जेएनयू मामले में बोले गोगोई, मोदी सरकार आरएसएस के आदर्शों को थोपना चाहती है

गुवाहाटी

जेएनयू मामला थमने का नाम ही नहीं ले रहा है, यह अब एक राजनीती मुद्दा तो बन ही गया है, इस के साथ ही साथ अब यह देश की राजधानी से निकल कर राज्यों तक पहुँच गया है। राज्यों के नेता भी इस मामले पर ब्यान बाज़ी करने करने का अवसर जाने नहीं देना चाहते हैं, इसी कड़ी में आज असम के मुख्य मंत्री तरुण गोगोई ने पीएम् मोदी को इस पूरे मामले का रणनीतिक कार करार दे दिया। जेएनयू मामले में गोगोई ने आरोप लगाया कि इस पूरे मामले को तूल देने में पीएम मोदी का सर्थन हासिल था क्योंकि उन की सरकार आरएसएस के आदर्शों को थोंपना चाहती है।

“जवाहरलाल विश्वविद्यालय में छात्रों पर पुलिस की बर्बरता के पीछे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का रणनीतिक समर्थन था।” यह कहना है मुख्यमंत्री तरुण गोगोई का। गुरुवार को एक प्रेस कांफ्रेंस को संबोधित करते हुए गोगोई ने कहा कि बीजेपी नीत केंद्र की सरकार देश के सभी शिक्षण संस्थानों में आरएसएस के आदर्शों को थोंपना चाहती है।

उन्होंने कहा ” जेएनयू के छात्रों पर पुलिस के हमले के पीछे जरूर प्रधानमंत्री का रणनीतिक समर्थन था। दिल्ली के पुलिस कमिश्नर ने भी इस मामले में चुप्पी साध रखी है। इसके पीछे भी किसी ताकत का हाथ है।”

मुख्यमंत्री गोगोई ने सवाल उठाया कि यदि जेएनयू छात्र संघ के अध्यक्ष कन्हैया कुमार को विद्रोह के आरोप में गिरफ्तार किया गया है तो फिर पुलिस कमिश्नर यह क्यों कह रहे है कि अगर कन्हैया ने जमानत की अर्जी कोर्ट में दाखिल की तो पुलिस इसका विरोध नहीं करेगी।

मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि बीजेपी देश के शिक्षण संस्थानों में जबरदस्ती आरएसएस के आदर्शों को थोंपना चाहती है और स्मृति ईरानी सिर्फ आरएसएस की सुनती है। प्रधानमंत्री या बीजेपी के खिलाफ किसी भी बात को बर्दाश्त नहीं किया जाता इसीलिए गणतांत्रिक अधिकार छीने जाते है।

गोगोई ने कहा ” जेएनयू न केवल देश में बल्कि पूरी दुनिया में सबसे श्रेष्ठ विश्वविद्यालय है। यहां बुद्धिजीवियों और छात्रों के बीच मतभेद हो सकता है। कन्हैया कुमार के भाषण में देशद्रोह कहीं नहीं था। अगर छात्रों ने कानून तोड़ा है तो उन्हें गिरफ्तार करे। लेकिन सरकार खुद कानून को हाथ में नहीं ले सकती।”

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