काजीरंगा नेशनल पार्क और नदी द्वीप माजुली भू कटाव की चपेट में

गोलाघाट

असम का गौरव काजीरंगा नेशनल पार्क और नदी द्वीप माजुली भू कटाव की चपेट में हैं । एक सींग वाले गैंडों का विचरण स्थल काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान सालों से ब्रह्मपुत्र के भू कटाव की मार झेल रहा है। 430 स्क्वायर किलोमीटर तक फैले पार्क में भू कटाव की स्थिति का सर्वेक्षण करने के लिए केंद्र ने ब्रह्मपुत्र बोर्ड के अध्यक्ष निखिलेश झा को नियुक्त किया है। सर्वेक्षण पूरा होने के बाद झा केंद्र को इसकी रिपोर्ट सौंपेंगे। इस बीच काजीरंगा का दौरा कर झा वहां भू कटाव की स्थिति का जायजा ले चुके है।

उद्यान प्रबंधन के पास मौजूद रिपोर्ट के मुताबिक सन 1912 से लेकर आज तक उद्यान की 160 स्क्वायर किलोमीटर जमीन ब्रह्मपुत्र में समा चुकी है। उद्यान के निदेशक एम. अली का कहना है कि उन्होंने उद्यान की सुरक्षा के लिए राज्य सरकार से उचित व्यवस्था करने की अपील की है। इसी आधार पर सरकार ने संबंधित अधिकारियों से काजीरंगा में भू कटाव की रोकथाम के लिए परियोजना तैयार करने को कहा है।

काजीरंगा नेशनल पार्क और नदी द्वीप माजुली भू कटाव की चपेट में
नदी द्वीप माजुली

इधर जोरहाट के माजुली में भी भू कटाव लगातार जारी है। भू कटाव की रोकथाम के लिए बनाए गए चारों तटबंधों से कोई खास फायदा नहीं हुआ है। माजुली के ऊपरी इलाके कमलाबाड़ी से भकत सापोरी तक भू कटाव से अधिक नुकसान पहुंचा है। जलसंसाधन विभाग के अधिकारियों ने नदी द्वीप पहुंचकर हालात का जायजा लिया।

अखिल असम छात्र संगठन (आसू) ने राज्य सरकार से शीघ्र भू कटाव के रोकथाम की व्यवस्था करने की मांग की है।  आसू ने साथ ही केंद्र से अपील की है कि केंद्र ब्रह्मपुत्र बोर्ड द्वारा तैयार परियोजनाओं को नदी द्वीप में लागू करे। पिछले कुछ दिनों में भू कटाव ने माजुली में भयानक रूप धारण किया है।

 

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