भारत का पहला लड़ाकू ड्रोन रुस्तम-II का सफल परीक्षण

चित्रदुर्ग (कर्नाटक)

भारत के पहले स्वदेश में निर्मित लड़ाकू ड्रोन रुस्तम-II का सफल परीक्षण किया गया। ये ड्रोन लड़ाकू क्षमता वाला है। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन यानी डीआरडीओ ने कर्नाटक के चित्रदुर्ग में इस ड्रोन का सफल परीक्षण किया।

मानव रहित ड्रोन रुस्तम-II पूरी तरह स्वदेश में निर्मित है। डीआरडीओ ने कर्नाटक के चित्रदुर्ग में इस मानवरहित ड्रोन का सफल परीक्षण किया। इसके सफल परीक्षण को देश की सुरक्षा में बड़ी कामयाबी के तौर पर देखा जा रहा है। इसे तीनों सशस्त्र बलों के लिए 24 घंटे खुफिया, निगरानी और टोही (आईएसआर) की भूमिका निभाने के लिए विकसित किया जा रहा है।

रुस्तम-II ड्रोन की खूबी है कि कि ये दुश्मन पर हमला भी कर सकता है। ये मानवरहित यान है इसलिए इसका इस्तेमाल अमेरिका के प्रिडेटर ड्रोन की तरह किया जा सकता है। रुस्तम-II ये 24 घंटे तक उड़ान भर सकता है। इसके साथ ही देश के सैन्य बलों के लिए इसे टोही मिशन पर भी भेजा जा सकता है।

भारत का पहला लड़ाकू ड्रोन रुस्तम-II का सफल परीक्षण

रुस्तम-II का डिजाइन डीआरडीओ की बेंगलुरु स्थित प्रयोगशाला एयरोनॉटिकल डिवलपमेंट एस्टेब्लिशमेंट और एचएएल-बीईएल ने मिलकर किया है। इस मानवरहित यान का वजन दो टन है। डीआरडीओ के युवा वैज्ञानिकों की टीम ने इसका परीक्षण किया। यह भी पहली अनुसंधान एवं विकास प्रोटोटाइप यूएवी है, जिसे पहली उड़ान के बाद सैन्य उड़ान योग्यता और प्रमाणन (सीईएमआईएलएसी) और महानिदेशालय वैमानिकी गुणवत्ता आश्वासन के केंद्र (डीजीएक्यूए) से प्रमाणित किया जाएगा।

रुस्तम-II मध्यम रेंज इलेक्ट्रो ऑप्टिक (एमआरईओ), लांग रेंज इलेक्ट्रो ऑप्टिक (एलआरईओ), सिंथेटिक एपर्चर रडार (एसएआर), इलेक्ट्रॉनिक इंटेलिजेंस (ईएलआईएनटी), संचार इंटेलिजेंस (सीओएमआईएनटी) और स्थिति जागरूकता पेलोड समेत विभिन्न संयोजनों को ले जाने के लिए सक्षम है बनाया गया है।

फिलहाल रुस्तम-II को डिजाइन मानकों, उपयोगकर्ता सत्यापन परीक्षण के लिए भेजे जाने से पहले के लिए अभी कई परीक्षणों से गुजरना होगा। रुस्तम-II एक मल्टीमिशन यूएवी है। जिसे तीनों सशस्त्र बलों के लिए 24 घंटे खुफिया, निगरानी और टोही (आईएसआर) की भूमिका निभाने के लिए विकसित किया जा रहा है।

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