कोहिमा में असम साहित्य सभा भवन, संरक्षण की अपील

कोहिमा

असम साहित्य सभा ने कोहिमा स्थित ऐतिहासिक असम साहित्य सभा भवन के संरक्षण की असम सरकार से अपील की है। साहित्य सभा का कहना है कि 121 साल पुराने इस ऐतिहासिक भवन के संरक्षण से नगा और असमिया लोगों के बीच एकजुटता को और बढ़ावा मिलेगा।

असम साहित्य सभा के अध्यक्ष डॉ. ध्रुवज्योति बोरा के नेतृत्व में एक प्रतिनिधि दल ने हाल ही में नागालैंड दौरा किया और असम सरकार द्वारा इस धरोहर के मरम्मत और संरक्षण के संदर्भ में स्थानीय लोगों से बातचीत की।

काफी कम लोगों को पता होगा कि असम साहित्य सभा के गठन से दो दशक पहले अग्रणी राष्ट्रीयतावादी पद्मनाथ गोहाईं बरुआ के पहल पर 1895 में नगालैंड में सर्वोच्च साहित्यिक और सामाजिक-सांस्कृतिक संघ का गठन हुआ था। हैरानी की बात यह रही कि 1917 में शिवसागर अधिवेशन के दौरान गोहाईं बरुआ ही असम साहित्य सभा के पहले अध्यक्ष चुने गए।

नगालैंड के राजधानी शहर कोहिमा में बना यह असम साहित्य सभा भवन लाल घर के नाम से भी जाना जाता है। साहित्य सभा का कहना है कि कोहिमा स्थित इस भवन का संरक्षण पद्मनाथ गोहाईं बरुआ के लिए श्रद्धांजलि होगी। साहित्य सभा ने लाल घर को असम भवन और सांस्कृतिक केंद्र के रूप में विकसित करने की असम सरकार से अपील की है।

साहित्य सभा के प्रतिनिधि दल ने मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनोवाल से भी इस ऐतिहासिक भवन के संरक्षण के लिए त्वरित कदम उठाने की मांग की है।

 

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