मुश्किल में “मैगी”: सुप्रीम कोर्ट ने मैसूर लैब से स्पष्टीकरण मांगा

दिल्ली।

मैगी नूडल्‍स पर एक बार फिर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। अब सुप्रीम कोर्ट ने मैसूर स्थित सरकारी प्रयोगशाला से बुधवार को इस बारे में स्पष्टीकरण मांगा कि क्या मैगी नूडल्स में सीसा और ग्लूटामिक एसिड से संबंधित परीक्षण रिपोर्ट कानून के अंतर्गत अनुमत मानकों के दायरे में हैं। शीर्ष अदालत ने मैसूर प्रयोगशाला से मिले दो पत्रों का अध्ययन करने के बाद आदेश जारी किया। प्रयोगशाला ने मैगी के नमूनों में मोनोसोडियम ग्लूटामेट (एमएसजी) तत्व के बारे में परीक्षण किया था।

नेस्ले इंडिया की मैगी नूडल्स में मानकों से ज्यादा एमएसजी पाए जाने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को आदेश दिए हैं कि लैब में सैम्पल्स की जांच करके बताया जाए कि नूडल्स में एमएसजी की मात्रा कितनी है। नेस्ले इंडिया के खिलाफ एफएसएसएआई की याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने आठ हफ्तों में जांच रिपोर्ट सौंपने के आदेश दिए हैं।

नेस्ले इंडिया की मैगी नूडल्स पर मानकों से ज्यादा एमएसजी पाए जाने के बाद देश के कई राज्यों में रोक लगा दी गई थी। हालांकि हाईकोर्ट ने यह रोक हटा दी थी और फिलहाल बाजार में फिर से मैगी बिक्री शुरू हो चुकी है।

एफएसएसएआई ने 13 अगस्त के बॉम्बे हाईकोर्ट के उस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी, जिसमें अदालत ने देश में मैगी की बिक्री से रोक हटाने की इजाजत दी थी।

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