होली विशेष: जब असम में झलकने लगी राजस्थान की झलक

गुवाहाटी 

MANZAR ALAM-GUWAHATI-2By -Manzar Alam 

होली का त्यौहार आते ही फागुन के रसिये लोगों में बसंती खुमार चढ़ना शुरू हो जाता है. जगह जगह चंग पर थाप पड़ने लगते हैं. गीत-संगीत और लोक न्रत्य के कार्यक्रमों का आयोजन होने लगते हैं. ऐसे में देश का कोई हिस्सा बाक़ी नहीं रहता जहां होली का हर्ष-उल्हास देखने को नहीं मिलता हो. असम में भी कई दिन पहले से लोग  होली के रंग में सराबोर हो जाते हैं, और असम में झलकने लगती है राजस्थान की झलक .

HOLI--photo--2

गुवाहाटी में हर वर्ष होली के अवसर पर सैकड़ों की संख्या में राजस्थान के लोक कलाकार असम पहुंचते हैं और जगह जगह लोक गीत-संगीत और न्रत्य के कार्यक्रम पेश करते हैं. यह लोक कलाकार जब अपने साथियों के साथ तान छेड़ते हैं तो अंग अंग बरबस थिर्कने लगता है. “धरती धोरां री” की महक लिए इन लोक गीतों में वास्तव में इतनी गहराई और कशिश होती है की राजस्थान से दूर असम में रहते हुए भी राजस्थानी लोग खुद को थोड़ी देर के लिए राजस्थान में ही महसूस करने लगते हैं. श्रृंगार रस के साथ साथ विरह रस के गीत हर परदेसी को दूर बैठे किसी अपने की याद दिला देते हैं. इन लोक कलाकारों की भी यही कोशश होती है की देश के अलग अलग राज्यों में रहने वाले राजस्थानी लोग दूर रह कर भी अपने संस्कृति और परम्परा से जुड़े रहें.

HOLI--photo--3

हालांकि अपने संस्कृति और परंपरा को जीवित रखने का लोक कलाकारों का यह प्रयास स्राहनिये है लेकीन बांसुरी, ढोलक, झाल और मजीरे जैसे परंपरागत देशी वाद्य यंत्रों के बीच अब आधुनिक विदेशी इलेक्ट्रोनिक साजो-सामान, और हिंदी फ़िल्मी गीतों के धुन,  जहां एक ओर होली के लोक गीतों का खालिस्पन को प्रभावित् कर रहे हैं, वहीं दूसरी और मेहरी की जगह प्रोफेशनल न्र्त्यांग्नाओ के आ जाने से ऐसा लगने लगा है की लोगों की पसंद अब बदल रही है.

फिर भी इन लोक गीतों के शब्दों में इतना मिठास और न्रत्य में इतनी कशिश होती है की वहाँ बैठे लोग खुद को रोक नहीं पाते और खुद भी इन कलाकारों के साथ थ्रिकने लगते हैं. किया महिला और किया पुरुष सभी एक मंच पर न्रत्य का आनंद उठाते हैं. कुछ हंसी मजाक और कुछ मस्ती होती है.  और कलाकारों को अपने कला दिखाने का अवसर मिलता है. झाल उठाए पुरुष और उस पर नृत्य करती महिला , वाकये राजस्थान लोक न्रत्य का अद्भूत नमूना है. जो शायद और कहीं देखने को नहीं मिलता.

संस्कृति को बचाए रखने और संस्कृती से खुद को जोड़े रखने का यह भले ही होली के बहाने ही प्राप्त होता है लेकिन कुछ समय में ही जीवन में एक रस ज़रूर घोल जाता है.

video ज़रूर देखें 

https://www.youtube.com/watch?v=Ey9vz2zqjAA

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

%d bloggers like this: