थांगजाम मनोरमा हत्याकांड, सुप्रीम कोर्ट के फैसले का विरोध

मणिपुर

अफ्सपा कानून की शिकार हुई थांगजाम मनोरमा हत्याकांड में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का विरोध हो रहा है| कोर्ट ने केंद्र को पीड़ित परिवार को 10 लाख रुपए मुआवजा देने का निर्देश दिया है|

सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से अपुनबा लुप की कार्य समिति असंतुष्ट है| समिति के संयोजक फुनिंद्रो कोंसाम के मुताबिक केंद्र को मुआवजे का निर्देश देने के बजाए सुप्रीम कोर्ट को मनोरमा के हत्याकांड में शामिल 17 वें असम राइफल्स के अधिकारियों को सजा सुनानी चाहिए थी|

थांगजाम मनोरमा मेमोरियल ट्रस्ट और अपुनबा लुप कार्य समिति द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित थांगजाम मनोरमा की 12 वीं पुण्यतिथि पर उन्होंने यह बात कही| उन्होंने कहा कि हम तब संतुष्ट होंगे जब अदालत उन दोषी अधिकारियों को सजा सुनाएगी|

मणिपुर राज्य में लंबे समय से लागू सशस्त्र बल विशेषाधिकार कानून (अफ्सपा) का उल्लेख करते हुए सामाजिक कार्यकर्ता ने कहा कि इस कानून की वजह से कई जाने गई है जबकि कई महिलाओं को बलात्कार का शिकार होना पड़ा है|

अफ्सपा कानून के तहत ही थांगजाम मनोरमा नामक महिला की बलात्कार के बाद बेरहमी से हत्या कर दी गई थी| यह एक दिल को दहलाने वाली घटना थी|

घटना की याद ताजा करते हुए उन्होंने कहा कि यह मामला सन 2004 के जुलाई महीने का है जब एक रात 17 वें असम राइफल्स के कुछ अधिकारियों ने जबरदस्ती मनोरमा के घर में घुसकर उसे अगवा कर लिया था| उसके बाद अगली सुबह महिला का शव सड़क के किनारे पाया गया था|

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