डीएम. पूर्व एचओडी नेफ्रोलोजी तथा पूर्व निदेशक सीएम्सीएच, वेलूर .

डॉ जैकब अपने गुवाहाटी दौरे के दौरान मारवाड़ी अस्पताल में आयोजित एक समारोह में भाग लेने आये थे. इस घटना का ज़िक्र करने का उन का उद्देश्य था की अस्पताल में अमीर गरीब हर तरह के मरीज़ आते हैं अस्पताल प्रशासन का प्रयास यह होना चाहिय की मरीजों की उमीदों पर खरा उतरे.

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डॉ जैकब ने कहा कि हर मरीज़ अपनी बीमारी का इलाज चाहता है लेकिन हर मरीज़ के पास पैसे नहीं होते. इस लिए अस्पताल प्रशासन को इन बातों का भी ध्यान रखना चाहिए.

डॉ जैकब समारोह में आम लोगों से बात चीत कर रहे थे और उन के सवालों का जवाब दे रहे थे साथ ही लोगों को अपने स्वास्थ्य के प्रती जागरुकत रहने के कुछ सुझाव भी दे रहे थे.

डाईबेटीज़ से सम्बन्धित सुझाव देते हुए उन्हों ने कहा कि यह बीमारी बहुत खतरनाक है. आज के जीवनशैली में बीमारी के प्रती खुद को जागरुकत रखना बहुत ज़रूरी है.  जैसे दिन भर में किसी व्यक्ति को शुगर की कितनी मात्रा लेनी  चाहिए और उस ने कितना लिया. डॉ जैकब ने कहा की हर उस परिवार में जहां डाईबेटीज़ का मरीज़ हो उसे ग्लूकोमीटर ज़रूर अखना चाहिए. डाईबेटीज़ के मरीजों को नियमित रूप से कसरत करना भी ज़रूरी है.

आँखों की तरह किडनी दान किया जा सकता है या नहीं, इस सवाल के जवाब में डॉ जैकब ने बताया की आँखें मौत के चार घंटों के बाद तक सही सलामत रहती हैं,  लेकिन किडनी नहीं. ख़ास कर किसी मरीज़ की मौत में तो ऐसा बिकुल नहीं होता. किडनी दान वही व्यक्ति कर सकता है जिस की प्राकृतिक मौत हुई हो.

इस से पहले डॉ जैकब का स्वागत अस्पताल के अध्यक्ष शरत कुमार जैन ने किया. डॉ जैकब के साथ शरत कुमार जैन के क़रीबी संबंध हैं यही कारण था की डॉ जैकब मारवाड़ी अस्पताल में आये और लोगों के साथ बात चीत की.

मारवाड़ी अस्पताल के बारे में  अपनी राय देते हुए डॉ जैकब ने कहा की अस्पताल में जगह की कमी है, अस्पताल के चारों ओर ट्रैफ़िक की बड़ी समस्या है लेकिन उस के बावजूद अस्पताल मरीजों को सेवाएं प्रदान कर रहा है यह सराहनीय है. अस्पताल का पांच सितारे होटलों की तरह का होना ज़रूरी नहीं है, ज़रूरी है मरीजों का ख्याल रखना और उन का सही समय पर सही इलाज करना जिस का उधारण है मारवाड़ी अस्पताल जिस की सेवाएं सराहनीय हैं .

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