भारत ने किया एक और कमाल – अंतरिक्ष में भेजा “एस्ट्रोसैट”

News desk/nesamachar.in

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने भारत के एस्ट्रोसैट सहित सात उपग्रहों को ले जाने वाले रॉकेट का प्रक्षेपण कर इतिहास रच दिया है। अंतरिक्ष क्षेत्र में भारत की ये बड़ी कामयाबी है। एस्ट्रसैट की मदद से ब्रहांड को समझने में मदद मिलेगी।

यह रॉकेट अपने साथ 1,513 किलोग्राम वजनी 180 करोड़ रुपए की लागत वाले भारतीय एस्ट्रोसैट उपग्रह के अलावा अमेरिका के चार और इंडोनेशिया तथा कनाडा के एक-एक उपग्रहों को ले गया है। एस्ट्रोसैट को पृथ्वी से 650 किलोमीटर की ऊंचाई पर कक्षा में स्थापित किया जाएगा।

आज रॉकेट के साथ छोड़े जाने वाले उपग्रहों में देश का पहला बहु-तरंगदैर्ध्य वाला अंतरिक्ष निगरानी उपग्रह ‘एस्ट्रोसैट’ भी शामिल है, जो ब्रह्मांड के बारे में अहम जानकारियां प्रदान करेगा। आज छह विदेशी उपग्रहों के सफल प्रक्षेपण के साथ ही भारत अंतरिक्ष अनुसंधान की दिशा में 50 वर्ष पूरा कर लेगा। भारत अब तक शुल्क लेकर 45 विदेशी उपग्रहों का सफलतापूर्वक प्रक्षेपण कर चुका है।

इसरो ने 2010 में एक साथ 10 उपग्रहों का प्रक्षेपण किया था, जिसमें भारत के दो काटरेसैट-2ए उपग्रह भी शामिल थे। आज भारत तीसरी बार एक साथ सात उपग्रहों का प्रक्षेपण किया। सात उपग्रहों को ले जाने वाला यह चार स्तरीय पीएसएलवी-एक्सएल रॉकेट 44.4 मीटर लंबा और 320 टन वजनी है।

रॉकेट के साथ लांच किए जाने वाले सातों उपग्रहों का कुल वजन 1,631 किलोग्राम है। उड़ान भरने के 22 मिनट बाद रॉकेट धरती की सतह से 650 किलोमीटर की ऊंचाई पर एस्ट्रोसैट को उसकी कक्षा में स्थापित कर देगा। इसके कुछ ही मिनट के अंतराल पर शेष छह उपग्रह भी अपनी-अपनी कक्षा में स्थापित कर दिए जाएंगे। इस अभियान में कुल 25 मिनट का समय लगेगा।

 

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