बड़ा खुलासा-असम के जेलों में 5000 कैदी देख रहे हैं न्याय की राह

गुवाहाटी 

सितंबर 2015 में जारी नेशनल क्राइम रिकार्ड्स ब्यूरो की रिपोर्ट ने असम के जेलों में कैदियों की हालत पर एक चौंकाने वाला बड़ा खुलासा किया है। रिपोर्ट के मुताबिक असम में कैदियों से भरे जेलों में करीब 5000 कैदी अब भी देख रहे हैं  न्याय की राह। इस रिपोर्ट में साल 2014 तक का डाटा शामिल किया गया है। 31 दिसंबर 2014 तक 5193 ऐसे मामले पाए गए जिनकी जाँच चल रही थी। इनमें से 186 महिलाएं थी जबकि 20 विदेशी थे।

राज्य में सबसे विलंबित न्याय का मामला एक दशक पहले सामने आया था जब माचंग लालुंग नामक शख्स को 50 साल से अधिक समय जेल में काटने के बाद 2005 में 77 साल की उम्र में रिहा किया गया।LALUNG MACHAANG

रिपोर्ट के मुताबिक असम के जेलों में कम से कम 23 ऐसे कैदी है जिनका मामला कोर्ट में चल रहा है और इस दौरान वे 5 साल से अधिक समय जेल में बिता चुके है। वहीँ 3450 कैदी अपने मामले के निपटारे के लिए एक साल से जेल में इंतज़ार कर रहे है।

महज इंतज़ार तक ही बात खत्म नहीं होती। इन जेलों में ये कैदी बदत्तर हालातों में रहते है और अगर जेल भरा हुआ हो तो स्थिति की आप कल्पना तक नहीं कर सकते। राज्य में 31 जेल है। रिपोर्ट के मुताबिक इन जेलों में कैदियों की क्षमता 8192 है जबकि कुल कैदी 8396 है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि जेल में कैदियों की दशा क्या होगी।

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