Lohit Bridge- स्थानीय लोगों का उम्मीदों का पुल

MANZAR ALAM- TAWANGतेजू – अरुणाचल प्रदेश

By Manzar Alam

Founder Editor arunachal24.in  and Former Bureau chief ( Northeast ) of  ZEE NEWS

हम बात करने जा रहे हैं एक ऐसे पुल के बारे में जिस का निर्माण अरुणाचल प्रदेश के लोहित नदी के आलू घाट पर हो रहा है जो स्थानीय लोगों के लिए ” उम्मीदों का पुल ” बना हुआ है. यह पुल उन मरीजों  के लिए ” उम्मीदों का पुल ” बना हुआ है जो इलाज के लिए डिब्रूगढ़ या पास के किसी बड़े शहर में जाना चाहते हैं. यह पुल उन गरीब किसानो के लिए ” उम्मीदों का पुल ” बन गया है जो अपने खेत में उपजाए सब्जियों को पास के किसी बड़े बाज़ार में बेच कर अच्छे पैसे कमाना चाहते हैं. यह पुल उन पर्यटकों के लिए ” उम्मीदों का पुल ”  बना हुआ है जो अरुणाचल प्रदेश के लोहित और उस से सटे जिलों की सुन्दरता को निहारने के लिए लम्बी यात्रा कर यहाँ आना चाहते हैं. यह पुल उन नवजवानों के लिए ” उम्मीदों का पुल ” बना हुआ है जिन का भविष्य किसी न किसी तरह से इस पुल से जुड़ा है. यह पुल उन लाखों लोगों के लिए ” उम्मीदों का पुल ” बना हुआ है जो अपने इलाके में विकास देखना चाहते हैं……… और किन किन लगों के लिए यह पुल ” उम्मीदों का पुल ” बना हुआ है इसकी एक लम्बी सुची है ………… आखिर यह पुल स्थानीय लोगों के लिए ” उम्मीदों का पुल ” क्यों बन गया है, इस के बारे में पूरी तफसील से आप को बताएंगे.

Lohit Bridge- स्थानीय लोगों का उम्मीदों का पुललोहित नदी के किनारे तेजू और उस के आस पास के इलाके में लाखों की आबादी है लेकिन विकास यहाँ कोसों दूर है. अगर कोई बीमार है और उसे इलाज के लिए शहर जाना है तो नदी पार करना पड़ता है. दिन में तो नौके चलते हैं लेकिन शाम ढलते ही नौके चलना बंद हो जाते हैं. अब अगर रात को किसी मरीज़ की हालत अधिक बिगड़ जाती है तो उसे सुबह होने तक इंतज़ार करना पड़ता है. यह तो आम दिनों की बात है, लेकिन बरसात के दिनों में तो नदी का पानी उफान पर होता है और नौकाएं चलना भी बंद हो जाते हैं. फिर नदी के इस पार बसे लाखों परिवार अपने ही इलाके में सिमट कर रह जाते हैं. जिन के पास पैसे हैं वोह लम्बी यात्रा कर किसी तरह शहर पहुंच जाते हैं लेकिन गरीब नदी में पानी कम और नौका चालू होने के इंतज़ार कई कई दिन तक करते रहेत हैं. कभी कभी इंतज़ार करते करते मरीज़ अपनी ज़िंदगी की अंतिम सांस लेने लगता है.

करीब के बड़े शहरों से जुड़ने के लिए और इलाके में विकास की शुरूआत के लिए कई दशकों से इलाके के लोग लोहित नदी पर एक पुल की मांग कर रहे थे. आखिर कार सरकार ने उन की परेशानियों को समझा और वर्ष 2010 में लोहित नदी पर आलूघाट में एक पुल का निर्माण कार्य शुरू हुआ.

पुल निर्माण का ठेका हैदराबाद की एक कम्पनी नवयुग को दिया गया. ठेका के अनुसार वर्ष 2015 के जनवरी महीने तक पुल बन कर तैयार होना था. पुल का निर्माण कार्य शुरू हुआ तो इलाके के लोगों में खुशी की एक लहर दौड़ गयी. लोगों ने सोचा कि अब कुछ वर्षों की बात है फिर उन के परेशानियों का समाधान हो जाएगा, उन के ” उम्मीदों का पुल ” बन जाएगा. मरीज़ इलाज के लिए फ़ौरन शहर जा सकेंगे. उन के छोटे छोटे गाँव बड़े शहर से जुड़ जाएंगे तो उन के इलाके में विकास भी शुरू हो जाएगा. बरसात के दिनों में अस्पताल न पहुँचने के कारण किसी मरीज़ की मौत नहीं होगी ……. और न जाने कितने ऐसी उम्मीदें थीं  इलाके के लोगों की जो पुल के निर्माण के साथ पूरी होती हुई नज़ आ रहे थीं.

लेकिन यह किया…..? वर्ष 2016 का अक्टूबर आ गया लेकिन उन के  ” उम्मीदों का पुल ” चालू नहीं हो सका. वोह हर रोज़ नदी के किनारे खड़े हो कर इस लम्बे पुल को उम्मीद भरी नज़रों से निहारते रहते हैं लेकिन  कोइ बताने वाला नहीं कि आखिर उन के ” उम्मीदों का पुल ” कब चालू होगा.

इलाके के लोगों बेचैन हो गए वह जानना चाहते हैं कि आखिर उन के ” उम्मीदों का पुल ” पर पानी कौन फिरा रहा है ….? उन की उम्मीद अब गुस्से में बदलने लगी है…… गुस्सा कब फूट पडेगा और किस शक्ल में फूटेगा इस के बारे में कुछ नहीं कहा जा सकता…. इलाके के लोगों की परेशानी को देखते हुए हम ने कई लोगों से बात की और जानना चाहा कि आखिर पुल के शुरू नहीं होने के कारण किया हैं.

सब से पहले हम स्थानीय विधायक महेश चाय से बात की. विधायक महेश का कहना था कि स्थानीय लोगों का दर्द उन से अधिक और कोई नहीं समझ सकता है क्योंकी वह खुद लोहित नदी के उसी किनारे में निवास करते हैं जहां लोग पुल के शुरू होने का इंतज़ार वर्षों से कर रहे हैं.

विधायक महेश कहते हैं कि हर बार कंपनी के अधिकारी एक नया तारीख तै करते हैं लेकिन उस तै किए तारीख पर पुल चालू नहीं कर पाते है.

महेश कहते हैं ” कम्पनी के अधिकारियों ने मुझ से वायदा किया था कि इस वर्ष जनवरी के महीन तक पुल चालू हो जाएगा, कंपनी द्वारा किए गए वायदे के अनुसार हम ने 15 अगस्त 2015 को यह घोषणा भी कर दिया था, लेकिन जनवरी आया और चला गया, पुल शुरू नहीं हो सका. फिर कंपनी वालों ने अप्रील महीने तक पुल चालू करने का वायदा किया लेकिन, अप्रील भी आया और चला गया. अब कंपनी के अधिकारी नवंबर के अंत तक पुल चालू करने की बात कर रहे हैं लेकिन पता नहीं नवंबर तब भी पुल चालू होगा या नहीं “.

वहीं लोहित जिला के जिला अधिकारी दानिश अशरफ का आरोप है कि पुल निर्माण कार्य कर रही कंपनी के अधिकारी पुल को ले कर संजीदा नज़र नहीं आते हैं. पुल के निर्माण का कार्य कछुए की चाल की तरह सुस्त है. कभी वह बाढ़ का रोना रोते हैं तो कभी कुछ और. कंपनी के अधिकारी निर्माण कार्य का जाएजा लेने के लिए भी नहीं जाते हैं. जब कि कंपनी द्वारा जिला प्रशासन से जब जब जो जो मदद माँगी गयी है उन्हें वह मदद दी गयी हैं. यहाँ तक की हम ने उन के लिए सुरक्षा का भी बन्दोबस्त करवाए हैं लेकिन इन सब के बावजूद कंपनी अब तक पुल के दोनों ओर एप्रोच रोड का काम भी पूरा नहीं कर पायी है”.

“जब कि Ministry of Road Transport and Highway  ( MORTH ) के अधिकारी बिस्वजीत देब इन आरोपों को गलत बताते हैं. बिस्वजीत का कहना है कि स्थानीय विधायक और जिला अधिकारी के दबाव में कंपनी के अधिकारी मजबूरन तारीखों की घोषणा कर देते हैं . बिस्वजीत के अनुसार पुल तो बन कर तयार हो गया है लेकिन एप्रोच रोड और कलवर्ट बन्ने में अभी समय लगेगा. उस के अलावाह पुल का तकनीकी निरक्षण भी होना है. इस लिए मार्च 2017 से पहले तो पुल चालू होने का प्रश्न  ही नहीं पैदा होता है”.

बिस्वाजित देब का यह भी आरोप है कि जिला प्रशासन द्वारा भूमी अदिग्रहण करने में भी काफी देर हुआ है जिस के कारण पुल का निर्माण कार्य पूरा होने में देर हो रहा है.

उधर पुल निर्माण कर रही कंपनी नवयुग के प्रोजेक्ट मैनेजर श्रीनिवास राव कुछ भी साफ़ साफ़ बताने से कतरा रहे हैं. पुल आखिर क्यों चालू नहीं हो रहा है यह कहने पर उन का जवाब है पुल तो मंत्रालय को चालू करना है हमे नहीं. श्रीनिवास का कहना है काम अपने अंतिम चरण पर है और जैसे ही काम पूरा हो जाएगा हम इसे मंत्रालय को सोंप देंगे. लेकिन काम कब तक पूरा होगा यह पूछने पर श्रीनिवास भे कहते हैं की मार्च 2017 से पहले तो पुल का निर्माण कार्य ख़त्म हो जाएगा ऐसा नहीं लगता” .

हद तो यह है के कंपनी के वेबसाईट पर भी पुल के स्टेटस का कोइ अपडेट नहीं है. यहाँ तक की वेबसाईट पर यह भी नहीं लिखा गया है की यह पुल का निर्माण कब शुरू हुआ और इस के बन्ने में कितना समय लगेगा. , कतना खर्च आएगा …..?

उधर स्थानीय लोगों का यह भी आरोप है कि भले ही आधिकारिक तौर पर पुल आम लोगों के लिए चालू नहीं किया गया है लेकिन रात के अँधेरे में मालवाहक  ट्रकों को पुल से गुजरने की इजाज़त दे दी जाती है.  लेकिन प्रोजेक्ट मैनेजर श्रीनिवास और टीम लीडर बिस्वाजित इस आरोप को गलत बता रहे हैं. उन का कहना है की इस पुल पर केवल कंपनी की वाहन चल रही हैं जिस की इजाज़त है.

बहर हाल इस ” उम्मीदों का पुल ” के चालू होने में हो रही देरी के कारण अब स्थानीय लोग काफी नाराज़ हैं और इन की यह नाराजगी कब किस रूप में सामने आ जाएगी कहा नहीं जा सकता.

लेकिन पुल निर्माण में लगे सरकारी और नवयुग कंपनी के अधिकारीयों से बात चीत करने के बाद तो ऐसा लगता है की अगर मार्च  2017 से पहले तो यह ” उम्मीदों का पुल ” चालू होता नज़र नहीं आ रहा है .

आप को बता दें कि 20 मई को पूर्व मुख्य मंत्री कालीखो पुल ने भी पुल के निर्माण कार्यों का जाएजा लिया था और कहा था कि सितम्बर महीने तक यदी पुल चालू नहीं होता है तो कंपनी के अधिकारीयों को ग्रिफ्तार किया जाएगा. लेकिन मुख्य मंत्री के इस घोषणा का भी कंपनी के अधिकारीयों पर कोइ असर नहीं हुआ है.

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