इंदिरा गांधी का शासन अंग्रेजों के शासन से भी खराब था- बिहार का वेबसाइट

पटना

बिहार सरकार की एक वेबसाइट पर इंदिरा गांधी के शासन को अंग्रेजों के शासन से भी खराब बताया गया है. इसके कारण राज्य में गठबंधन सरकार में शामिल कांग्रेस नाराज है. बिहार के इतिहास पर लिखी समीक्षा में इंदिरा गांधी के ‘निरंकुश शासन’ और आपातकाल के समय बढ़े ‘दमन’ का हवाला दिया गया है. समीक्षा में भारत के आधुनिक इतिहास में जय प्रकाश नारायण (जेपी) के योगदान का जिक्र करते हुए कहा गया है, ‘यह जेपी ही थे, जिन्होंने निरंतर और मजबूती से इंदिरा गांधी के निरंकुश शासन और उनके छोटे बेटे संजय गांधी का विरोध किया था.’

बिहार सरकार की वेबसाइट में लिखा गया है कि आपातकाल के दौरान पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी का शासन अंग्रेजी सरकार से बहुत ज्यादा दमनकारी था. सरकार में शामिल कांग्रेस के लिए अब इस मामले में जवाब देते नहीं बन रहा है.

वेबसाइट के हिस्ट्री ऑफ बिहार सेक्शन में लिखा गया है कि ‘ जय प्रकाश नारायण ने दृढ़ता से इंदिरा गांधी और उनके छोटे बेटे संजय गांधी के अत्याचारी शासन का विरोध किया था.

जेपी का विरोध से गुस्साई जनता के डर से आपातकाल घोषित करने एक दिन पहले उनको दिल्ली के तिहाड़ में डाल दिया. जहां खतरनाक अपराधियों को कैद में रखा जाता था. उस स्वतंत्रता संग्राम सेनानी को जिसने कभी इंदिरा गांधी के पिता जवाहर लाल नेहरू के साथ आजादी की लड़ाई में हिस्सा लिया था. उनके साथ जेल में इतना बुरी तरह से पेश आया गया था इतना कि अंग्रेजों ने गांधी जी के साथ भी नहीं किया था, जब 1927 में चंपारण आंदोलन के समय उनको जेल में बंद गया था”.

वेबसाइट में लिखी गए इस तरह के तथ्यों के सामने आने के बाद से कांग्रेस में खलबली मच गई है. जदयू, राजद के साथ महागठबंधन सरकार की हिस्सेदार कांग्रेस की ओर से इस पर कड़ी आपत्ति करते हुए मीडिया प्रभारी चंदन यादव ने कहा कि हम इंदिरा गांधी के बारे में ऐसी बातें कतई कबूल नहीं करेंगे. इसे पार्टी फोरम पर उठाया जाएगा. कांग्रेस, सरकार से इस कंटेंट का हटाने की मांग करेगी. उनके अनुसार इंदिरा गांधी देश की बड़ी नेता थीं, जिनकी देश को नई दिशा देने बड़ी भूमिका रही। उनके बारे में ऐसी टिप्पणी ठीक नहीं है. दूसरी ओर, जदयू प्रवक्ता नीरज कुमार ने कहा कि दौर बदला है, संदर्भ बदले हैं. ऐसे में तथ्यों का ध्यान रखा जाना चाहिए. कांग्रेस के नेताओं का कहना है कि इंदिरा जी के बारे में जो भी लिखा गया है वो पूरी तरह से अस्वीकार्य है. पार्टी से अनुरोध करेंगे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से सामने मामला उठाए. वहीं बिहार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने इस मामले को जांचने की बात की है.

बिहार सरकार की वेबसाइट देखने के लिए यहाँ क्लिक करें 

Bihar website

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

%d bloggers like this: