NORTHEAST

विद्यार्थियों के हित में आवश्यक स्पष्टीकरण दें – पूर्व राज्यसभा सांसद

कोकराझाड़

By Kanak Chandra Boro

सेबा के परिणामों को लेकर सरकार द्वारा प्रायोजित मौजूदा संकट को विद्यार्थियों के हित में आवश्यक स्पष्टीकरण देकर समाप्त करना चाहिए। यह कहना है पूर्व राज्यसभा सांसद उर्खाव ग्वरा ब्रह्म का| उन्होंने कहा कि बगैर किसी विलंब के सभी संबंधित प्रबंधन को इस पर स्पष्टीकरण देना चाहिए|

ब्रह्म ने कहा कि सिर्फ शिक्षा का मानक बढ़ा हुआ दिखाने के लिए सेबा के तहत विद्यार्थियों के पास होने की प्रतिशत 22 से बढ़ाकर 65 किए जाने का तथ्य जिस निर्दयी रूप से विधानसभा में पेश किया गया, वाकई एक चौंकाने वाली बात है।

इस तथ्य के खुलासे से वर्ष 2001 से 2016 की अवधि के दौरान पास हुए हजारों छात्रों की विश्वसनीयता और क्षमता का उपहास हुआ है| उन्होंने कहा कि सरकार को इस तथ्य की जानकारी होनी चाहिए कि इसी अवधि में पास हुए सैकड़ों छात्रों ने अपनी प्रतिभा और क्षमता के दम पर इंजीनियरिंग, प्रबंधन और तकनीकी तथा गैर तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्टता प्राप्त की है।

उन्होंने कहा कि उत्कृष्ट छात्रों की विश्वसनीयता पर सरकार द्वारा इस तरह सवाल नहीं उठाया जा सकता  क्योंकि यह उनकी प्रतिभा थी जिसके दम पर उन्होंने उत्कृष्ट संस्थानों में दाखिला लिया था| हालांकि हम इस बात से सहमत हैं कि मौजूदा सेबा का प्रदर्शन ठीक नहीं है और उसमें काफी सुधार की आवश्यकता है|

ब्रह्म ने कहा कि जिस शिक्षा मंत्री ने हाल ही में परीक्षा आयोजित करने के क्षेत्र में सेबा की सराहना की थी, उसी शिक्षा मंत्री ने कैसे कांग्रेस के कार्यकाल में मैट्रिक की परीक्षा में अधिकाँश विद्यार्थियों को ग्रेस मार्क्स से पास कराए जाने का तथ्य सामने रखा है| उन्होंने सवाल किया कि क्या इससे पहले उन्हें इस तथ्य की जानकारी नहीं थी|

उन्होंने कहा कि शिक्षा मंत्री के इस खुलासे से विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों पर मानसिक रूप से दवाब पड़ा है| हम चाहते हैं कि इन 15 सालों में राज्य के अब तक के सभी मुख्यमंत्री, शिक्षा मंत्री, सेबा के अध्यक्ष और संबंधित अधिकारी एक मंच पर बैठे और जनता को स्पष्टीकरण देकर इस बहस का अंत करे|

ब्रह्म ने कहा कि मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनोवाल को इस तरह की बहस पुनः न हो इसके लिए हस्तक्षेप करना चाहिए और सेबा की मौजूदा स्थिति को सुधारने के लिए सरकार की ओर से कदम उठाए जाने चाहिए न कि विद्यार्थियों की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए जाए|

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