जापानी हरी चाय अब असम के बागान में

तिनसुकिया

अब जापान की हरी चाय पत्ति का जायका असम में ही लिया जा सकेगा| तिनसुकिया जिले के एक चाय बागान में पहली बार जापानी पद्धति का चाय उद्योग शुरू किया गया है|छोटा तिंग्राई नामक यह चाय बागान जालान इंडस्ट्रीज प्राइवेट लिमिटेड नामक कंपनी का है जिसमें जापानीज ग्रीन टी मैन्युफैक्चरिंग यूनिट शुरू किया गया है| मशीनों और हरी चायपत्ति के उत्पादन में जापान की तकनीकों का इस्तमाल कर असम में हरी चायपत्ति के उत्पादन का  भारत में यह पहला प्रयास है|

600 हेक्टेयर जमीन पर फैले इस चायबागान की फैक्ट्री में जापान की गुरिचा और होजिचा किस्म की हरी चायपत्ति का उत्पादन किया जा रहा है| जापान में उत्पादित अधिकांश चायपत्ति हरी होती है|कंपनी के 16 लाख किलो के कुल उत्पादन में से इस बागान में 6 लाख किलो चाय का उत्पादन होता है| इसी साल मई महीने में यह नई पद्धति शुरू की गई है|

यह कंपनी फैक्ट्री में उत्पादन के लिए जापान से चाय विशेषज्ञों को लाई है और फैक्ट्री को नाम दिया गया है छोटा तिंग्राई हरा ग्रीन टी फैक्ट्री| फैक्ट्री का नाम जापान के हरा परिवार को समर्पित है जिन्होंने असम में इस फैक्ट्री को स्थापित करने के लिए कड़ी मेहनत की है|

7.5 करोड़ की लागत से बनी फैक्ट्री में सालाना 3 लाख किलो हरी चाय के उत्पादन की क्षमता है| भारत में यह पहला अत्याधुनिक जापानीज ग्रीन टी फैक्ट्री है|

हरी चाय  एक प्रकार की चाय होती है, जो कैमेलिया साइनेन्सिस नामक पौधे की पत्तियों से बनायी जाती है। इसके बनाने की प्रक्रिया में ऑक्सीकरण न्यूनतम होता है। इसका उद्गम चीन में हुआ था और आगे चलकर एशिया में जापान से मध्य-पूर्व की कई संस्कृतियों से संबंधित रही। इसके सेवन के काफी लाभ होते हैं। प्रतिदिन कम से कम आठ कप ग्रीन टी हृदय रोग होने की संभावनाओं को कम करने कोलेस्ट्राल को कम करने के साथ ही शरीर के वजन को भी नियंत्रित करने में सहायक सिद्ध होती है। प्रायः लोग ग्रीन टी के बारे में जानते हैं लेकिन इसकी उचित मात्र न ले पाने की वजह से उन्हें उनका पूरा लाभ नहीं मिल पाता है।

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