होली के रंग में रंगने लगा है गुवाहाटी का फैंसी बाज़ार

गुवाहाटी 

Ravi AjitsariyaBy – Ravi Ajitsariya 

होली के दो दिन शेष रह जाने से फैंसी बाज़ार में रंगों की दुकानें सजनी शुरू हो चुकी हैं l उत्तर प्रदेश के कानपुर से आने वालें रंगों के करीब 80 कारीगरों ने हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी फैंसी बाज़ार में रंगों की दुकानें लगाईं हैl होली के अवसर पर ये कारीगर हजारों किलोमीटर का सफ़र करके गुवाहाटी आते है सजाते हैं रंगों से और गुलाल की दुकाने l

रंग और गुलाल का होली में विशेष महत्व होता है, यही कारण है होली के एक सप्ताह पूर्व से ही वातावरण में गुलाल उड़नी शुरू हो जाती हैl गुवाहाटी में हमेशा से ही परम्परागत होली ही वर्षों से मनाई जाती रही थी, जब तक की आधुनिकता ने उस परंपरा में सेंध नहीं लगा दी l अब गुवाहाटी में आधुनिक होली के रंग देखे जा सकते है, जहाँ एक और परंपरा है तो दूसरी और नवयुवकों के लिए रैन डांस जैसे नयें उपक्रम भी है l इस मिलेजुलें रंग को गुवाहाटी वासी आनंद के साथ ग्रहण कर रहें है l यही वजह है कि होली के रंग में रंगने लगा है गुवाहाटी का फैंसी बाज़ार |

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माघ माह के सरकते ही, मौसम में अजीब सी सरसराहट सी आने लगती है l इस सरसराहट की  पदचाप उस वक्त तेज हो जाती है, जब फागुन माह में तेज हवा मौसम को असहनीय बना देती है l हवा में अजीब सी मादकता भर जाती है l चारों ओर का माहोल धूल भरा होने के चलते, यह स्पष्ट संकेत लोगों को मिलने लगता है, कि होली का त्यौहार करीब ही है l

महिलाएं होली के पन्द्रह दिन पहले से ही गोबर के कंडे बनाना शुरू कर देती है, जिसे होलिका दहन में होलिका माता की पूजा अर्चना करके जलाया जाता है महिलाएं ठंडाई, मिठाई अन्य पकवान बना कर होली महोत्सव को खाज और नाच का एक मनमोहक त्यौहार बना देती है l  परिवार के बड़े-बुजुर्गों से आशीर्वाद लेती है l

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होली के त्यौहार के पालन के लिए, प्रवासियों के एक बड़ी तादाद अपने मूल प्रदेश को लौट जाते है, और परिवार के बीच होली मानते है l गीत और संगीत का यह पर्व प्रकृति के उत्कर्ष को अंगीकार करते हुवे लोगों को भाईचारे का सन्देश देती है l इसी मादकता के बीच, होली के मनमोहक गीतों की बहार लेकर कुछ मनचले निकल पड़ते है l गुवाहाटी में होली के गीतों को लोगों तक पहुँचाने का श्रेय उन कलाकारों एवं सीडी वितरकों को जाता है, जिन्होंने बड़े जतन करकें स्थानीय कलाकारों के साथ घंटों नींद खराब की और नए नए गीत लोगो तक पहुचाएं l

‘मेघाली म्यूजिक’ एक अन्यतम नाम है, इस कड़ी में, जिसने होली के गीतों को केसेटों और उसके बाद सीडी में उतार कर होली को गीतमय बना डाला. अब एक महीने पहले से ही फैंसी बाजार में होली के गीतों की फुवार लोगो के उपर पड़ती है, जब वे यहाँ से गुजरतें है l ‘मौसम फागन को आयो रे रसिया’, जैसे अमर गीत, आज हर कोई कि जुबान पर गता हुवा नजर अता है  l

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जब बात गीत संगीत की होती है, उन संगठनो को भी याद करना जरुरी है, जिन्होंने गुवाहाटी की होली को अलग अंदाज में लोगों के समक्ष पेश किया थाl होली अपने आधुनिक रूप में लोगो के दिल में इस तरह से बसी हुवी है, कि चाहे कितनी भी आधुनिकता आ जाये l रासायनिक रंगों का उपयोग अब वर्जित सा हो गया है l इसके स्थान पर प्राकर्तिक गुलाल का उपयोग अधिक होने लगा है. लोग अब एक दूसरे को गुलाल लगा कर गले मिलते है l प्रेम और प्यार के त्यौहार को मानाने के लिए बच्चे और जवान सभी सडकों पर निकल पड़ते है l जीवन कि आपाधापी में होली एक ऐसा त्यौहार है, जो दो चार दिन मस्ती ले कर आता है l

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